आज नगर भटगांव में धूमधाम से मनाया गया भोजली त्यौहार। – छ.ग.का नंबर 1 न्यूज़ पोर्टल


रुपनारायण सिंह/जनसंवाद/भटगांव

भटगांव—- – छत्तीसगढ़ में भोजली का त्यौहार रक्षाबंधन के तीसरे मनाया गया है। छोटी-छोटी टोकरीयों में थालियों में मिट्टी डालकर उसमें अन्न के दाने बोए जाते हैं यह दाने कुछ धान,गेहूं ,जौ, कोदो,अरहर मूंग, उड़द आदि के होते हैं। इसे भोजली कहते हैं। अलग-अलग प्रदेश में अलग – अलग नाम से जाना जाता है। प्राचीनकाल से देवी देवताओं की पूजा अर्चना के साथ प्रकृति की पूजा किसी न किसी रूप में की जाती रही है। नगर एवं ग्रामीण अंचल में भोजली बोने की परंपरा का निर्वहन पूर्ण श्रद्धा के साथ किया जाता है। छत्तीसगढ़ में भोजली पर्व का विशेष महत्व है,इस दिन गांव में लोग अपने कच्चे मित्रता को भोजली भेंटकर पक्के करते हैं और सभी वर्ग को भेंट कर आदर करते हैं भोजली में लोकगीत हैं जो श्रावण मास शुक्ल से रक्षाबंधन के दूसरे एवं तीसरे दिन तक गांव गांव में गूंजती है और भादो कृष्ण पक्ष में भोजली विसर्जन किया जाता है। आज़ भटगांव में भी भोजली पर्व को मनाते हुए परंपरा अनुसार यहां रक्षाबंधन के तीसरे दिन बाजे गाजे के साथ भोजली का विसर्जन किया जाता है नगर में भोजली पर्व मनाया गया। भोजली को लेकर ग्रामीण अपने – अपने घर से समूह के रूप में निकले और गांव के बड़े तालाब में पूरे विधि विधान पूजा अर्चना कर विसर्जन किया।एक दूसरे को भेंट भी किया गया वही आज़ राजापारा ढाबा चौक वाले नगर के बड़े तालाब में भोजली विसर्जन किया।