विधायक अरुण वोरा का पुतला दहन के दौरान छीना-झपटी कई भाजपाई झुलसे, कॉन्स्टेबल की बर्खास्तगी की मांग





दुर्ग नगर निगम में एक तरफ कर्मचारी वेतन न मिलने से धरने पर बैठे हैं, वहीं दुर्ग विधायक अरुण वोरा निगम मद से अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इसके विरोध में भाजपा नेताओं ने विधायक अरुण वोरा का पुतला दहन किया। पुतला दहन करने के दौरान पुलिस से उनकी छीना-झपटी हुई। इसमें भाजपा के कुछ कार्यकर्ता और पदाधिकारी झुलस गए। इससे आक्रोशित होकर भाजपाइयों ने चक्काजाम कर दिया। उन्होंने सिपाही हरीश साहू पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाते हुए उसकी बर्खास्तगी की मांग की है।

दुर्ग नगर निगम के मुख्य कार्यालय में विधायक अरुण वोरा का धूम-धाम से जन्मदिन मनाना बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। इसको लेकर विपक्ष में आक्रोश व्याप्त है। आरोप है कि वेतन के लिए तरस रहे दुर्ग निगम कर्मियों की पीड़ा को दरकिनार कर शासकीय कार्यालय में सरकारी खर्च पर कांग्रेस विधायक अरुण वोरा का जन्मदिन मनाया गया। इसके विरोध में उन्होंने विधायक अरुण वोरा का पुतला दहन किया।

विरोध प्रदर्शन के दौरान दुर्ग पुलिस ने जलते पुतले को छीनने की कोशिश की। इस छीना-झपटी में जलते पुतले की चपेट में आने से जिला भाजयुमो अध्यक्ष नितेश साहू व पार्षद अजीत वैद्य सहित कई कार्यकर्ता झुलस गए। इससे भाजपाई काफी आक्रोशित हैं। इसके विरोध में उन्होंने भाजपा जिलाध्यक्ष जितेंद्र वर्मा के नेतृत्व में चक्काजाम कर दिया। यह जाम करीब दो से तीन घंटे तक चलता रहा। इस दौरान उन्होंने निगम प्रशासन, पुलिस प्रशासन और विधायक के खिलाफ नारेबाजी की।

भाजपा नेताओं ने दुर्ग पुलिस के सिपाही हरीश साहू की बर्खास्तगी की मांग को लेकर चक्काजाम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक वोरा के इशारे पर सिपाही साहू ने जान बूझकर उनके ऊपर जानलेवा हमला करने की नीयत से जलता पुतला छीना। इसमें कई लोग झुलस गए।

भाजपा नेताओं ने दोषी पुलिसकर्मी को बर्खास्त करने की मांग की है। घटना के विरोध में भाजपाइयों के चक्काजाम करने की सूचना मिलने के बाद एसडीएम जागेश्वर साहू मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारी ने सिपाही की बर्खास्तगी का आश्वासन दिया। इसके बाद भाजपाइयों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर चक्काजाम खोला।

भाजपा नेताओं ने कहा कि एक तरफ निगम के पास वेतन देने तक के लिए मद नहीं है। वहीं दूसरी तरफ विधायक का जन्मदिन निगम के खर्चे पर धूमधाम से कार्यालय में मनाया जा रहा है। यह नियम के खिलाफ है। इसकी जांच कर पूरा खर्चा विधायक से वसूला जाना चाहिए।

 



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