नेशनल लोक अदालत में 7 हजार 613 प्रकरणों का हुआ निराकरण। – छ.ग.का नंबर 1 न्यूज़ पोर्टल


9 करोड 19 लाख 58 हजार 208 रूपये का अवार्ड किया गया पारित

बिलासपुर।जनसंवाद। तरुण कौशिक

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली एवं छ.ग. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशन एवं संघरत्ना भतपहरी विशेष न्यायाधीश बिलासपुर के मार्गदर्शन में जिला न्यायालय बिलासपुर एवं अंतर्गत समस्त न्यायालयों के साथ-साथ समस्त राजस्व न्यायालों में भी नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया जिसमें राजीनामा योग्य प्रकरणों में पक्षकारों की आपसी सहमति व सुलह से समझौता किया जाकर प्रकरणों को निराकृत किया गया। उक्त लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित कुल 6045 प्रकरण रखे गये थे जिनमे से 3797 प्रकरणों का आपसी सहमति से राजीनामा कर निराकरण किया गया। इसी प्रकार राजस्व न्यायालयों के कुल 3279 प्रकरण राजीनामा हेतु रखे गये थे जिनमे से 3139 प्रकरणों का निराकरण राजस्व न्यायालयों द्वारा किया गया। उक्त लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन के कुल 5172 राजीनामा हेतु रखे गये थे जिनमे से 677 प्रकरणों का निराकरण पक्षकारो के मध्य आपसी सहमति से किया गया। इस प्रकार कुल 18496 प्रकरण लोक अदालत में रखे गये थे जिसमें से 7 हजार 613 प्रकरणों का निराकरण करते हुए 9 करोड़ 19 लाख 58 हजार 208 रूपये राशि का आवार्ड पारित किया गया। उक्त लोक अदालत में कुल 71 खण्डपीठो का गठन किया गया।
उक्त लोक अदालत हाईब्रीड मोड (भौतिक तथा वर्चुअल) से आयोजित की गई।
संबंधों की जीत पर जिला न्यायालय में बॉंटी गयीं मिठाइयॉं –
स्मिता रत्नावत, पंचम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर के न्यायालय में विगत तीन वर्षो से लंबित 149 एकड़ भूमि के संपत्ति के विवादित प्रकरण का निराकरण नेशनल लोक अदालत के माध्यम से कराया गया।
वादीगण दो बहन सहित कुल पॉच भाईयों का हॅसता खेलता परिवार था। संपत्ति के विवाद ने दो बहन व पॉंच भाइयों के रिश्तों में खटास ला दी थी। दोनों बहनों ने पिता की मृत्यु के पश्चात् वर्ष 2019 में पिता की संपत्ति में हक प्राप्ति हेतु व्यवहार वाद दाखिल किया था। ऐसा व्यवहार वाद तीन साल से लंबित था। बेटियों को अपना हक चाहिए था और भाइयों का कहना था कि, पिता के जीवनकाल में बहनों को पिता की संपत्ति में हिस्सा प्राप्त हो चुका है। इसके बावजूद बहनें संपत्ति में बराबरी का हक लेने हेतु तटस्थ थीं।
जैसे ही न्यायालय द्वारा ग्राम-बाजार सिंघनपुरी, तह.-तखतपुर, जिला- बिलासपुर (छ.ग.) स्थित 149 एकड़ कृषि भूमि पर भाई-बहनों के विवाद को तीन वर्षों से लंबित देखा गया, तभी दोनों बहनों व भाइयों के साथ संबंधों को मधुर बनाने हेतु न्यायालय द्वारा प्रयास किया गया। कुल तीन चर्चाओं में दोनों बहनें अपने भाइयों के साथ बचपन के मधुर संबंध को पुनः जागृत करते हुए, अति प्रसन्नता से रिश्तों को बांधने के लिए तैयार हुईं। सभी भाई-बहन अत्यंत ही प्रसन्नता से व्यवहार प्रकरण में 149 एकड़ कृषि भूमि के संबंध में हक-अधिकार राजीनामा से प्राप्त करने हेतु आज राष्ट्रीय लोक अदालत के दिन दोपहर 1बजे न्यायालय में उपस्थित हुए और दोनों बहनों ने भाइयों के साथ सहर्ष राजीनामा करने की बात कही। दो बहन एवं पॉंच भाइयों के मध्य राजीनामा चर्चा सफल होने पर आज राष्ट्रीय लोक अदालत में व्यवहार वाद प्रकरण का अंतिम निराकरण किया गया। न्यायालय द्वारा समस्त भाई-बहनों का पुष्प गुच्छ भेंट कर मधुर संबंधों के पुनर्जीवन हेतु शुभकामनाएं देकर मिठाइयॉं बॉंटी गयीं।
कुटुम्ब न्यायालय में परस्पर सहमति से 79 पारिवारिक मामलों का समाधान –
आज 13 अगस्त को छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश से नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रमाशंकर प्रसाद एवं अति प्रधान न्यायाधीश श्यामलाल नवरत्न की न्यायालय में बिलासपुर शहर एवं दूरस्थ ग्रामीण अंचल से आए पति पत्नी एवं अन्य पक्षकारो के मामले जिसमें दाम्पत्य पुर्नस्थापना, सरंक्षक एवं प्रतिपाल्य अधिनियम, भरण पोषण के कुल 79 प्रकरण पक्षकारो के परस्पर सहमति आधार पर राजीनामा हो जाने पर निराकृत किए गए।
वरिष्ठ नागरिक को त्वरित न्याय –
प्रधान न्यायाधीश रमाशंकर प्रसाद के न्यायालय में 72 वर्षीय परिवर्तित नाम दयानंद मिश्रा मोपका एवं परिवर्तित नाम शीला मिश्रा 70 वर्षीय राजकिशोर नगर ने अपने पुत्र प्रताप मिश्रा उम्र 39 निवासी सरकण्डा के विरूद्ध भरण पोषण का मामला न्यायालय में पेश किया, जिसमें प्रधान न्यायाधीश ने माता पिता की उपेक्षा न करने और उन्हें समुचित न्यायिक मदद देने अनावेदक प्रताप मिश्रा की काउंसिलिंग की और माता पिता के प्रति पुत्र के दायित्व को समझाया, तब पश्चात दोनो पक्षो में सहमति बनी। तदानुसार 5000/-रू प्रतिमाह भरण पोषण पुत्र अपने माता पिता को देगा और उनकी सदैव देखरेख भी करेगा।
किलकारी मॉ का आंचल में मासूम बच्ची से उसके दादा को मिलने की अनुमति आदेश पारित किया गया, जिसमें एक पिता ने अपने पुत्र के आकस्मिक दुर्घटना में निधन होने पर अपनी बहू के द्वारा नातिन को मिलाने से इन्कार के कारण विवाद उत्पन्न हो गया, इसी बीच बहू को पति के मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति मिल गई, आवेदक का एकमात्र पुत्र का निधन हो गया, वह अपनी नातिन को संरक्षण में लेने के लिए एवं मिलने के लिए आतुर था। प्रधान न्यायाधीश के द्वारा किलकारी मॉ का आंचल कक्ष कुटुम्ब न्यायालय बिलासपुर में प्रतिमाह 05 वर्षीय नातिन से मिलने का अधिकार दे दिया तथा संरक्षण में लेने का अधिकार प्राकृतिक माता के पास होने के कारण मिलने का अधिकार पर सहमति होने से प्रकरण निराकृत कर दिया गया। एक अन्य भरण पोषण के मामले में प्रधान न्यायाधीश ने पचपेड़ी थाना निवासी महिला को पामगढ़ निवासी उसके पति के द्वारा भरण पोषण नहीं देने पर समझाईश पश्चात प्रतिमाह 8000/-रू0 परस्पर सहमति से देने का आदेश पारित किया।
टूटते परिवारो को जोड़ा गया- अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश श्यामलाल नवरत्न की अदालत ने 07 वर्ष से पृथक बिल्हा निवासी परिवर्तित नाम नीता कुमारी को उसके पति परिवर्तित नाम महेश रामानुजगंज जो शिक्षा विभाग में कर्मचारी है, पृथक रह रहे थे, उनके 02 बच्चे भी है। आवेदिका ने भरण पोषण एवं अनावेदक ने तलाक का मामला लगाया था, किंतु न्यायालय की समझाईश के पश्चात दोनो पक्ष साथ रहने सहमत हो गए और परिवार जुड़ गया।
इसी तरह टिकरापारा निवासी पति ने सिरगिट्टी निवासी अपनी पत्नी को जो कि 2021 से पृथक थी, साथ में रखने दाम्पत्य पुर्नस्थापना का प्रकरण पेश किया था, जो 03 वर्षो से चल रहा था। आज नेशनल लोक अदालत में दोनो पक्ष साथ रहने सहमत हुए और खुशी खुशी अपने परिवार को बसाने के लिए अपने घर न्यायालय के समझाईश के बाद गए।
इस तरह आज की नेशनल लोक अदालत कुटुम्ब न्यायालय में दाम्पत्य जीवन की पुर्नस्थापना, भरण-पोषण, प्रतिपाल्य संरक्षण अधिनियम सहित, अन्य विवादित मामलों का निराकरण न्यायालय द्वारा किया गया जिसमें कुल 79 प्रकरणों का आपसी रजामंदी से समाधान किया गया। जिसमें न्यायमित्र प्रशांत गनोरकर, न्यायमित्र ए.एस.कुरैशी एवं परामर्शदाता-उषाकिरण बाजपेयी, टी.आर कश्यप एवं अन्य सदस्यगण एवं न्यायामित्रों तथा न्यायालयीन कर्मचारियों का सहयोग सराहनीय रहा।