-नगर या गांव की श्रेणी में एक झलक नगर पंचायत की खोखली बुनियाद।


रुपनारायण सिंह की कलम से/जनसंवाद/भटगांव

भटगांव-नगर में बुनियादी सुविधा होने के बाद भी नगर को देखने में ऐसा लगता है जैसे गांव का कोई बड़ा कस्बा है भटगांव —नगर या गांव की श्रेणी में एक झलक नगर पंचायत की खोखली बुनियाद पर नजर डाली जाए तो नगर में 2008 में निर्मित खेल मैदान,नया बस स्टैंड, पुष्प वाटिका, हाट-बाजार यहां उपलब्ध होने के बाद भी नगरवासियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। फिर भी यहां के विकास का खोखला दावा किया जाता है।नगर में विकास गाड़ी की गति धीमी से जरुर चल रही है। जिसका गति बढाने की जरुरत है। फिर भी नगर को सुनियोजित ढंग से “बसाने” का जिम्मेदारी नगरीय प्रशासन का रहता है।नगर के चारों दिशाओं में बड़ी तेजी से विस्तार हो रहा है साथ ही साथ यहां की जनसंख्या भी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है उस हिसाब से नगर की सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने की आवश्यकता है। नगर में चाहे सड़क निर्माण का मामला हो, नाली, प्रकाश व्यवस्था , या अन्य कार्य सुनियोजित ढंग से नहीं किया जा रहा है जिसके कारण नगर को देखने में भटगांव” गांव “जैसे लगता है
नगरीय प्रशासन द्वारा मास्टर प्लान तैयार करके कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जा रहा है। अभी भी नगर में लाईट व्यवस्था ,सड़क और नाली मामले में आसपास के नगरों की तुलना में ,””भटगांव “काफी पीछे है इसके अलावा नगर में व्यापार जगत को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा यहां की व्यापार व्यवस्था संकुचित क्षेत्र में सिमटा हुआ है यहां के लोगों को व्यापार करने के लिए सुविधा नहीं मिल पा रहा है जिसके कारण यहां के व्यवसाय काफी कमजोर है नगरीय प्रशासन के द्वारा पुराना बस स्टैंड शमशान घाट के पास शासकीय भूमि है जिसमें अवैध अतिक्रमण किया गया था। उसे हटाकर नगरीय प्रशासन द्वारा चिन्हित किया गया था। वहां पर व्यवसायिक कांप्लेक्स का निर्माण कराने की जो योजना बनाया गया है। जिस पर कुछ लोगों द्वारा आपत्ति दर्ज किया गया है। उसका निराकरण कर वहां पर व्यवसायिक काम्प्लेक्स निर्माण कर लोगों को सुविधा देकर रोजगार को बढ़ावा देना चाहिए़ ताकि नगर के लोगों को अपनी व्यवसाय करने के लिए एक निश्चित स्थान मिल सके। जिससे नगर पंचायत का राजस्व भी बढ़ेगा और यहां के व्यवसाय को बढ़ावा भी मिलेगा नगर के पुराना बस स्टैंड का सबसे बुरा हाल है जहां ना तो प्रतिक्षालय है और ना पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है अस्त व्यस्त पड़े समानों के साथ साथ वहां पर मनमाने ढंग से वाहन खड़े कर दिया जाता है नगर के मुख्य व्यवसायिक केन्द्र होने के कारण वहां पर अधिक भीड़भाड़ रहता है और जाम लग जाता है जिसके चलते लोगों को आने जाने में परेशानी होती है। बस स्टैंड की बदहाली की कहानी नगर में प्रसिद्ध होने के बाद भी है।नगरीय प्रशासन को पुराना बस स्टैंड के जीर्णोद्धार के साथ साथ नगर के गली-मुहल्ले के सड़कें, नाली, खासकर बस स्टैंड से लेकर शनिदेव मंदिर की सड़क को दूरुस्त कर करने की आवश्यकता है नगर के मुख्य मार्ग पर गायत्री मंदिर चौक और सांई मंदिर चौक, के आसपास बरसात के दिनों में जगह- जगह पानी भरा रहता है इसके अलावा अस्त व्यस्त विद्युत खम्भो को हटाने और चौंक चौराहों के सौंदर्यीकरण व हमर सुघर भटगांव के तर्ज पर बने मिनी गार्डन के रखरखाव के साथ साथ इन सभी बिन्दुओं पर नगरीय प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को आत्म चिंतन करने की आवश्यकता है ताकि नगरीय व्यवस्था को सुधारा जा सके। नगरीय प्रशासन को भविष्य में होने परेशानी को ध्यान में रखकर मास्टर प्लान तैयार करके कोई भी निर्माण कार्य करना चाहिए ताकि नगरीय व्यवस्था देखने में अच्छा लगे। उल्लेखनीय है कि नगर में विकास कार्यों की ठेका प्रत्येक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी को भी दे दिया जाता है और नगरीय प्रशासन द्वारा गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जाता जिसकी गुणवत्ता कुछ दिनों बाद दिखाई देने लग जाता है जिस पर पाबंदी लगाने की सख्त आवश्यकता है। तभी हम भटगांव को नगर का नया स्वरुप दे पायेंगे अन्यथा भटगांव एक”गांव”बनकर ही रह जायेगा। उल्लेखनीय है कि सारंगढ़- बिलाईगढ नया ज़िला बनने के बाद “भटगांव नगर”को कितना महत्व दिया जाता है। वैसे इस क्षेत्र के लोग सारंगढ़ को जिला बनाने के लिए हमेशा पक्ष में रहा है लेकिन अब देखने वाली बात होगी कि भटगांव को महत्व दिया जायेगा या फिर हमेशा की तरह उपहास का सामना करना पड़ेगा।