10 की जगह ठूस दिए 60 मवेशी, 47 की दम घुटने से मौत, सरपंच और सचिव पर एफआईआर के निर्देश , July 26, 2020 at 05:55AM

बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक के ग्राम मेढ़पार बाजार में दम घुटने से 47 गायों की मौत हो गई। कथित तौर पर फसल को चराई से बचाने के लिए पुराने पंचायत भवन के छोटे-छोटे दो कमरों में 60 गायों को ग्रामीणों ने शुक्रवार को रख दिया था। शनिवार की सुबह इनमें से 47 गायों की मौत हो गई। वहीं बाकी गायों का उपचार किया गया। इस घटना से पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया। इधर, कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने मीडिया से चर्चा में कहा कि घटना में एफआईआर के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में सरपंच और सचिव के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। घटना की जानकारी मिलने के बाद संसदीय सचिव व तखतपुर विधायक रश्मि सिंह के साथ प्रशासन, पुलिस और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे।

ग्रामीणों की मदद से मृत गायों को बाहर निकाला गया और उन्हें दफनाया गया। वहीं कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर ने गायों के मौत की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अतिरिक्त कलेक्टर स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसमें जो लोग भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाएगी। इधर, प्रशासन ने पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 13 व आईपीसी की धारा 429 के तहत अपराध भी दर्ज कराया है।

सीएम भूपेश ने कड़ी कार्रवाई के दिए निर्देश
प्रदेश की बड़ी घटना को सीएम भूपेश बघेल ने गंभीरता से लेते हुए बिलासपुर कलेक्टर को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने घटना को दुर्भाग्यजनक बताया है। उन्होंने बताया कि कलेक्टर-एसपी पहुंच कर जांच कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर घटना के कारणों की जानकारी होगी।

रोका छेका 30 जून को खत्म, इससे घटना का संबंध नहीं-राज्य शासन
इस घटना की जानकारी मिलने के बाद कृषि एवं पशुपालन मंत्री रविंद्र चौबे ने संसदीय सचिव रश्मि सिंह से मामले की लगातार जानकारी ली। वहीं गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष रामसुंदर दास ने भी घटना की पूरी जानकारी ली। दास रविवार को घटनास्थल का दौरा करेंगे। वहीं राज्य शासन ने दोपहर में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि मेढ़पार गांव में पशुओं की मौत की खबर का रोका छेका अभियान से कोई संबंध नहीं है। राज्य में रोका छेका अभियान 30 जून को समाप्त हो गया है और रोका छेका अभियान के तहत जानवरों से फसलों को बचाने के लिए उन्हें खुले वातावरण में गौठान में रखे जाने के निर्देश दिए गए थे। इस घटना में स्थानीय व्यक्तियों ने पशुओं को एक भवन में बंद कर के रख दिया। यह ग्राम पंचायत द्वारा निर्मित गोठान नहीं था। यह व्यवस्था गोठान की मूल परिकल्पना के ही विपरीत है।



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घटनास्थल पर एकत्रित ग्रामीण।


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