लॉकडाउन के एक हफ्ते में 1322 मरीज मिले, इससे पहले के सात दिन में 483 संक्रमित ही मिले थे , July 31, 2020 at 05:58AM

राजधानी में लॉकडाउन-1 में 22 से 28 जुलाई के बीच 8 दिनों में 1322 मरीज मिल चुके हैं। जबकि इसके ठीक पहले 8 दिनों में केवल 483 मरीज मिले थे। लॉकडाउन में अनलॉक से तीन गुना ज्यादा मरीज मिले हैं। विशेषज्ञों का भी कहना है कि लॉकडाउन का असर 15 दिनों बाद दिखेगा। कोरोना के केस कम होंगे। संक्रमण भी कम फैलेगा। शहर में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो वायरस से संक्रमित हैं लेकिन लॉकडाउन के दौरान वे किसी के संपर्क में नहीं आएंगे। इससे संक्रमण नहीं फैलेगा। अभी जो मरीज सामने आ रहे हैं वे अनलॉक में संक्रमितों के संपर्क में आने के दौरान संक्रमित हुए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन में औसतन रोजाना 165 मरीजों की पहचान हो रही है। जबकि लॉकडाउन के पूर्व के सप्ताह का औसत केवल 60 मरीज का रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार लॉकडाउन का असर 15 दिन बाद नजर आएगा। लॉकडाउन में लोग घर से बाहर नहीं निकल रहे या बेहद जरूरी काम से ही बाहर आ रहे हैं, ऐसे लोग संक्रमण से बचे रहेंगे। दूसरी ओर जो संक्रमित हैं और उनके लक्षण सामने नहीं आए वे भी इस दौरान घर पर ही हैं। लॉकडाउन की अवधि में उनके लक्षण सामने आ जाएंगे और बिना किसी के संपर्क में आए उन्हें अस्पताल में भर्ती करवा दिया जाएगा। गौरतलब है कि राजधानी में 18 मार्च को पहला केस सामने आया था। उसके बाद 31 मई तक केवल 15 मरीज थे। इस अवधि में लॉकडाउन था। लॉकडाउन खुलने के बाद लोग लापरवाह हो गए और संक्रमितों के संपर्क में आने लगे। इससे संक्रमण बढ़ा। सीनियर कैंसर सर्जन डॉ. युसूफ मेमन व चेस्ट एक्सपर्ट डॉ. आरके पंडा ने बताया कि कम्युनिटी में संदिग्धों की काफी संख्या है। लॉकडाउन में ये घर से बाहर नहीं जाएंगे। इसका फायदा यह होगा कि संक्रमण कम होगा, लेकिन केस कम नहीं होंगे। अचानक लॉकडाउन लगाने के कारण कोरोना सेल यह अनुमान नहीं लगा सका है कि कुल कितने मरीज मिलेंगे। संक्रमण कम होगा, ये निश्चित है यानी एक-दूसरे से जो फैल रहा है, वो कम होगा।

यह कम्युनिटी स्प्रेड नहीं है। जो पॉजिटिव आए हैं, उन्हीं से ज्यादा लोग संक्रमित हो रहे हैं। बिरगांव की कचरा बीनने वाली महिला, भाठागांव में दो मृत महिला से 70 से ज्यादा संक्रमित हो चुके हैं। जबकि विदेश से लौटने वाले लोगों के परिजन से लेकर संपर्क में आए लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव रही थी।

वायरल लोड बढ़ने से राजधानी में और फैला कोरोना
अब जो मरीज मिल रहे हैं, उनमें पहले की तुलना में वायरल लोड बढ़ गया है। यही कारण है कि संक्रमण तेजी से हो रहा है। हालांकि आईसीएमआर की गाइडलाइन बदलने के बाद मरीजों को 5 से 10 दिनों में डिस्चार्ज किया जा रहा है। छुट्टी के पहले दोबारा सैंपल लेकर जांच की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है। अभी जिस तादाद में मरीज मिल रहे हैं, उसकी तुलना में कम मरीज डिस्चार्ज हो रहे हैं। इससे एम्स, अंबेडकर, माना में बेड फुल होने की स्थिति में है। इसलिए ईएसआई के बाद इनडोर स्टेडियम, आयुर्वेद अस्पताल में भी मरीजों की भर्ती शुरू कर दी गई है। ईएसआई अस्पताल में जिनके पास राशन कार्ड है, उनका फ्री इलाज होगा। जिनके पास ये नहीं होगा, वे रोजाना 1,448 रुपए देकर इलाज करवा सकते हैं। वहां बिना लक्षण व कम लक्षण वाले मरीजों का ही इलाज होगा। गंभीर मरीजों का इलाज एम्स व अंबेडकर में किया जाएगा।



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