200 साल में पहली बार मठ मंदिर से नहीं निकलेगी रथ यात्रा , June 22, 2020 at 05:27AM

मठ मंदिर के अब तक के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब भगवान जगन्नाथ स्वामी की यात्रा रथ में नहीं निकलेगी। वर्ष 2003 में जब नगर के महानदी में बाढ़ आया था तब भी भगवान के रथ का चक्र नहीं थमा था। उस समय भी नगर की गलियों में पानी भरा होने के बाद भी रथयात्रा निकाली गई थी, लेकिन कोरोना महामारी ने मठ मंदिर के इतिहास को ही बदल दिया है। पुरी की रथयात्रा पर तो सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है, लेकिन नगर की रथयात्रा के दिन रथ नहीं निकालने का निर्णय मंदिर प्रबंधन ने लिया है। वैसे तो भगवान को जब वे बीमार पड़ जाते हैं तो प्रति वर्ष होम आइसोलेशन में ही रखा जाता है, स्वस्थ होने पर भ्रमण करते हैं, लेकिन इस बार स्वस्थ्य होने के बाद भगवान को केवल मंदिर परिसर मेंं ही घुमाया जाएगा।
भगवान के स्वस्थ होने के नयनोत्सव के दूसरे दिन रथयात्रा निकाली जाती है। भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा भगवान शिवरीनारायण मठ मंदिर परिसर से निकलकर मध्य नगरी चौक, हनुमान मंदिर, मेला ग्राउंड होते हुए जनकपुर जाकर पूरी होती है। इस यात्रा में नगर सहित क्षेत्र के हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस वर्ष पहली बार ऐसा होगा की रथ यात्रा नहीं निकाली जा सकेगी।

रोज पिलाया जा रहा भगवान को काढ़ा- त्यागी जी महाराज ने बताया पूर्णिमा को महास्नान के बाद भगवान बीमार पड़ गए थे। जिसके बाद उन्हें मंदिर से ले जाकर एकांतवास में रखा गया है। सुबह शाम पूजा अर्चना कर उन्हें काढ़े का भोग लगाकर भक्तों में प्रसाद बांटा जा रहा है। मान्यता है जो इस काढ़े का सेवन करता है वह साल भर बीमार नही पड़ता। भगवान के सेहत में पहले से काफी ज्यादा सुधार हो गया है।
ऐसी तैयारी... रथ पर बिठाकर भगवान को मंदिर परिसर में ही घुमाया जाएगा

मठ मंदिर के मुख्तियार सुखराम दास महाराज ने बताया इस वर्ष रथयात्रा सांकेतिक होगी। मठ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ व सुभद्रा को निकाला जाएगा व प्रतीकात्मक रूप से रथ में बिठाकर भगवान को मंदिर परिसर में ही घुमाया जाएगा। जिसके बाद भगवान को मठ मंदिर के ही एक अलग मंदिर में रखा जाएगा। जहां सुबह शाम भगवान की पूजा अर्चना की जाएगी। दशमी को भगवान अपने मूल स्थान जगन्नाथ मंदिर में लौटेंगे।
विशेष आकर्षण: आज मनाया जाएगा मंदिर में नेत्रोत्सव
काढ़ा पिलाए जाने के बाद भगवान के स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद सोमवार को भगवान अपना नेत्र खोलेंगे तब नेत्रोत्सव मनाया जाएगा। आंखों में विशेष प्रकार का अंजन लगाया जाएगा। इससे उनकी आंखों की रोशनी निखरेगी। भगवान का विशेष आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा।

नियमों का पालन देशहित में जरूरी
कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए इस वर्ष रथयात्रा नहीं निकाली जा सकेगी। वैसे भी जिले में अभी धारा 144 लगी हुई है तथा 30 जून तक लॉकडाउन भी है, ऐसी स्थिति में भी नियमों का पालन देशहित में करना जरूरी है। वैसे भी सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक पुरी के रथयात्रा पर रोक लगा दी है। भगवान शिवरीनारायण मठ मंदिर के 200 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब रथ यात्रा नहीं निकाली जाएगी।''
राजेश्री महंत रामसुंदर दास, सर्वराकार, शिवरीनारायण मठ मंदिर



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For the first time in 200 years, Rath Yatra will not depart from the Math temple


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