इस जिले में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र बदहाली का जीवन जीने को मजबूर , जानिए वजह



बलरामपुर। बलरामपुर जिले में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के पहाड़ी कोरवा की करीब 20 घरो की आबादी आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। आंगनबाड़ी केंद्र और स्कूल भवन बसाहट से दूर होने के कारण करीब 30 से 40 नौनिहालों का भविष्य अधर में है । गांव में स्थित उपस्वास्थ्य केंद्र में हमेशा ताला लटकने से ग्रामीणों को इलाज के लिये दूर जाना पड़ता है या फिर झाड़फूंक और जड़ीबूटी का सहारा लेना पड़ता है। वही  इस मामले में अब एसडीएम ने गांव में कैंप लगाकर ग्रामीणों की समस्या का हल निकालने का आश्वासन दे रहे हैं ।

वर्ष 1995 -1996 से बसाहट है

दरअसल हम बात कर रहे है जिले में वाड्रफनगर विकाशखण्ड के झापर ग्राम पंचायत के आश्रित गांव कारिमाटी की जहाँ पर राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के पहाड़ी कोरवा का 20 परिवार और जिनकी जनसंख्या करीब 80 से 90 के बीच में है जो कि वर्ष 1995 -1996 से यहां  निवास कर रहे  हैं  और ये जनजाति आज भी अपनी मूलभूत समस्याओं के लिए जूझ  रहे हैं।

गांव में बिजली तक नहीं 

बता दें कि  ग्रामीणों ने शासन -प्रशासन के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए  का कि  उनके गांव में आज तक बिजली तक नहीं पहुँच पाई है और केरोसिन महँगा होने के कारण  अंधेरे में ही जीवन गुजर बसर करना पड़ता है। प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कुछ वर्ष पहले गांव में सोलर प्लेट तो लगवाया था लेकिन अब वो भी ख़राब हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में आंगनबाड़ी और स्कूल का संचालन बसाहट से करीब तीन किलोमीटर दूर किया जा रहा है । जहाँ तक छोटे- छोटे बच्चे सड़क के अभाव में वहाँ तक नही पहुंच पाते हैं और  करीब 30 से 40 नौनिहाल शिक्षा से वंचित है जिनका भविष्य अधर पर है।

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पानी की समस्या

गांव में पानी की समस्या को दूर करने के लिए कुछ वर्ष पहले दो हैंडपंप तो लगवाया गया था, जिसमें से एक हैंडपंप में आयरन की मात्रा ज्यादा होने से लाल पानी निकल रहा है, जिससे ग्रामीणों के बर्तन भी लाल हो चुके है , जिसके कारण ग्रामीणों ने गांव से ही बहने वाली एक बरसाती नाले पर बड़ा गड्ढा खोदकर उसी से दूषित पानी पीने को मजबूर है।  जिसके कारण गांव के  बच्चे अक्सर बीमार पड़ जाते है।

स्वास्थ्य सुविधा का अभाव

गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से शासन ने करीब 30 लाख की लागत से उपस्वास्थ्य केन्द्र तो खोल दिया है लेकिन उसमें पदस्थ डाक्टर केंद्र में ताला बंद करके हमेशा नदारद रहते है ।  जिसके कारण ग्रामीणों को इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है या फिर झाड़ फूंक और जड़ी बूटियों पर ही निर्भर रहना पड़ता है।

वादे सिर्फ वादे रह जाते हैं

ग्रामीणों ने बताया कि नेता यहाँ चुनाव के समय सिर्फ वोट मांगने आते है और गांव में विकास का झूठा आश्वासन देकर चले जाते है जिसके बाद फिर दुबारा कभी झांकने तक नही आते है। जिससे अब यहाँ के ग्रामीण महज एक वोटर बनकर ही रह गए है।

वहीं गांव के सरपंच ने बताया है कि पहाड़ी कोरवा परिवार लंबे समय से वन भुमि पर निवासरत है।  जिनको अभी तक वन भूमि का पट्टा नहीं मिल पाया है , जिसके लिए कई बार अर्जी भी लगाई गई है और यही वजह है कि यहाँ पर सरकार की योजनाओं का संचालन नहीं हो पा रहा है।

वही जब पूरे मामले की जानकारी वाड्रफनगर के एसडीएम दीपक निकुंज को दी गई तो उन्होंने गांव में जल्द ही सभी विभागों के साथ मिलकर कैम्प के माध्यम से ग्रामीणों की समस्याओं का हल निकालने की बात कही है , लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि  जो काम 25 वर्षों से नहीं हो पाया वो क्या एसडीएम साहब के गांव में कैम्प लगाने से हो पायेगा या फिर राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र यूं ही बदहाली का जीवन जीने के लिए मजबूर रहेंगे ।

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