पेसा कानून लागू करने शुरू हुई पहलजन घोषणा पत्र में किया था वादा , June 14, 2020 at 08:19AM

करने गंभीर पहल शुरू हो गई है। यह मामला कांग्रेस के जनघोषणा पत्र में भी प्रमुखता से रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने सर्व आदिवासी समाज तथा वनाधिकार के लिए काम करने वाले एनजीओ के प्रतिनिधियों से चर्चा की। वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई चर्चा में उन्होंने ‘पेसा’ के सभी 38 प्रावधान प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू करने सुझाव मांगे।

इसमें विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी भी मौजूद थे।सिंहदेव ने कहा कि इसके लिए सभी स्तरों पर वृहद चर्चा के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। पंचायत विभाग इस कानून को अमल में लाने वाले दूसरों राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्रप्रदेश, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के नियमों का भी अध्ययन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पंचायतीराज और ‘पेसा’ कानून की आत्मा को बरकरार रखते हुए अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन की प्रभावी रीति-नीति तय की जाएगी। चर्चा में शामिल प्रतिनिधियों ने ग्रामसभा के सशक्तिकरण, प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग, रीति-रिवाजों, परंपरा और संस्कृति के संरक्षण, जमीन अधिग्रहण, ग्राम कोष, वनवासियों के कल्याण तथा नई विकास परियोजनाएं शुरू करने के संबंध में सुझाव दिए।

उन्होंने कहा कि ‘पेसा’ के लिए नियम बनाते समय वर्तमान राजस्व और वन कानूनों का भी अध्ययन जरूरी है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम और पूर्व सांसद सोहन पोटाई ने कहा कि ‘पेसा’ के हर क्लॉज के लिए पूरी गंभीरता से नियम बनाने की जरूरत है।

चर्चा में सर्व आदिवासी समाज के बी.एस. रावटे, एन.एस. मंडावी, अकबर राम कोर्राम, मोहन कोमरे, प्रकाश ठाकुर, विनोद नागवंशी, नकुल चंद्रवंशी, अश्वनी कांगे और तुलसी मंडावी उपस्थित थे। गैर-सरकारी संगठनों से गौतम बंदोपाध्याय, आलोक शुक्ला, सुदेश टीकम, अनुभव शोरी, संदीप सलाम, विजेन्द्र, सरस्वती ध्रुव और सुलक्षणा नंद चर्चा में शामिल हुईं। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश अग्रवाल, विजय और शालिनी गेरा तथा आदिवासी समाज के अनूप टोप्पो, बसंत कुजूर और सुभाष ने भी अपने सुझाव दिए।



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PESA law started to be implemented, the initiative promised in the manifesto


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