राजधानी में 2 डाक्टरों का घर में ही इलाज, मरीज बढ़ते रहे तो होम आइसोलेशन में ही इलाज किए जाने पर विचार कर रहा प्रशासन , July 28, 2020 at 06:34AM

राजधानी में बिना लक्षण या हल्के लक्षण वाले मरीजों को घर में ही रखकर इलाज का ट्रायल शुरू हो गया और अभी 2 डाक्टरों का होम केयर में ही इलाज किया जा रहा है। दुर्ग में भी फिलहाल डाक्टर को ही उनके घर में रखकर दवाइयां दी गई हैं। राजधानी में कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं और नए अस्पतालों की जरूरत पड़ रही है, इसलिए होम आइसोलेशन के नतीजों पर सबकी नजर है। दरअसल मरीज बढ़ने के बाद मुंबई और दिल्ली में बिना लक्षण या हल्के लक्षण वाले मरीजों के घर में ही इलाज से हालात काबू में आए हैं। भास्कर की पड़ताल में पता चला कि 17 जुलाई को मुंबई में तो 45 प्रतिशत मरीजों को दवा देकर उनके घरों में ही रखा गया था। इसी तरह, रविवार को दिल्ली में 7 हजार मरीज ऐसे हैं, जिनका घरों में ही इलाज चल रहा है।
राजधानी में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच अब आम लोगों के जेहन में ये सवाल उठ रहा है कि अगर उन्हें कोरोना हो गया तो क्या घर में रहकर इलाज करवाया जा सकता है? दरअसल, प्रदेश में हालिया दिनों में बेशक मरीजों की आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। इसीलिए रायपुर और दुर्ग में तीन कोरोना पॉजिटिव के साथ घर में इलाज का ट्रायल किया गया है। शुरूआत में केवल डॉक्टरों को इसलिए इसमें शामिल किया गया है ताकि किसी तरह की कोई परेशानी आने पर वे खुद स्थिति को संभाल सकते हैं। हेल्थ सचिव निहारिका बारिक सिंह के मुताबिक विभिन्न चरणों में घर में इलाज का व्यापक तौर पर अध्ययन किया जा रहा है। इसमें धीरे धीरे मरीजों को बढ़ाकर भी देखेंगे। ट्रायल रन के अगले चरणों में करीब 20 मरीजों के इलाज की स्टडी की जाएगी। प्रयोग सफल रहा तो धीरे-धीरे होम केयर ऐसे लोगों को भी उपलब्ध करवा सकते हैं, जिनके पास घरों में बिलकुल अलग रहने का इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद हो।

थोड़ी राहत के आंकड़े

  • 23 - जिलों में एक्टिव केस सौ के नीचे
  • 09 - हजार बेड वाले और नए सेंटर
  • 8,759 - बिस्तर कोविड केयर सेंटर में
  • 3,384 - बिस्तर कोविड अस्पताल में

दिल्ली और मुंबई में घर पर इलाज, दोनों में कामयाब
दिल्ली में कोरोना मरीजों का घर पर इलाज जून में शुरु हुआ था। दरअसल दिल्ली सरकार के फैसले पर पहले एलजी ने रोक लगा दी थी, बाद में एलजी ने खुद यह रोक वापस ले ली। दिल्ली के सूत्रों ने बताया कि वहां घर में इलाज का मॉडल कामयाब रहा है। इसलिए मुंबई ने भी बढ़ते मरीजों के कारण इसे अपना लिया और वहां भी इससे काफी राहत मिली है। उत्तरप्रदेश में भी हाल में यह सिस्टम शुरु हुआ है। इसमें कम या हल्के लक्षण वाले कोरोना पॉजिटिव मरीजों को दवा देने के बाद घर में आइसोलेट करने के लिए कहा जाता है और उसे रोज काॅल कर स्थिति पूछी जाती है। इमरजेंसी पर अस्पताल या केयर सेंटर में मरीज को तुरंत भर्ती का सिस्टम भी बना हुआ है। अस्पताल में केवल वही मरीज भर्ती किए जा रहे हैं, जिन्हें या तो कोरोना का संक्रमण गंभीर हो या उन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी हो। डाक्टरों के मुताबिक हल्के लक्षण वाले मरीज दवाइयां और सावधानी के साथ पौष्टिक आहार लेकर दोनों महानगरों में बड़ी संख्या में ठीक हो रहे हैं।

प्रयोग कलेक्टरों के साथ-साथ डॉक्टरों की भी निगरानी में
होम आइसोलेशन वाले तीनों मरीजों की मॉनिटरिंग का जिम्मा रायपुर और दुर्ग कलेक्टरों को सौंपा गया है। उनके सुपरविजन में मेडिकल फील्ड से जुड़े जानकार इस स्थिति का अध्ययन कर रहे हैं कि किसी मरीज का घर में इलाज चल रहा है, तो इससे संक्रमण आसपास तो नहीं फैला है? मरीज के घर में कोविड संक्रमण की क्या स्थिति है, घर में किस तरह की परेशानी आ रही है, या कोई इमरजेंसी तो नहीं हो रही है। ट्रायल वाले मरीजों की स्थिति का आंकलन रूटीन मॉनिटरिंग के बेसिस पर हो रहा है। डॉक्टरों को रखा गया है ताकि इसमें आने वाली परेशानियों को मेडिकल प्वांइट ऑफ व्यू से भी देख सकें।

अब भी 8759 बेड की व्यवस्था 9 हजार अतिरिक्त बिस्तर शीघ्र
हेल्थ सचिव के मुताबिक अभी तक प्रदेश के कोविड केयर सेंटर में 8759 बिस्तरों का इंतजाम हो चुका है। कोविड केयर सेंटर में बेहद माइल्ड वायरल लोड वाले मरीजों को ही रखा जा रहा है, ताकि गंभीर मरीजों का इलाज अस्पताल सुचारु रूप से किया जा सके। प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों को कोविड केयर सेंटर में 9 हजार अतिरिक्त बिस्तरों को बनाने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। दो हफ्ते के अंदर 9 हजार अतिरिक्त बिस्तर और तैयार हो जाएंगे। तय हुआ है कि जहां ज्यादा केस मिल रहे हैं, वहां अतिरिक्त कोविड केयर सेंटर पहले बनाए जाएं।

मरीजों में इमरजेंसी और उनके परिवार में संक्रमण फैलने का खतरा, इसलिए प्रयोग के ज्यादा चरण
कोरोना संक्रमण फैलता है, इसलिए मामूली लक्षण या बहुत ज्यादा माइल्ड केस होने के बावजूद इस बात की गारंटी नहीं ली जा सकती है कि ये फैलेगा नहीं। घर में इलाज के प्रयोग में इसीलिए पहले चरण में आम लोगों को नहीं रखा गया है। डॉक्टर या मेडिकल स्टॉफ के लोग फोकस तरीके से इस प्रयोग को अंजाम दे सकते हैं। आम लोग आत्मनियंत्रण जैसी स्थिति को कितना बरकरार रख पाते हैं, इसपर भी संशय जाहिर किया जा रहा है, इसलिए पहला चरण डाक्टरों के लिए ही है। मुंबई या दिल्ली की तरह समय बीतते-बीतते घर में इलाज का विकल्प अपनाना पड़ सकता है, इसलिए प्रशासन होम आइसोलेशन के सारे अच्छे-बुरे पहलू जानना चाहता है।

"अभी कोरोना इलाज के लिए पर्याप्त बेड हैं। घर में इलाज का प्रयोग इसलिए किया जा रहा है ताकि भविष्य में हालात बिगड़ने पर हम पहले से इस तरह की स्थिति के लिए तैयार रह सकें।"
-निहारिका बारिक सिंह, हेल्थ सचिव



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/304k2iZ

0 komentar