लघु वनोपजों के परिवहन के लिए अब पास जरूरी नहीं, हाथियों को रोकने 10 की टीम , June 18, 2020 at 06:09AM

सीएम भूपेश बघेल ने बुधवार को वन विभाग की बैठक में तेंदूपत्ता, साल बीज, हर्रा आदि राष्ट्रीयकृत वनाेपजों को छोड़कर बाकी के लिए परिवहन अनुज्ञा की अिनवार्यता खत्म करने का निर्णय लिया है। इससे व्यापारियों को विक्रय हेतु एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने में सुविधा होगी। इस अवसर पर वन मंत्री मोहम्मद अकबर, गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
सीएम बघेल ने बैठक में राज्य में हाथियों सहित अन्य वन्य प्राणियों के संरक्षण पर भी विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। राज्य में विगत 10 वर्षाें के दौरान हाथियों सहित अन्य वन्य प्राणियों की संख्या में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। हाथियों की संख्या 225 से बढ़कर आज 290 तक हो गई है। इसके अलावा वन तथा राजस्व क्षेत्रों में विशेषकर हाथी प्रभावित क्षेत्रों में वन्यप्राणियों के बचाव के लिए खुली विद्युत तारों को ऊर्जा और वन विभाग के द्वारा केबल लगाने के संबंध में भी विचार किया गया। सीएम बघेल ने वन्य प्राणियों तथा हाथियों के दल की सतत निगरानी के लिए सभी प्रभावित वन मण्डलों में 10-10 लोगों को चयन कर टीम बनाने के भी निर्देश दिए हैं। जंगल सफारी और बिलासपुर के कानन पेंडारी के हॉस्पिटल को अत्याधुनिक बनाने के निर्देश दिए। पशु चिकित्सा विभाग से पशु चिकित्सक प्रतिनियुक्ति पर लिए जाएंगे। महासमुंद मॉडल को धरमजयगढ़ और सूरजपुर में भी लागू किया जाएगा।

बैठक में उन्हें वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से राशि भुगतान करने का निर्णय लिया गया। राज्य में वर्तमान में महासमुंद वन मण्डल के अंतर्गत मानव-हाथी द्वंद में नियंत्रण के लिए संचालित मोबाइल बेस्ड एलर्ट सिस्टम की सराहना करते हुए इसे धरमजयगढ़ और सूरजपुर वन मण्डल के 10-10 गांवों में लागू करने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने बैठक में वन्य प्राणियों के त्वरित उपचार दिलाने के मद्देनजर राजधानी रायपुर के जंगल सफारी स्थित पशु चिकित्सालय और बिलासपुर के कानन पेंडारी स्थित पशु चिकित्सालय को अत्याधुनिक और सर्व सुविधा युक्त अस्पताल के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। इस दौरान चर्चा करते हुए वन मंत्री अकबर ने बताया कि वन विभाग में वर्तमान में कार्यरत पशु चिकित्सक संविदा नियुक्ति पर है, वन्य प्राणियों के उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक बनने के पहले ही कई चिकित्सक अन्य सेवाओं में चले जाते हैं। जिसके कारण वन्यप्राणियों के उपचार में कई बार कठिनाईयां आती है। मुख्यमंत्री ने वन मंत्री अकबर के अनुरोध पर पशु चिकित्सा विभाग में कार्यरत चिकित्सकों को वन विभाग में प्रतिनियुक्ति पर लेने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी 20 वन मण्डलों में जहां वन्य प्राणियों की संख्या ज्यादा है, वहां इन चिकित्सकों को प्राथमिकता से तैनात करने कहा। बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिगुआ, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी अतुल शुक्ला, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पाण्डेय, कैम्पा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी व्ही. श्रीनिवास राव, मुख्यमंत्री सचिवालय में उप सचिव सौम्या चौरसिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

केंद्र से बड़ी मदद, पंचायतोंके लिए 363.50 करोड़ जारी
केंद्र सरकार ने बुधवार को अपने फंड से मूलभूत कार्यों के लिए राज्य सरकार को एक बड़ी रकम जारी किया है। हालांकि यह 2020-21 के लिए मूलभूत राशि की यह पहली किश्त जारी की गई है। पंद्रहवें वित्त आयोग की अनुशंसा पर केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतीराज संस्थाओं के लिए 363 करोड़ 50 लाख रुपए दिए गए हैं। इससे प्रदेश के पंचायतों में सड़क नाली बिजली, सफाई जैसे कार्य कराए जा सकेंगे।

बीटगार्ड से पीसीसीएफ कीनिगरानी मोबाइल एप से
वन विभाग के सबसे निचले पद बीट गार्ड से पीसीसीएफ की निगरानी अब मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए की जाएगी। मैदानी अमले पर नियंत्रण और फील्ड में उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह एप डेवलप किया जाएगा। इस एप की मदद से जंगल में आग, हाथियों के आंतक से लेकर शिकार की घटनाओं व शिकायतों पर भी निगरानी की जाएगी। सीएम ने जल्द ही यह एप डेवलप करने के निर्देश दिए हैं।



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बैठक के दौरान सीएम भूपेश बघेल, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, एसीएस सुब्रत साहू, पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी, अतुल शुक्ला, प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ, सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, डिप्टी सेक्रेटरी सौम्या चौरसिया मौजूद थीं।


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