डेढ़ साल की उम्र में आंखों की रोशनी गई फिर भी बनी इंजीनियर, अब पीएससी प्री एक्जाम में भी सफल , June 13, 2020 at 06:58AM

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने राज्य सेवा की प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है। यह परीक्षा 9 फरवरी को हुई थी। इसमें बिलासपुर के भी छात्रों ने भी परीक्षा पास की है। सीजी पीएससी की प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट में बिलासपुर मसानगंज की दिव्यांग छात्रा सानिया रिजवी ने भी अपना स्थान बनाया है। अब वे मेंस की तैयारी कर रहीं हैं। सानिया के पिता सैयद नाजिम रिजवी और माता मेहरीन रिजवी हैं।
कहते हैं इंसान में जिद और जुनून हो तो दुनिया में कुछ भी हासिल किया जा सकता है। इसे सच साबित करने में जुटी हैं मसानगंज की दिव्यांग छात्रा सानिया रिजवी। सानिया की डेढ़ साल की उम्र में ही दवा के रिएक्शन से आंखों की रोशनी चली गई। जैसे-जैसे इनकी उम्र बढ़ी घर में बहन सहित अन्य लोगों को देखकर पढ़ाई का जज्बा बढ़ता गया और ये जज्बा ऐसा रहा कि सानिया पिता सैयद नाजिम अली रिजवी, माता मेहरनी रिजवी और बहन आलिमा रिजवी की मदद से 10वीं में 7.8 सीजीपीए, 12वीं में 72 प्रतिशत अंक हासिल किया। सेंट जेवियर स्कूल में इन्हें बेस्ट छात्रा के अवार्ड से सम्मानित भी किया गया। इसके बाद सानिया ने जेईई मेंस की परीक्षा पास की और एनआईटी रायपुर से बीटेक कीं। बीटेक में इन्होंने 7.6 ग्रेड हासिल किया। इसके बाद से सानिया सीजी पीएससी की तैयारी में लग गईं। जून 2019 से दिल्ली आईएएस एकेडमी में कोचिंग शुरू की। 9 फरवरी को सीजी पीएससी की प्रारंभिक परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में परीक्षा पास कर ली है। सानिया ने बताया की अब वे मेंस और इंटरव्यू की तैयारी कर रही हैं।
स्ट्रेस दूर करने लिखती हैं कविताएं
सानिया ने बताया कि वे प्रतिदिन 8 घंटे पढ़ाई करती हैं। कोचिंग में जो पढ़ाया जाता है, उसे सुनकर लिखती हैं और रिकार्ड भी कर लेती हैं। रिकार्डिंग को घर पर आकर सुनती हैं। पढ़ाई के दौरान अगर स्ट्रेस होता है तो कविता लिखती हैं और उसे रिकार्ड करके यूट्यब में अपलोड करती हैं। सानिया ने लॉकडाउन में 6 कविताएं लिखी हैं। इसमें सानिया ने आर्मी, कोरोना वायरस, कॉलेज लाइप और स्कूल लाइप पर कविताएं लिखी हैं।
शिक्षक कपिला प्रतिदिन उनका नोट्स 3 घंटे पढ़कर सुनाती हैं
सानिया ने बताया कि स्कूल में पढ़ाई के दौरान माता-पिता उनको किताबें पढ़कर सुनाते थे। इससे वे तैयारी करती थीं। जेईई की परीक्षा और बीटेक में उनकी बहन ने मदद की। इसके बाद सिलेबस कठिन होने के कारण शिक्षिका कपिला प्रतिदिन उन्हें 2 घंटे किताबें पढ़कर सुनाती हैं। परीक्षा के दौरान प्रतिदिन 4 घंटे नोट्स पढ़कर सुनाती थीं।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
सानिया अपने माता पिता के साथ।


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2zqeiFQ

0 komentar