पिछले साल अच्छी बारिश और इस बार लॉकडाउन के कारण उद्योग-सिंचाई के लिए कम पानी का उपयोग, इसलिए...जल से भरी जमीन , June 13, 2020 at 05:41AM

राकेश पाण्डेय | कोरोना के कारण पूरे देश में लोग परेशान रहे, लेकिन इसने कुछ अच्छे निशान भी छोड़े हैं। अभी मानसून शुरू ही हुआ है और बांधों में भरपूर पानी है। अगर प्रदेश में बांधों की स्थिति देखें, तो पिछले साल इस समय तक बांधों में उनकी क्षमता का 10 से 50 प्रतिशत ही पानी होता था, जबकि इस बार यह स्थिति 20 से 74 प्रतिशत तक है। अगर भू-जल स्तर की बात करें, तो इसमें भी औसतन 1 से 5 मीटर तक की वृद्धि हुई है। पानी भरपूर रहने के विशेषज्ञ दो कारण बता रहे हैं। पहला प्रमुख कारण- पिछले साल बारिश का अच्छा होना है और दूसरा कारण लॉकडाउन में एक तरफ उद्योग बंद रहे तो दूसरी तरफ खेती-किसानी भी कम हुई। आम शहरी भी जिस तरह से पानी का उपयोग करते थे, उसमें कमी देखी गई। यहां तक कि रायपुर में गर्मी के दौरान इस बार टैंकर्स की व्यवस्था भी कम करनी पड़ी। रायपुर में पिछले साल इस मौसम में रोज 300 टैंकर पीने के पानी की व्यवस्था करनी पड़ती थी, जबकि इस बार सिर्फ 200 टैंकर लगे। हाईड्रो-मेट्रोलॉजी विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अखिलेश वर्मा ने बताया कि हर 5 साल में बाढ़ की स्थिति बनती रही है।

पिछली बार प्रदेश की नदियों में बाढ़ 2018 में आई थी। उस समय भी बांध पानी से भरे थे और पानी भी लगातार गिरता रहा। इस बार भी बांध अभी से लबालब हैं, जबकि मानसून ने एक दिन पहले ही छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया है। छत्तीसगढ़ में हर साल औसतन 1159 मिलीमीटर बारिश होती है। इस साल 102 फीसदी बारिश का अनुमान है। इसके अनुसार 1182 एमएम बारिश संभावित है। इस साल एक जून से 11 जून 2020 की स्थिति में 33.1 एमएम बारिश हो चुकी है। अगर 1 से 11 जून तक का पिछले दस साल का औसत देखा जाए, तो यह 24.1 मिलीमीटर है। वर्मा ने कहा कि यदि बारिश ज्यादा होती है, तो बांध जल्दी भर जाएंगे। ऐसी स्थिति में बारिश के पानी की मात्रा का आकलन किया जाएगा। अगर बांध समय से पहले ही भर जाते हैं, तो बांधों के गेट खोलकर पानी नदियों में छोड़ा जाएगा। अगर बारिश बहुत ज्यादा हुई और बांध भी भरे रहे, तो ऐसी स्थिति में गेट खोलने पर बाढ़ की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ऊंचाई पर स्थित है, इसलिए बाढ़ का असर दो-तीन दिनों से ज्यादा नहीं रहता, फिर भी महानदी के आसपास बसे कुछ क्षेत्र ज्यादा प्रभावित होते हैं। इनमें रायपुर, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ जैसे जिले के इलाके शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के बाढ़ के पानी से ओडिशा को ज्यादा नुकसान होता है। मौसम विभाग से 48 घंटे पहले ही भारी बारिश की जानकारी मिलती है। जहां तक बाढ़ से निपटने का प्रश्न है, इसके लिए राज्य सरकार ने डिज़ास्टर मैनेजमेंट की टीम इस बार अभी ही बना दी है। जब भी बांध से पानी छोड़ा जाता है, गांव में मुनादी करवाई जाती है और लोगों से सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की जाती है। इसकी वजह से फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचता है।

भूजल स्तर 1 से 5 मीटर तक ऊपर
प्रदेश के अलग अलग इलाकों में भूजल स्तर तकरीबन 5 मीटर तक ऊपर उठ गया है। यह बात छत्तीसगढ़ भूजल विभाग के प्री मानसून सर्वे में सामने आई है। रायपुर के धरसींवा में 1.61 मीटर और बालोद के गुरुर में 2.78 मीटर तक वाटर लेवल उठ गया है। भूजल विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक अजीत शुक्ला का मानना है कि भू-जल का स्तर बढ़ा है। इसका कारण यह था कि पिछले साल अच्छी बारिश हुई, जिसके कारण कुएं, तालाब इत्यादि भर गए थे। इस कारण भूजल का उपयोग कम हुआ, जिससे इसका स्तर बढ़ गया

धान की बुआई कम हुई
"बांधों में पानी ज्यादा है क्योंकि पिछली बार बारिश अच्छी हुई थी। गर्मी के धान की बुआई इस बार कम हुई है, हो सकता है यह लॉकडाउन का असर हो। इसके कारण बांधों से सिंचाई के लिए पानी कम छोड़ा गया। इसके अलावा इस बार औसत तापमान काफी कम रहा, जिससे पानी कम सूखा।"
-केशव कुमार, ईई, हसदेव बांगो बांध

जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा-पानी की फिजूलखर्ची रुकी
जल संरक्षण के विख्यात विद्वान जल पुरुष राजेंद्र सिंह कहते हैं कि हजारों करोड़ रुपए खर्च कर जो नदियां स्वच्छ नहीं हो सकीं आज निर्मल है। अंडरग्राउंड वाटर लेवल रिचार्ज है, क्योंकि पानी की फिजूलखर्ची रुकी है, हरियाली बरकरार है। इसे याद रखना चाहिए। सरकारें ऐसी योजनाएं लाएं कि गांव में शोषण, प्रदूषण और अतिक्रमण रुके। कोविड 19 के दौरान बंद रहने से जीवन चलता रहा, प्रकृति निर्मल हुई। पानी की बचत भी हुई। महामारी ने समूचे विश्व को यह संदेश दिया है कि प्रकृति की रक्षा को मानव अपने धर्म-कर्म में शामिल करे।



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गरियाबंद का तौरेंगा जलाशय अभी से 50 प्रतिशत से ज्यादा भरा है। फोटो-भूपेश केशरवानी


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