बिलासपुर में छह दिन के नवजात की किडनी फेल तो 15 दिन तक डायलसिस किया; शिवपुरी में 4 साल के मासूम की आंसू नली टूटने से दिखना हुआ बंद, ऑपरेशन से लौटी रोशनी , June 22, 2020 at 09:02AM

मध्यप्रदेश के शिवपुरी और छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में दो मासूम बच्चों के लिए डॉक्टर भगवान बनकर सामने आए। बिलासपुर मेंछह दिन के मासूम की दोनों किडनी फेल हो गई थीं। इनके माता पिता मासूम के जिंदा रहने की उम्मीद खो चुके थे, लेकिन डॉक्टर सुशील कुमार ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार 15 दिन तक डायलसिस कर नवजात को नया जीवन दे दिया। वहीं, मध्यप्रदेश के शिवपुरी में 4 साल के मासूम की आंख में साइकिल का ब्रेक घुसनेसे उसकी आंख की रोशनी चली गई थी। जैसे ही मामला डॉक्टरगिरीश चतुर्वेदी के पास पहुंचा तो उन्होंने तुरंत ऑपरेशन कर मासूम की रोशनी छीनने से बचा लिया।

छत्तीसगढ़:जन्म के बाद बच्चे के ब्लड में इन्फेक्शन के कारण उसकी दोनों किडनी हो गई थी फेल

बिलासपुरके अपोलो हॉस्पिटल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुशील कुमार ने उस बच्चे की जान बचाई है जिसके जीने की उम्मीद उसके मां-पिता छोड़ चुके थे। डिलीवरी के बाद बच्चे के ब्लड में इन्फेक्शन के कारण उसकी दोनों किडनी फेल हो चुकी थी। शरीर में कुछ और दूसरी तरह की परेशानियां शुरू हो गई थीं।इन्होंने 6 दिन के बच्चे की 15 दिनों तक डायलिसिस करवायाऔर उसकी जिंदगी को बचा लिया। डॉ. सुशील कुमार ने बताया29 मई को बच्चे को कोरिया स्थित पीएचसी से रेफर किया गया था।

चिरमिरी के रहने वाले दंपती नेहा गुप्ता और मनीष गुप्ता ने अपने बच्चे की स्थिति डॉक्टर को बताई कि मासूम पैदा होने के बाद से काफी सुस्त रहता था और झटके आते थे। आम बच्चों की तरह मूवमेंट नहीं करता था। दूध पीने से लेकर रोने और दूसरी तरह की गतिविधियों में वह शांत रहता था।

डॉक्टर ने बच्चे का चेकअप किया। अलग-अलग तरह की जांच के बाद पता चला कि बच्चे के ब्लड में इंफेक्शन है। उसकी दोनों किडनी अभी फेल हो चुकी हैं। उन्होंने मामले को चुनौती मानकर बच्चे की जांच और इलाज किया। बच्चे की पेरीटोनियल डायलिसिस की गई। और कुछ दिन पहले ही उसने आम बच्चों की तरह रोना, हंसना और दूध पीने के अलावा अन्य तरह की गतिविधियां भी शुरू कर दी।

माता-पिता ने प्रबंधन का जताया आभार, डॉक्टर को बताया फरिश्ता

छह दिन के बच्चे का जिस तरीके से माता-पिता के सामने प्रकरण आया, वे मान चुके थे कि कुछ भी हो सकता है। उन्हें उनके परिजनों ने अपोलो के डॉक्टर सुशील कुमार से मिलने की सलाह दी। बताया कि वे बच्चों के अच्छे डॉक्टर हैं। तब उन्होंने डॉक्टर से मुलाकात कर हालात बताए। डॉक्टर से मिलने के लगभग 25 दिन के बाद उन्हें उनका बच्चा हंसता, मुस्कुराता मिला है। उन्होंने डॉक्टर और प्रबंधन दोनों का ही आभार जताया है।

मध्यप्रदेश: शिवपुरी में डॉक्टरों ने बच्चे को टॉफी खिलाकर और कहानियां सुनाकरकिया ऑपरेशन, लौटाई आंखों की रोशनी

चार साल का संगम जिसका ऑपरेशन हुआ।

जिले के पिछाेर विकासखंड के पिपरा गांव के रहने वालेहरनाम के चार साल के बेटे संगम की शनिवार को आंख में साइकिल का ब्रेक घुसने से गंभीर चोट आई थी। इससे उसकी आंख की न केवल पलक फट गई बल्कि आंसू की नली भी टूट गई। उसे दिखाई देना बंद हो गया। संगम के माता पिता उसेमेडिकल कॉलेज लेकर गए। जहां नेत्र सर्जन डॉ गिरीश चतुर्वेदी ने बताया किउसकी आंख की निचली पलक अलग होने के साथ उसकी आंसू की नली भी टूटी है। डॉक्टर चतुर्वेदीके मुताबिक,उम्र कम होने पर पहलेबच्चे को लोकल एनस्थीशिया दिया गया । कहानी सुनाई। टॉफी खिलाई तब जाकर ऑपरेशन मेंसफलता मिली। शिवपुरी मेडिकल काॅलेज में यह अपने तरह का अब तक सबसे कठिन ऑपरेशन था। इस तरह के ऑपरेशन अब तक ग्वालियर और दिल्ली के अस्पतालों में ही संभव थे।



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दंपत्ति ने बताया कि मासूम आम बच्चों की तरह वह मूवमेंट नहीं करता था, दूध पीने से लेकर रोने और दूसरी तरह की गतिविधियों में वह शांत रहता था।


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