कोविड मरीजों का घर में ही इलाज, जिले में पहले 10 मरीजों के साथ होगा ट्रायल...अनुमति देने से पहले प्रशासन की टीम घर का निरीक्षण करेगी , August 01, 2020 at 06:28AM

मुख्यमंत्री ने बिना लक्षण और सामान्य स्वास्थ्य वाले कोविड-19 मरीजों को होम आइसोलेशन में रखकर इलाज करने की घोषणा की थी। शुक्रवार को स्वास्थ्य सचिव द्वारा जारी पत्र के मुताबिक जिले में 10 कोरोना मरीजों को सशर्त अनुमति देने के लिए कहा है। जिला प्रशासन को इससे पहले तैयारी करने के लिए कहा गया है। होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को प्रशासन की शर्तें मानने का शपथ पत्र देना होगा। अनुमति देने से पहले प्रशासन की टीम घर का निरीक्षण करेगी, देखेगी कि मरीज को होम आइसोलेशन में रखा जा सकता है या नहीं।
संक्रमित को होम आइसोलेशन में रखना हो तो यह शर्तें
बिना लक्षण वाले ऐसे मरीजों को कोरोना संक्रमित पाए जाने पर घर से इलाज की अनुमति होगी जिन्हें कैंसर, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा, हृदय रोग, टीबी या दूसरी गंभीर बीमारी ना हो। प्रतिरोधक क्षमता कमजोर न हो। मरीज को अपनी पहचान के एक डॉक्टर का नाम ( डॉक्टर की सहमति भी जरूरी है) देना होगा जो उसकी नियमित स्वास्थ्य जांच करेगा। कोविड मरीज या उसके परिजन को घर से बाहर नहीं निकलना होगा, ऐसा करने पर उसके विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। मरीज के घर में होम आइसोलेशन अवधि तक कोई भी स्टाफ, नौकर, ड्राइवर या बाहरी व्यक्ति नहीं आ सकेगा। ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर की व्यवस्था होनी चाहिए। सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द या भारीपन, होठ या चेहरा नीला पड़ने, आल्टर्ड सेंसोरियम जैसी शिकायत हो तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग के कंट्रोल रूम से संपर्क करना होगा।

फॉर्म भरकर देना होगा- सरकारी प्रोटोकॉल के पालन और होम आइसोलेशन के लिए लागू शर्तों के पालन के संबंध में मरीज को एक फॉर्म भरकर देना होगा। होम आइसोलेशन की अवधि में देखरेख करने वाले डॉक्टर की सहमति भी फॉर्म में देनी होगी।

यह प्रशासन की जिम्मेदारी होगी
हेल्थ सेक्रेटरी ने पत्र में प्रशासन को 14 बिंदुओं का निर्देश दिया है। पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले 24 घंटे हफ्ते के सातों दिन सेवा वाला एक कंट्रोल रूम बनाना पड़ेगा। कोविड पॉजिटिव पाए जाने के बाद किसी भी मरीज को होम आइसोलेशन में रहने की अनुमति देने से पहले एक टीम मरीज के घर जाकर देखेगी। तीन कमरे, हॉल, किचन वाला घर होना चाहिए, कमरा हवादार होना जरूरी है। घर वालों और मरीज को प्रोटोकॉल समझाया जाएगा। मरीज की फोन या वीडियो कॉल के जरिए काउंसलिंग होगी। पड़ोसियों की काउंसलिंग होगी ताकि मरीज व परिवार से दूरी बनाकर रखे लेकिन मरीज या उसके परिजन को हतोत्साहित न करे। मरीज या परिवार के सदस्य को किसी भी हालत में बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी। घर के बाहर होम आइसोलेशन में मरीज होने का स्टिकर चस्पा करना होगा। वार्ड कार्यालय में मरीज की जानकारी दर्ज होगी। मरीज के घर के कचरे के निस्तारण की जिम्मेदारी भी जिला प्रशासन की होगी। एक स्वास्थ्य कर्मी मरीज और चिकित्सक के संपर्क में रहेगा। घर में रहते हुए कोविड मरीज का स्वास्थ्य बिगड़ता है तो प्रशासन की रैपिड एक्शन टीम तुरंत मरीज को अस्पताल में शिफ्ट करेगी।



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