रथयात्रा की 500 साल पुरानी परंपरा टूटी, आज भक्तों को दर्शन नहीं देंगे प्रभु , June 23, 2020 at 06:13AM

15 दिन आइसोलेशन में रहने के बाद रविवार को जगन्नाथ महाप्रभु ने आंखें खोली। ज्यादा नहाने की वजह से उनकी तबियत बिगड़ी थी जिसके बाद वे अपने भाई बलदाऊ और बहन सुभद्रा के साथ 15 दिन से आइसोलेशन में थे। सोमवार को उन्होंने अपनी आंखें खोली।
इस मौके पर मंदिरों में नयन उत्सव मनाया गया। भगवान अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं, लेकिन हर साल की तरह इस बार वे भक्तों को दर्शन देने के लिए रथ पर सवार होकर शहर भ्रमण करने नहीं निकलेंगे। इसी के साथ शहर में 500 साल से निकल जा रही रथयात्रा की परंपरा भी टूट जाएगी। दरअसल, अनलॉक 1 में धार्मिक केंद्रों को खोलने की अनुमति तो दी गई, लेकिन काेरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए बड़े कार्यक्रमों पर अब भी पाबंदी है। इसी वजह से रायपुर समेत पूरे प्रदेश में कहीं भी रथयात्रा नहीं निकाली जा रही है। दूधाधारी मठ के महंत डॉ. रामसुंदर दास बताते हैं कि 600 साल पहले टूरी हटरी स्थित जगन्नाथ मंदिर से शहर की पहली रथयात्रा निकाली गई थी। तब से हर साल यहां से रथयात्रा निकल रही है, लेकिन कोरोना ने सदियों पुरानी इस परंपरा को भी तोड़ दिया है। इससे पहले दूधाधारी मठ की भी 500 साल पुरानी परंपरा टूटी थी जब रामनवमी पर भगवान श्रीराम का स्वर्ण शृंगार नहीं किया गया था। टूरी हटरी - बिना भ्रमण किए सीधे जाएंगे मौसी के घर
टूरी हटरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को भगवान का नयन उत्सव मनाया गया। रामछबिदास ने बताया कि मंगलवार को भगवान को रथ पर विराजित होंगे, लेकिन भ्रमण पर नहीं निकलेंगे। यहां से सीधे उन्हें जनकपुर ले जाया जाएगा जो उनकी मौसी का घर है। मान्यता है कि तबियत ठीक होने के बाद जगन्नाथ महाप्रभु 10 दिन अपनी मौसी के घर रहकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। बुधवार से मंदिर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ भक्तों के दर्शन के लिए खुल जाएगा।

गायत्री नगर - मंदिर में आज कोई विशेष पूजा नहीं भक्तों को दर्शन की अनुमति भी 1 जुलाई के बाद
गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर से भी पिछले 18 सालों से रथयात्रा निकाली जा रही है। हर साल राज्यपाल, मुख्यमंत्री और बड़े जनप्रतिनिधि यहां प्रथम सेवक के रूप में भगवान के लिए सोने के झाड़ू से छेरा पहरा की रस्म निभाते थे। मंदिर समिति के अध्यक्ष पुरंदर मिश्रा ने बताया कि इस बार रथयात्रा निकालने की तैयारी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। रथ भी तैयार करवा लिया गया था जिसे बाद में खोलकर अलग कर दिया गया है। मंगलवार को आम दिनों की तरह मंदिर में भगवान की पूजा की जाएगी। कोई विशेष कार्यक्रम नहीं होगा। मंदिर में अभी दर्शन की अनुमति भी नहीं है। भक्तों के लिए मंदिर 1 जुलाई से खोला जाएगा।

सीएम, राज्यपाल और स्पीकर नेमहाप्रभु से मांगी सबकी खुशहाली
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राज्यपाल अनुसुईया उइके और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेशवासियों को रथयात्रा की शुभकामनाएं दी और सबकी सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। सीएम बघेल ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा सौहार्द, भाई-चारे और एकता का प्रतीक है। पूरे देश में हर साल भक्ति-भाव और उत्साह से रथयात्रा निकलती है जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं। हमारे पड़ोसी राज्य ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ का धाम है। पड़ोसी राज्य होने के कारण प्राचीन काल से ही छत्तीसगढ़वासियों की भगवान जगन्नाथ में गहरी आस्था रही है। मुख्यमंत्री ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए लोगों से अपील की है कि भीड़ लगाने से बचें। सोशल डिस्टेंसिंग और संक्रमण से बचाव के लिए जारी नियमों का पालन करें।



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500 years old tradition of rath yatra broken


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