बालौद के डॉक्टर ने कोरोना वायरस के इलाज पर किया शोध, अब जापान में होने वाली इंटरेनशनल काॅन्फ्रेंस में प्रकाशित किया जाएगा , June 12, 2020 at 08:34AM

शहर के होम्योपैथी फिजीशियन डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने कोरोना वायरस के इलाज पर रिसर्च की है। इसका अध्ययन करने के बाद लंदन की इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ओएमआईसीएस ने इसे सक्षम माना है। इस रिसर्च आर्टिकल को 7 अगस्त को ओसाका जापान में होने वाले इंटरेनशनल काॅन्फ्रेंस में दुनिया के प्रसिद्ध शोधकर्ताओं के शोध के साथ प्रकाशित किया जाएगा।

डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि एक अमेरिकन सोसायटी के शोध पत्र के अनुसार लहसुन में दो प्रकार के रसायन पाए जाते हैं। जिनका नाम एलील डाई सल्फाइड और एलिन ट्राइसल्फाइड है, जो कोरोना वायरस को मनुष्य की कोशिकाओं से जोड़ने से रोकता है। एक अन्य रिसर्च जरनेलके अनुसार यह दोनों रसायन कोरोना वायरस पाथवे या जिस माध्यम से मनुष्य की कोशिकाओं से जुड़ता है उस रास्ते को तोड़ने में सक्षम है।

किसी भी बैक्टीरिया या वायरस काे जीवित रहने के लिए एनर्जी चाहिए। यदि उसे न मिले तो खुद ब खुद खत्म हो जाएगा। लहसुन, प्याज और अदरक तीनों में लहसुन का फूड एनर्जी सबसे ज्यादा है इसलिए कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने में ज्यादा सक्षम है। डॉ. श्रीवास्तव 13 साल से असाध्य बीमारियों पर रिसर्च करते आ रहे हैं। इसे यूट्यूब में only cure 108 के नाम से देखा जा सकता है।

शोध के अध्ययन से पता चला लहसुन का गुण
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि होम्योपैथी दवा का नाम है एलीयम सेटाइवा। यह औषधि होम्योपैथी फार्मेसी में बहुत कम मिलती है, इसलिए उसके बारे में रिसर्च की। यह दवा लहसुन से बनती है। कोरोना वायरस के बचाव के लिए रिसर्च शुरू की। अमेरिका की डिटेल और कई रिसर्च सोसायटी द्वारा प्रकाशित किए गए कई शोध का अध्ययन किया तो लहसुन के गुणों का पता चला। लहसुन में पाॅवरफुल एंटीवायरल गुण मौजूद हैं। लहसुन कई प्रकार के वायरस को मारने में सक्षम है। इसमें काेराेना वायरस भी शामिल है।

ऐसे कर सकते हैं उपयोग
लहसुन को सुबह-शाम चबाकर खाने से फायदेमंद साबित होगा। बच्चों को आधा व बड़ों को एक लहसुन सुबह-शाम खाना चाहिए। क्लीनिकल रिसर्च के आधार पर इसके इस्तेमाल के बारे में श्रीवास्तव ने बताया कि होम्योपैथी फार्मेसी में एलीसन सटाइवा के नाम से टिंचर आता है, इसे खरीद लें और 2 साल से 8 साल तक के बच्चों को दो से तीन बूंद, बुजुर्गों को 5-7 बूंद और 1 साल के बच्चे को एक गिलास पानी में मिलाकर दिन में 3 बार एक बूंद दें।



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डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव


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