वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैयर का निधन, पत्रकारिता जगत में एक युग का अंत



RAIPUR: छत्तीसगढ़ पत्रकारिता जगत से वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैयर का निधन हो गया। इस खबर से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैयर ने कई समाचार पत्रों में संपादक के रूप में कार्य किया है। आपको बता दें कि रमेश नैयर उन पत्रकारों में से एक थे जिन्होंने देश और प्रदेश में अपनी कलम का लोहा मनवाया। प्लानमेन मीडिया हाउस द्वारा उन्हें ‘रत्न-छत्तीस’ की उपाधि से भी सम्मानित किया गया। ‘देशबंधु’, ‘युगधर्म’, ‘एमपी क्रॉनिकल’, ‘लोक स्वर’, ‘ट्रिब्यून’, ‘संडे ऑब्जर्वर’ और ‘दैनिक भास्कर’ में लंबे समय तक पत्रकारिता। 10 फरवरी 1940 को गुजरात के कुंजा (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्में रमेश नैयर अपनी निडर और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए पूरे देश में एक मिसाल माने जाते थे।

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हंसा अकेला ही दूर किसी अनंत में उड़ गया है, केवल उनकी निर्मल और मोहक छवि तथा उनकी कलम से निकले हजारों लाखों शब्द ही आज हमारे बीच उपस्थित हैं।

रमेश नैयर हिंदी और अंग्रेजी पत्रकारिता में एक ऐसे हंसा की तरह थे जो अपने स्वविवेक से नीर और क्षीर में अंतर करना जानते थे और हमेशा क्षीर का चुनाव करना ही उन्हें पसंद था। उनकी भाषा असहज नहीं सहज थी, पर विचारों की लौ में हमेशा जगर-मगर। कहीं कोई भाषा में पैबंद नहीं, लाख ढूंढने पर भी भाषा में कहीं कोई लिथड़ापन नहीं, जो है अगर-मगर में नहीं, सीधे-सीधे है।

‘देशबंधु’ से अपनी हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले रमेश नैयर बाद में ‘नवभारत’, ‘क्रॉनिकल’, ’ट्रिब्यून’, ‘संडे ऑब्जर्वर’, ’दैनिक भास्कर’ में हिंदी और अंग्रेजी पत्रकारिता को एक साथ साधते रहे। छत्तीसगढ़ में ही नहीं चंडीगढ़ और देश की राजधानी दिल्ली में भी अपनी हिंदी पत्रकारिता का परचम शान से लहराते रहे। निराभिमान इस पत्रकार की लेखनी पर ऐसा कौन है, जो कुर्बान न हो जाए।

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‘ट्रिब्यून’ और चंडीगढ़ उनकी आत्मा में बसे हुए थे। ‘ट्रिब्यून’ में प्रेम भाटिया का सत्संग और चंडीगढ़ की पंजाबी तहजीब रमेश नैयर को भा गए थे। अर्जुन सिंह उन दिनों चंडीगढ़ में ही राज्यपाल थे और सुदीप बनर्जी उनके सचिव। रमेश नैयर जैसे विचारवान पत्रकार की जरूरत उन्हें भी कम नहीं थी और ऊपर से वे उनकी प्रतिभा के भी कम कायल नहीं थे, सो भाभी को भी प्रतिनियुक्ति पर मध्यप्रदेश से सीधे चंडीगढ़ बुलवा लिया गया। राजीव गांधी और संत लोंगोवाल के ऐतिहासिक समझौते में रमेश नैयर और प्रेम भाटिया के अथक प्रयासों को भी जरूर याद किया जाना चाहिए।

छत्तीसगढ़ में वे छत्तीसगढ़ राज्य हिंदी ग्रंथ अकादमी के संस्थापक संचालक थे । जनवरी सन 2006 से अक्टूबर 2016 तक वे इस पद को सुशोभित करते रहे।

रमेश नैयर के पत्रकार स्वरूप से हम सब भली-भांति परिचित है पर उनकी शख्सियत का एक और पहलू है जिससे हम कुछ गाफिल हैं।

छत्तीसगढ़ के कथाकारों की कहानियों को लेकर उन्होंने दो जिल्दों में ‘कथा यात्रा’ और ‘उत्तर कथा’ नामक ग्रंथों का संपादन किया है, जो प्रभात प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित है। छत्तीसगढ़ के प्रारंभिक कथाकारों से लेकर अब तक के कथाकारों की चुनी हुई कहानियों का सुंदर संपादन रमेश नैयर ने किया है।

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इसी तरह अनेक विदेशी कविताओं का उन्होंने हिंदी तर्जुमा किया है जो पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित है। मैं उन्हें उन कविताओं को जब- तब ढूंढकर एक संग्रह के रूप में प्रकाशित करवाने की निरर्थक ज़िद में उसी तरह लगा रहता था जिस तरह पाकिस्तान की उनकी स्मृतियों को लेकर उनसे एक मुकम्मल किताब लिखवाने की अपनी पुरानी ज़िद में।

वे मुझसे वादा करते थे कि अगले पंद्रह दिनों में वे मुझे इस किताब का एक चैप्टर लिख कर जरूर दिखाएंगे। कई बार भाभी भी इस बात की गवाह बनी पर होनी को तो कुछ और ही मंजूर था।

रमेश नैयर अविभाजित भारत के गुजरात जिले के अपने पैतृक गांव कुंजह को कभी भूला नहीं पाए, जहां उनका जन्म हुआ था ।

इसी तरह जिस मां ने उन्हें दूध पिलाया, पाला-पोसा उस मुस्लिम मां जैनब को भी, जो बचपन में उन्हें बुल्ला कहकर पुकारा करती थी। बुल्ला याने पाकिस्तान के संत और फकीर कवि बुल्ले शाह। उन्हें भी वे अपने अंतिम दिनों तक याद करते रहे।

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बुल्ले शाह का प्रतिरूप यह हंसा अब अकेले ही अपने डैने पसार कर सुदूर अंतरिक्ष की ओर अपनी उड़ान भर चुका है। हम सबको शोक व्हिहल छोड़कर।

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, “रमेश नैयर…शानदार पत्रकार….नहीं रहे खबर की नब्ज पकड़ने में माहिर… संडे आब्जर्वर का साथ…बेख़ौफ़ लेखन”

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेलने शोक जताते हुए लिखा कि,”छत्तीसगढ़ के गौरव व देश के प्रतिष्ठित पत्रकार, स्वर्गीय रमेश नैयर जी का निधन दुखद है।

पत्रकारिता के क्षेत्र में यह अपूरणीय क्षति है।

मुझे उनसे लगातार मार्ग निर्देशन मिलता रहा।

ईश्वर उनकी आत्मा को शांति एवं परिवारजनों को संबल दें।

ॐ शांति:”

बीजेपी नेता बृजमोहन अग्रवल ने लिखा कि,”वरिष्ठ पत्रकार #रमेश_नैयर जी का निधन #पत्रकारिता जगत के लिए एक युग का अंत है। हमेशा पत्रकारिता में व्यवसायिकता के विरोधी रहे नैयर जी अपने कार्यों और व्यक्तित्व से नई पीढ़ी के पत्रकारों को प्रेरणा देते रहे, आगे भी उनका जीवन समाज को प्रेरित करता रहेगा।”

कैबिनेट मंत्री सिंह देव ने लिखा कि,”प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार श्री रमेश नैयर जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उनका देहांत छत्तीसगढ़ के पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं शोकसंतप्त परिवार व प्रियजनों को धैर्य प्रदान करें।

ॐ शांति।”

ट्विटर पर निधन को लेकर शोक की लहर छाई हुई है. हर कोई अपनी भावनाएं जाहिर कर रहा है।