पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में हिंदी दिवस पर कार्यक्रम संपन्न


रायपुर। शिक्षा केवल किताबों में ही नहीं बल्कि अपनी जिंदगी में इस प्रकार उतराना चाहिए जिससे दूसरों का परोपकार हो सके। शिक्षा का मूल्य उद्देश्य लोकहित है। शिक्षा जीवन की ऐसी शक्ति है जो दूसरों के उन्नति के लिए भी काम आती है। हिंदी दिवस के दिन हम ऐसा संकल्प ले कि देशहित और लोकहित में हम विकार रहित जीवन जी सकें। उक्त विचार कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में कुलपति प्रो. बल्देव भाई शर्मा ने व्यक्त किये।

हिंदी दिवस के विशेष उपलक्ष्य में जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी पत्रकारिता का योगदान विषय पर बोलते हुए प्रोफेसर बल्देव भाई शर्मा ने कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का संकल्प स्वतंत्रता आंदोलन में लिया गया । साहित्य मनीषी श्री जयशंकर प्रसाद की कृति कामायनी के माध्यम से उन्होंने हिंदी के महत्व को रेखांकित किया।

कुलपति प्रो. शर्मा का अभिनंदन करते हुए जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डा. शाहिद अली ने भाषा की आजादी और देश की आजादी पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और पत्रकारों की भूमिका पर अपने विचार रखे। डा. अली ने आर्य समाज की स्थापना और हिंदी के प्रचार में स्वामी दयानंद सरस्वती, श्री केशवचंद सेन के योगदान पर प्रकाश डाला।

जनसंचा विभागाध्यक्ष डा. शाहिद अली ने स्वतंत्रता आंदोलन में अहिंदी भाषीय साहित्यकारों एवं पत्रकारों के योगदान का संस्मरण कराया। इस मौके पर उन्होंमे अहिंदी भाषीय गुरू रबीन्द्रनाथ टैगोर, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक , पं माधव राव सप्रे, पं माखनलाल चतुर्वेदी , महात्मा गांधी आदि के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के प्रारंभ में मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विभाग के शोधार्थी विनोद सावंत, चंद्रेश चौधरी, गायत्री सिंह ने शोध पत्र प्रस्तुत किये। विभाग के विद्यार्थी आलोक कुमार, नागेन्द्र कुमार , यशपाल द्वारा काव्य पाठ का भी वाचन किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन जनसंचार विभाग की शोधार्थी दीक्षा देशपांडे ने किया।

अतं में जनसंचार विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजेन्द्र मोहंती ने आभार प्रर्दशन किया। कार्यक्रम में समाज कार्य विभाग के शिक्षक अभिषेक गोस्वामी, भारती गजपाल , विद्यार्थी व शोधार्थी उपस्थित रहे।