जशपुर के बाद 10 जिले फिर अटके क्योंकि सांसद-स्थानीय नेताओं में एक नाम पर सहमति नहीं , July 29, 2020 at 06:21AM

भाजपा में सांसदों और स्थानीय नेताओं में टकराव के कारण दस जिलों के अध्यक्षों की नियुक्ति फिर अटक गई है। हर जिले से कई दावेदार हैं, जिनमें से एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है। इसमें बड़े स्तर पर गुटबाजी के कारण भी नियुक्तियां नहीं हो पाने की बात कही जा रही है, क्योंकि सभी गुट से एक-एक नाम हैं। इसके कारण प्रदेश की कार्यकारिणी भी नहीं बन पा रही है। इसे लेकर तर्क दिया जा रहा है कि राष्ट्रीय कार्यसमिति के बाद प्रदेश की कार्यसमिति बनाई जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय की नियुक्ति को अब दो महीने होने को हैं, लेकिन नई कार्यकारिणी के मामले में वे सभी नेताओं में सहमति नहीं बना पा रहे हैं। सबसे ज्यादा खींचतान रायपुर, दुर्ग-भिलाई, सरगुजा, बस्तर जैसे जिलों में है, जहां नेताओं के कई गुटों के दावेदारों के कारण दिक्कत आ रही है। रायपुर में पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह, पूर्व सांसद रमेश बैस, सांसद सुनील सोनी, पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल-राजेश मूणत और संगठन सभी की ओर से दावेदार हैं। रायपुर और रायपुर ग्रामीण जिले मिलाकर दर्जनभर दावेदार हैं। इनमें पूर्व मंत्री मूणत के साथ रायपुर ग्रामीण में तीन बार के विधायक देवजी पटेल जैसे वरिष्ठ नेताओं की भी दावेदारी की चर्चा है। नतीजतन संगठन एक राय नहीं बना पा रहा। इसी तरह दुर्ग में राष्ट्रीय महामंत्री व सांसद सरोज पांडेय, पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय और सांसद विजय बघेल हैं तो सरगुजा में राष्ट्रीय अजजा मोर्चा के अध्यक्ष व सांसद रामविचार नेताम व केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह समेत स्थानीय नेताओं की पसंद-नापसंद में पार्टी उलझ गई है। इस वजह से रायपुर-रायपुर ग्रामीण, दुर्ग-भिलाई, सरगुजा संभाग से सरगुजा, बलरामपुर और सूरजपुर, बस्तर संभाग से कांकेर व बस्तर और कोरबा के जिलाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो पा रही है।

संगठन की गतिविधियां थम गईं
कोरोना की वजह से पहले ही भाजपा वर्चुअल स्तर पर गतिविधियां संचालित कर रही है। जिले स्तर पर अध्यक्ष और कार्यकारिणी नहीं होने के कारण संगठन की गतिविधियां थम गई हैं। इस बीच कई ऐसे मौके आए जब राज्य सरकार के खिलाफ भाजपा को सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करने का मौका था, लेकिन टीम की कमी के कारण वर्चुअल विरोध-प्रदर्शन भी सफल नहीं हो पाए। नियुक्तियों में देरी के कारण वर्तमान टीम भी ज्यादा उत्साह नहीं दिखा रही है। संगठन का फिलहाल कोई दबाव भी नहीं है।

केंद्र में एडजस्ट होने का इंतजार
राष्ट्रीय अध्यक्ष जगतप्रकाश नड्‌डा भी अब तक अपनी नई टीम नहीं बना पाए हैं। राष्ट्रीय कार्यसमिति में छत्तीसगढ़ से कुछ नेताओं को मौका मिल सकता है। इसका भी इंतजार किया जा रहा है कि केंद्र में किसे मौका मिलेगा। फिलहाल पूर्व सीएम रमन, सांसद सरोज पांडे व नेताम राष्ट्रीय टीम में हैं। केंद्र में जो नेता रहेंगे, उनके आधार पर भी राज्य के नेताओं की जिम्मेदारियां तय होंगी। प्रदेश कार्यसमिति में देरी के पीछे इसे भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय टीम के बाद यहां की टीम बनेगी।

मोर्चा-प्रकोष्ठ के लिए भी जद्दोजहद
जिले और प्रदेश कार्यसमिति ही नहीं, बल्कि मोर्चा-प्रकोष्ठ में नियुक्तियों को लेकर भी काफी जद्दोजहद चल रही है। युवा और महिला मोर्चा में सबसे ज्यादा दावेदार सक्रिय हैं, जो वरिष्ठ नेताओं के पास जाकर लॉबिंग कर रहे हैं। इसमें कई नाम अभी से ही प्रमुखता से उभर रहे हैं।



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