आरक्षण के भूत को कौन सी भभूत



जनधारा 24 पाॅलिटिकल डेस्क। Political ghost of tribal reservation:

चुनावी साल और सियासी बवाल का चोली दामन का साथ है।

भाजपा की नजर अब अपने पुराने गढ़ बस्तर पर लगी हुई है।

बस्तर को छत्तीसगढ़ की विधानसभा का

प्रवेशद्वार कहा जाता है।

ऐसे में भाजपा ने आदिवासी आरक्षण का भूत

एक बार फिर बाहर निकाला है।

8 और 9 नवंबर को भाजपा आरक्षण के भूत

के दम पर सियासी खेल,

खेलने की तैयारी में है।

तो वहीं सियासत के मंजे हुए बैगा भूपेश बघेल ने

इसके लिए ऐसी भभूत निकाल रखी है कि

इनका भूत भागता नजर आएगा।

क्या है आदिवासी आरक्षण का भूत ?

और उसके लिए सीएम भूपेश बघेल देंगे कौन सी भभूत ?

सब कुछ आपको बताएंगे बस आप बने रहिए जनधारा 24 के साथ-

 

 

बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही छत्तीसगढ़ में 2023 में

होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं।

एक तरफ जहां कांग्रेस अपना काम लोगों तक ले जा रही है,

वहीं कांग्रेस सरकार बीजेपी को घेरने में

कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

इस बीच सूबे में आदिवासी आरक्षण को लेकर

सियासत गरमा गई है।

इसको लेकर बीजेपी राज्य में

बड़े आंदोलन की तैयारी कर रही है।

सीएम भूपेश बघेल की भभूत

Political ghost of tribal reservation : आरक्षण के भूत को कौन सी भभूत देने की तैयारी में सीएम भूपेश बघेल…जानें

इधर कांग्रेस सरकार भी आदिवासी आरक्षण को लेकर गंभीर है।

आदिवासी समाज के 12 फीसदी आरक्षण में

कटौती से कई संगठन नाराज हैं।

ऐसे में राज्य सरकार आदिवासी नेताओं और विधायकों

को पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में आरक्षण व्यवस्था पर

शोध करने के लिए भेजने की योजना बना रही है।

वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी

विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की बात कही है।

अब इस पूरे मामले को ऐसे समझिए

दरअसल, 19 सितंबर को बिलासपुर हाईकोर्ट ने

राज्य में 58 फीसदी आरक्षण को रद्द कर दिया था।

इसके बाद अब 2011 की तरह आरक्षण की स्थिति हो गई है।

एसटी आरक्षण 32 प्रतिशत किया गया था,

लेकिन उच्च न्यायालय के फैसले के बाद

अब राज्य में आरक्षण 12 प्रतिशत से

घटकर 20 प्रतिशत हो गया है।

वहीं, ओबीसी के लिए 14 फीसदी और

एससी के लिए आरक्षण 13 से बढ़ाकर

16 फीसदी कर दिया गया है।

इस मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ में

सियासत तेज हो गई है।

प्रदेश में आदिवासी आरक्षण के लिए

भाजपा 8 व 9 नवंबर को

पूरे प्रदेश में जिला मुख्यालय का घेराव करेगी।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि संभाग मुख्यालय

पर भी प्रदर्शन किया जाएगा।

21 नवंबर को बस्तर में और 28 नवंबर को सरगुजा में प्रदर्शन होंगे।

कांग्रेस को घेरने में जुटी भाजपा की टीम

बीजेपी नेता रामविचार नेताम का कहना है कि

कांग्रेस सरकार ने प्रदेश की जनता को ठगने का काम किया है।

भाजपा शासन के दौरान आदिवासियों को 32 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था।

अब छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासियों के साथ साजिश कर रही है

अब आदिवासियों की लड़ाई को बीजेपी सड़क पर उतारेगी।

आने वाले समय में आदिवासी समाज कांग्रेस सरकार के खिलाफ लड़ेगा।

राज्य के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि

प्रदेश के आदिवासी मतदाता ही राज्य की सरकार तय करते हैं।

State में 29 सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं।

जबकि राज्य की 11 विधानसभा सीटें ऐसी हैं

जहां आदिवासी मतदाता बड़ी संख्या में हैं।

यह निर्णायक भूमिका निर्धारित करता है।

ऐसे में दोनों पक्ष आदिवासियों को शांत करने की कोशिश में लगे हैं।

2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने

29 आदिवासी सीटों में से 27 पर जीत हासिल की थी,

जबकि बीजेपी के खाते में सिर्फ दो सीटें आईं।

अब बीजेपी आदिवासी आरक्षण को

मुद्दा बनाकर आदिवासी वोटरों को

अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।

तो वहीं कांग्रेस सरकार के मुखिया भूपेश बघेल भी

इसके लिए लगातार तैयारियां कर रहे हैं।

उनकी पूरी कोशिश है कि मामले को समय रहते सलटा लिया जाए।

देखना ये होगा कि प्रदेश के मुखिया अपनी इस रणनीति में कितने कामयाब होते हैं ?