धीरेंद्र शास्त्री के बोल पर बवाल, कहीं चुनावी रणनीति

CG News Today



  • अंकिता शर्मा

रायपुर।  छत्तीसगढ़ में इन दिनों बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की रामकथा चल रही है। रोजाना उन्हें सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रहती है, जहां-जहां धर्मांतरण हो रहा है, वहां रामकथा सुनाने जा रहे हैं, धर्मांतरण रोकने का उन्होंने संकल्प लिया है, बहुत सारे लोगों को हिंदू धर्म में वापसी करवा रहे, साथ ही सनातन का प्रचार कर रहे है, इतना कहना बस भर था फिर क्या था बवाल मच गया राजनीति शुरू हो गई।

बागेश्वर धाम सरकार  का देशभर में चर्चा

गौरतलब है कि बागेश्वर धाम सरकार को नागपुर में अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति की तरफ से चुनौती दी गई थी।

इस पर देशभर में बवाल मच गया था।  हिंदू संगठनों ने भी अंधश्रद्धा उन्मूलन समिति के प्रमुख श्याम मानव का पुतला दहन किया था।

वहीं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने रायपुर के दिव्य दरबार में श्याम मानव को आमंत्रण दिया था।

उन्होंने चुनौती स्वीकार करते हुए किराए का खर्चा भी उठाने का बयान दिया था।

तब से मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

राजनीति हो ही रही थी तो प्रदेश के मुखिया भी कूद गए और कह दिया लोगों को सिद्धियां मिलती है।

सिद्धियों का प्रयोग चमत्कार दिखाने में नहीं करना चाहिए

रामकृष्ण परमहंस और भगवान बुद्ध इसके उदाहरण हैं।  सिद्धियों से इंकार नहीं किया जा सकता, लेकिन चमत्कार नहीं दिखाना चाहिए, ये जादूगरों का काम है, ये उचित नहीं है।  सिद्धियों का प्रयोग चमत्कार दिखाने में नहीं करना चाहिए, ऋषि-मुनियों ने भी कहा है।  चंगाई सभा में भी यहीं चमत्कार है।  इससे जड़ता आती है। धर्म बचाने का ठेका लेने वाले धोखे में हैं।

सुनील सोनी ने कहा- धर्म मंच को चुनौती देना अपमानजनक

अब बवाल कटा ही था तो बीजेपी कहा पीछे रहने वाली थी इससे पहले डॉ. रमन दरबार का चक्कर लगा ही चुके थे, तो भाजपा सांसद सुनील सोनी आ गए बचाव में बोले किसी भी धर्म मंच को चुनौती देना अपमानजनक, मैं इसका विरोध करता हूं, वहां कोई चमत्कार नहीं दिखाया जा रहा है, हनुमान जी की कृपा से लोगों का हौसला बढ़ा है।
इसके लिए प्रयास किये जा रहे हैं।  धर्मांतरण करने वाले जो लोग हैं उनको सनातन धर्म मे वापस लौटाया जा रहा हैं। बागेश्वर धाम के बाबा का रायपुर में स्वागत करता हूं।

बाघेश्वर सरकार ने राजनीतिज्ञों को चर्चा की नई बहस दे दी है पर सवाल उठता है की सनातन के इस हार्ड कौर एजेंडे का आखिर लाभ किसको मिलेगा, कहीं ये चुनाव से पहले की कोई रणनीति तो नहीं, या वाकई भक्त और गुरु की महिमा है।