शहर की 83 लाख 50 हजार वर्गफीट सरकारी जमीन खरीदने के लिए 265 लोगों के आवेदन , June 11, 2020 at 05:33AM

निश्चय कुमार | नोटबंदी, जीएसटी के बाद कोरोना की वजह से हुए लॉकडाउन की वजह से राज्य शासन ने राजधानी में खाली बड़ी तथा कब्जे वाली सरकारी जमीन को आम लोगों को बेचने का फैसला किया है, ताकि इसकी आय से शहर का विकास किया जा सके।
राज्य शासन के सर्कुलर के अनुसार सरकारी जमीन को बेचने के लिए दो तरह के फार्मूला तैयार किया गया है। पहला, ऐसी सरकारी जमीन जिस पर पहले से ही अतिक्रमण है। ऐसी जमीन को सरकार कई सालों से खाली नहीं करा पाई है। दूसरी, खाली पड़ी घास जमीन। लेकिन इसमें चारगान की जमीन को शामिल नहीं किया गया है। ये दोनों ही प्रकार की जमीन अर्बन एरिया में ही होनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र की सरकारी जमीन को इस योजना से बाहर रखा गया है। 7500 वर्गफीट से कम जमीन के आबंटन का अधिकार कलेक्टर को दिया गया है। इससे उपर की जमीन का आबंटन राज्य शासन स्तर पर किया जाएगा। 7500 वर्गफीट तक की जमीन का रेट वर्गफीट की दर से और इससे उपर की जमीन का रेट हेक्टेयर की दर से लिया जा रहा है। लाकडाउन के दौरान अधिक आवेदन आने की मुख्य वजह यह भी है कि सरकार ने कलेक्टर गाइड लाइन की दर में 30 प्रतिशत तक की कमी कर दी। अब अगर कोई व्यक्ति सरकारी जमीन खरीदता है तो पूर्व की अपेक्षा उसे 30 प्रतिशत का फायदा हो रहा है। हालांकि अतिक्रमण जमीन पर कलेक्टर गाइड लाइन की दर से 152 प्रतिशत अधिक कीमत देनी होगी। जबकि खाली जमीन पर 102 प्रतिशत अधिक कीमत देनी होगी।

खाली जमीन का गाइडलाइन से 102% तथा अतिक्रमित जमीन का 152 % ज्यादा रेट

  • अभी 12 लाख 51 हजार वर्गफीट जमीन ऐसी है जिस पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। ये लोग खुद अपनी कब्जे वाली जमीन को रजिस्टर्ड कराना चाहते हैं। कब्जे वाली जमीन के लिए 175 लोगों ने आवेदन किया है।
  • 69 लाख 77 हजार 336 वर्गफीट सरकारी जमीन खाली पड़ी है। ऐसी खाली जमीन के लिए 90 लोगों ने आवेदन दिया है।
  • अर्बन एरिया की जमीन की कीमत कलेक्टर गाइड लाइन के हिसाब से तय है। नगरीय सीमा के भीतर जिस क्षेत्र की सरकारी जमीन या कब्जे वाली जमीन का जो कलेक्टर गाइड लाइन रेट निर्धारित है, उस पर कब्जे वाली जमीन पर 152 प्रतिशत और खाली जमीन पर 102 प्रतिशत उपर रेट तय किया गया है।
  • अभी एक भी सरकारी या कब्जे वाली जमीन का अलाटमेंट नहीं किया गया है। 7500 वर्गफीट के नीचे की जमीन का अलाटमेंट कलेक्टर को व उसके उपर का राज्य शासन को करना है। 3 जून तक आवेदन देने की अंतिम तारीख तय की गई थी। इसे बढ़ाकर 30 जून तक कर दिया गया है। इसके बाद अलाटमेंट की प्रक्रिया शुरु होगी।

69 लाख 77 हजार 336 वर्गफीट खाली
रायपुर में बड़े रकबे की बहुत सारी सरकारी जमीन खाली पड़ी है। 7500 वर्गफीट से उपर की जमीन की खरीदी हेक्टेयर दर पर होनी है। यही वजह है कि राजधानी के बड़े कालोनाइजर व बिल्डरों ने बड़े सरकारी रकबे को चिह्नांकित करके लगभग 69 लाख 77 हजार 336 वर्गफीट जमीन को खरीदने के लिए आवेदन लगा दिया है। हालांकि ये सारी जमीन राज्य शासन से अलाट होगी। इसमें दो तरह का फायदा है।
पहला, अभी सरकारी कलेक्टर गाइड लाइन की दर 30 प्रतिशत कम है। दूसरा हेक्टेयर की दर वर्गफीट की दर से काफी कम होती है। चूंकि बड़े रकबे को हेक्टेयर की दर में खरीदकर बड़ी आसानी से वर्गफीट की दर में बेचा जा सकता है। सरकार ने ऐसी खाली जमीन को बेचने की दर भी अतिक्रमण की गई जमीन से कम रखा है। खाली सरकारी जमीन कलेक्टर गाइड लाइन की दर से 102 प्रतिशत अधिक कीमत पर बेची जाएगी।
सबसे अधिक आवेदन यहां
अमलीडीह, रायपुरा, बीरगांव, खमतराई, कचना, आमासिवनी, लाभांडी, भाटागांव, गुढ़ियारी, कोटा, मंडी के पास की सरकारी जमीन के क्षेत्र के आसपास सबसे अधिक लोगों ने आवेदन दिए हैं।
175 लोगों ने 12 लाख 51 हजार वर्गफीट अतिक्रमित जमीन के लिए दिया आवेदन
रायपुर तहसील दफ्तर में 175 लोगों ने ऐसी सरकारी जमीन को खरीदने के लिए आवेदन दिया है, जिस पर इन लोगाें का बरसों से कब्जा है। इसमें ऐसे लोग शामिल है, जिन्होंने अपनी खुद की रजिस्टर्ड जमीन के साथ लगी हुई सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है। रायपुर शहर में ऐसे कई संभ्रात व रसूखदार लोग हैं, लेकिन सरकार सारी कवायद करने के बाद भी इन लोगों से सरकारी जमीन खाली नहीं करा पाई है। 175 लोगों ने जिन सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है, वह 12 लाख 51 हजार 53 वर्गफीट के करीब है। इस जमीन को कलेक्टर गाइड लाइन की दर से 152 प्रतिशत अधिक कीमत देकर बेचा जा रहा है। हालांकि अभी तक एक भी जमीन का अलाटमेंट नहीं हुआ है।

"शासन ने लाकडाउन से पहले सरकारी जमीन बेचने का सर्कुलर जारी किया था। अगर एक प्लाट के लिए कई आवेदन होंगे, तब उसकी नीलामी भी होगी। 7500 वर्गफीट तक जमीन का आवंटन कलेक्टर करेंगे, ज्यादा के आवेदन शासन को जाएंगे।
-आरपी मंडल, मुख्य सचिव
"रिक्त भूमि और अतिक्रमित भूमि के लिए आवेदन आए हैं। खाली जमीन के 90 और अतिक्रमित जमीन के 175 आवेदन आए हैं। रायपुर में लगभग 82 लाख वर्गफीट से अधिक की सरकारी जमीन को खरीदने में लोगों ने रुचि दिखाई है।"
-अमित बेक, तहसीलदार रायपुर



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