सीएम का पीएम को पत्र- बस्तर में स्टील उद्योगों को 30 फीसदी रियायत पर मिले लौह अयस्क, कृषि उत्पाद अध्यादेश वापस लें , July 20, 2020 at 06:49AM

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दो अलग-अलग पत्र लिखकर बस्तर के स्टील उद्योगों को 30 फीसदी रियायत दर पर लौह अयस्क देने का आग्रह किया है। वहीं दूसरे पत्र में उन्होंने कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य अध्यादेश 2020 वापस लेने का अनुरोधकिया है।
पहले पत्र में सीएम ने लिखा है कि मोदी सरकार द्वारा रियायत दी जाती है तो इससे बस्तर में बड़े पैमाने पर स्टील उद्योगों का संचालन और इसके जरिए वहां बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओंको रोजगार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी जिससे बस्तर के विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। सीएम ने कहा है कि राज्य शासन द्वारा एनएमडीसी को इस संबंध में पहले भी पत्र भेजा जा चुका है। वहीं दूसरे पत्र में कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020 को वापस लेने का आग्रह किया है।

5 जून को जारी अध्यादेश कृषकों के हित में नहीं है, रोजगार कम करने वाला और संघीय ढांचे की मान्य परंपराओं के विपरीत है। अध्यादेश द्वारा किसानों-व्यापारियों को कृषि उत्पादों की खरीदी-बिक्री की छूट देते हुए मंडी या मंडी के बाहर अधिसूचित कृषि उपज पर मंडी शुल्क से छूट एवं बगैर लाइसेंस के स्थायी खाता संख्या कार्डधारी व्यापारी को कृषि उपज के क्रय विक्रय करने की अनुमति दी गई है।

उद्योगपतियों ने भी लिखी चिट्‌ठी

राज्यभर के स्पंज आयरन निर्माताओं का दावा है कि लौह अयस्क छर्रों के निर्यात पर प्रतिबंध से छत्तीसगढ़ समेत देशभर में इस्पात की कीमतें कम करने पर मदद मिलेगी। भारत ने 2019-20 में 12.6 मिलियन टन (एमटी) छर्रों का निर्यात किया, जो एक साल पहले 9.3 मीट्रिक टन था। स्पंज आयरन एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष अनिल नचरानी ने बताया कि भारत स्पंज आयरन का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है। 2015-16 में भारत का स्पंज आयरन का उत्पादन 2019-20 में बढ़कर 37.14 मीट्रिक टन हो गया। छर्रों के निर्यात पर प्रतिबंध से इस्पात की कीमतें कम होंगी जिससे स्टील की खपत बढ़ाने में मदद मिलेगी। लौह अयस्क छर्रों पर 30% निर्यात शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर विचार का आग्रह किया है।

मंत्रालय व सभी दफ्तरों में तृतीय-चतुर्थ श्रेणी के एक तिहाई कर्मचारी ही आएंगे

प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने मंत्रालय समेत सभी सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। जारी आदेश में कहा गया है कि सभी दफ्तरों में तृतीय आैर चतुर्थ श्रेणी के सिर्फ एक तिहाई कर्मचारियों की ही ड्यूटी लगाई जाए। कर्मचारियों की ड्यूटी रोस्टर के अनुसार लगाई जाएगी वहीं अधिकारी वर्ग के लिए नियम पहले की तरह ही होंगे। आदेश में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने जिला स्तर पर प्रशासनिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर कड़ाई कर सकता है।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह केवल प्रतिबंधात्मक आदेश से प्रभावित क्षेत्र की सीमा में स्थित कार्यालयों और विभागों के अंतर्गत निगम, मंडल, आयोग और अन्य प्रशासकीय इकाईयों पर लागू होगा तथा केवल प्रतिबंधात्मक आदेश के प्रभावी रहने की अवधि तक ही प्रभावी रहेगा। इसी प्रकार इन क्षेत्रों में स्थित शासकीय कार्यालयों में कार्यालय प्रमुख की अनुमति के बिना किसी का भी प्रवेश नहीं होगा।



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CM's letter to PM- Withdraw the iron ore, agricultural products ordinance given to 30% concession to steel industries in Bastar


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