कहां किन्नरों के हाथों होता है मां का श्रृंगार….



जनधारा 24 न्यूज डेस्क । Sharadiya Navratri 2022 : वहां शाम से ही लगने लगता है किन्नरों का जमावड़ा। आधी रात को निकाली जाती है भव्य यात्रा।

भोर में किन्नर ही अपने हाथों से मां दंतेश्वरी का श्रृंगार भी करते हैं।

नवरात्रि के पहले दिन भोर में मां का प्रथम दर्शन भी इसी समाज के लोग किया करते हैं।

इसके लिए छत्तीसगढ़ के समीपवर्ती राज्यों से किन्नर समाज के लोग आते हैं।

Sharadiya Navratri 2022

छत्तीसगढ़ के बस्तर में शारदीय नवरात्रि 2022 का पर्व भी बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है।

आराध्या देवी मां दंतेश्वरी मंदिर में सुबह से ही लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

यहां नवरात्रि के पहले दिन बस्तर में किन्नर समाज द्वारा

देवी की प्रथम पूजा करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

Sharadiya Navratri 2022 : किन्नर करते हैं मां के पहले दर्शन

इसके साथ ही रविवार व सोमवार की मध्यरात्रि को किन्नर समाज की

ओर से शहर में श्रृंगार यात्रा निकाली जाती है।

मध्यरात्रि में वहां किन्नरों द्वारा श्रृंगार यात्रा निकाली जाती है।

भजनों की धुन पर नाचते- गाते ये किन्नर समाज के लोग ठीक

भोर के 4 बजे मां के दरबार पर पहुंच जाते हैं।

उसके बाद खुलते हैं मां दंतेश्वरी देवी मंदिर के कपाट।

किन्नरों द्वारा पहला दर्शन किया जाता है,

उसके बाद किन्नरों द्वारा मां को पहली चुनरी और श्रृंगार किया जाता है.

Sharadiya Navratri 2022 : मां को अर्पण करते हैं श्रृंगार की वस्तुएं

दरअसल, हर साल नवरात्रि शुरू होने से

पहले किन्नर समुदाय देर रात मां दंतेश्वरी को पहली चुनरी चढ़ाता है।

इस दौरान किन्नर समुदाय के सभी लोग

श्रृंगार का सामान लेकर दंतेश्वरी के दरबार में पहुंचते हैं

और भक्ति में नाचते गाते हैं।

वहीं किन्नर समाज की अध्यक्ष रिया परिहार ने बताया कि

किन्नरों की श्रृंगार यात्रा में हर साल जगदलपुर के अलावा

पड़ोसी राज्य उड़ीसा से भी किन्नर भक्त इस यात्रा में शामिल होने के लिए बस्तर पहुंचती है ।

Sharadiya Navratri 2022

हर साल नवरात्रि के पहले दिन किन्नरों द्वारा श्रृंगार यात्रा निकाली जाती है।

और इसे बस्तर के लोगों का भी समर्थन मिलता है।

सभी किन्नर माता रानी के भजन की धुन पर नाचते हैं

और मां को चुनरी और श्रृंगार का सामान चढ़ाने के लिए मंदिर पहुंचते हैं।

Sharadiya Navratri 2022 : बस्तर के लोगों के लिए मांगते हैं दुआएं

अध्यक्ष रिया का कहना है कि किन्नरों की मां दंतेश्वरी में गहरी आस्था है

इसलिए हर साल नवरात्र के पहले दिन ही किन्नरों द्वारा मां को चुनारी

और श्रृंगार किया जाता है।

किन्नरों ने कहा कि वह भी समाज का एक प्रमुख हिस्सा हैं।

इस पूजा के पीछे उनका उद्देश्य है कि बस्तर के

सभी व्यापारियों और निवासियों को किसी भी तरह की

समस्या का सामना न करना पड़े।

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किसी की गोद खाली न रहे,

इसलिए वे मां दंतेश्वरी की पूजा करने आते हैं।

ऐसा माना जाता है कि नवरात्रि में किन्नरों द्वारा ही

मां दंतेश्वरी देवी के प्रथम दर्शन किए जाते हैं।

Sharadiya Navratri 2022 : वेश्यालय की मिट्टी से तैयार होती है दुर्गा की मूर्ति

कोलकाता में एक बेहद पुरानी परंपरा है। यहां मां दूर्गा की मूर्ति

बनाने में वेश्यालय की मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है।

कुम्हार टोली के कुम्हार इसका बंदोबस्त खुद करते हैं।

ये रवायत कई पीढ़ियों से चली आ रही है।

ऐसी मान्यताएं ही हमारी मजबूत संस्कृति का मजबूत आधार हैं।

इंसान भेदभाव करता है, पर देवी मां कभी किसी के भी साथ भेदभाव नहीं करतीं।