कमरे फुल इसलिए गलियारे में लगता है अस्पताल, कलेक्टर ने दौरा किया, नई इमारत का काम पूरा करने के निर्देश दिए , June 13, 2020 at 02:07PM

जिले के लैलुंगा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गलियारे में अस्पताल लगता है। लंबे वक्त से यहां इसी तरह मरीजों को रखा जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि मरीज बढ़ने और जगह ना होने की स्थिति में ऐसा करना पड़ता है। जिले के कलेक्टर भीम सिंह ने भी इस अस्पताल का दौरा किया। लोगों से बात की और अस्पताल की स्थिति पर नाराज भी हुए। उन्होंने पास ही में निर्माणाधीन नई इमारत का जायजा लिया। काम अब तक पूरा ना हो पाने की वजह से ठेकेदार को फटकार लगाई और 10 दिन में काम खत्म करने के निर्देश दिए।

बेड 30, हर वक्त रहते हैं 50 मरीज

कलेक्टर ने लोगों से बात की, जांच में पाया कि अस्पताल में गंदगी रहती है, इसलिए टॉयलेट दिन में तीन बार साफ करने के निर्देश देने पड़े।
कलेक्टर ने लोगों से बात की। जांच में पाया कि अस्पताल में गंदगी रहती है। इसलिए टॉयलेट दिन में तीन बार साफ करने के निर्देश देने पड़े।

लैलुंगा अस्पताल के डॉ एसएन उपाध्याय ने बताया कि इस अस्पताल की क्षमता 30 बिस्तरों की है। हर वक्त यहां 50 मरीज रहते ही हैं, कई बार यह स्थिति होती है कि मरीजों की संख्या 80 तक पहुंच जाती है। इस अस्पताल पर धरमजयगढ़, फरसाबहार, कोतबा जैसे अन्य ब्लॉक के मरीजों का भी भार है। इसलिए गलियारे में बेड लगाने पड़ते हैं, यदि नई इमारत में मातृ शिशु अस्पताल बनाया जा रहा है, उसके बनने से यहां का भार कम होगा।

डाइट चार्ट बनाकर डिस्पलें करें- कलेक्टर
कलेक्टर ने कहा कि यदि कोरोना का संक्रमण इस इलाके में और बढ़ा तो लैलूंगा में बन रहे मातृ शिशु चिकित्सालय को कोविड अस्पताल बनाया जाएगा। उन्होंने सामुदायिक अस्पताल के लिए कहा कि दिन में तीन बार शौचालयों की सफाई की जाए। गलियारों औरकमरों की भी नियमित सफाई होनी चाहिए। मरीजों को एक निश्चित डाइट चार्ट बनाकर दिन में तीन बार पौष्टिक आहार दिए जाने के निर्देश भी दिए।



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तस्वीर रायगढ़ जिले के लैलुंगा स्थित सामुदायिक केंद्र की है। बेड गलियारे में हैं और एक बेड पर दो लोग हैं। कलेक्टर और एसपी ने अस्पताल की स्थिति देखी और अव्यवस्था दूर करने के निर्देश दिए।


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