कटघोरा : वनमण्डल SDO संजय त्रिपाठी के कुशल नेतृत्व में बेबी एलिफैंट की मौत के 12 आरोपियों को पकड़ने में मिली सफलता.. मुख्य आरोपी की होगी जल्द गिरफ्तारी.. हांथीयों की बढ़ती संख्या को लेकर कही ये बात..



कोरबा/कटघोरा 26 अक्टूबर 2022 ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ) : कटघोरा वन विभाग के उप वनमंडलाधिकारी संजय कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने बेबी एलीफेंट को मारकर खेत में दफनाए जाने के मामले को सुलझाने में सफलता पाई है। इस वारदात की साजिश स्थानीय जनपद सदस्य ने रची थी। इसी के इशारे पर घटना को अंजाम दिया गया था। मामले में एक नाबालिग सहित 12 आरोपी पकड़े गए हैं, जबकि मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। वन विभाग की टीम ने वैधानिक कार्यवाही उपरांत सभी आरोपियों को जेल दाखिल करा दिया है।

बतादें की बेबी एलिफैंट की मौत के 12 आरोपियों की गिरफ्तारी में SDO संजय त्रिपाठी की महत्वपूर्ण भूमिका रह। घटना के बाद से वे लगातार घटनास्थल बनिया गाँव में दो दिनों तक लगातार जांच टीम के साथ मुस्तैद रहे। मुख्य आरोपी स्थानीय जनपद सदस्य कोमल सिंह अभी भी फरार चल रहा है। इस मामले को लेकर श्री त्रिपाठी ने बताया कि टीम लगातार उक्त आरोपी की ट्रेसिंग कर रहा है और वो जल्द वन विभाग की गिरफ्त में होगा। उन्होंने बताया कि हांथी लगातार कोरबा जिले की ओर रुख कर रहे हैं और वे सभी कटघोरा वन मण्डल के केंदई, एतमा नगर व पसान रेंज में विचरण कर रहे है। फिलहाल क्षेत्र में 44 हांथीयों का दल स्वक्षन्द विचरण कर रहे है तथा वन विभाग लगातार हांथीयों की मानिटरिंग कर रहा है।

कटघोरा वन मण्डल का वातावरण जीव-जंतुओं को अपनी ओर तेजी से आकर्षित कर रहा है। इस वजह से हाथी समेत अन्य वन्य प्राणियों का संख्या में यहां लगातार इजाफा हो रहा है। कटघोरा वन मण्डल काफी बड़े क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहां वन विभाग द्वारा वन्य प्राणियों और जीव-जंतुओं को हर तरह की जरुरी सुविधाएं मुहैया करायी जाती है। यहां पानी की भी कमी नहीं है। हालांकि कटघोरा वन मंडल की सबसे बड़ी विशेषता यहां का शांत वातावरण है, जो जन्तुओं के अलावा देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशी पक्षियों को भी अपनी ओर आकर्षित करने से नहीं चूकता है। यही वजह है कि कटघोरा वन मण्डल के एतमा नगर, केंदई व पसान रेंज में हाथियों के अलावा भालू, जंगली सुअर, लोमड़ी, मोर और बुलबुल की विभिन्न प्रजातियों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। हांथीयों की बढ़ती संख्या यहां के लिए बहुत अच्छी बात बात है। यकीनन भविष्य में हांथीयों के संरक्षण को लेकर कोरबा जिले का कटघोरा अपनी एक अलग पहचान बनाएगा।