तांबाकछार गांव में ना सड़क ना पुल, मशाल की रोशनी में बीमार महिला को चारपाई पर लेकर 4 किलोमीटर चले पैदल, तब मिला इलाज , July 30, 2020 at 08:17AM

आदिवासी बाहुल्य जशपुर जिले में कई गांव पहुंच विहीन हैं। उस लिस्ट में ब्लाक के ग्राम पंचायत तांबाकछार का आश्रित ग्राम जबला शामिल है। मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात जबला से एक बीमार महिला को मशाल की रोशनी के सहारे खाट पर ढोकर 4 किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाया, जिसके बाद महिला अस्पताल पहुंच सकी। महिला की नाजुक हालत को देखते हुए बगीचा के सीएचसी से उसे कुनकुरी हॉलीक्रास अस्पताल रैफर कर दिया है।

घटना सामने आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव पहुंचकर होने वाली परेशानियों की जानकारी ली। तांबाकछार ग्राम पंचायत अंतर्गत जबला निवासी सुखवारो बाई 45 वर्ष पति लक्ष्मण राम को बीते दाे दिन से माहवारी संबंधी समस्या आ रही थी। मंगलवार की रात 11 बजे महिला बेहोश हो गई। उसके शरीर में खून की कमी के कारण वह बैठ तक नहीं पाई। ऐसी स्थिति में महिला को तत्काल अस्पताल पहुंचाना जरूरी हो गया। बारिश के दिन में गांव तक कोई भी चारपहिया गाड़ी नहीं पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में पड़ोसियों की मदद से महिला को खाट पर ढोकर चार किलोमीटर दूर ग्राम तांबाकछार की सड़क तक पहुंचाया गया। गांव में बिजली भी नहीं है। रोशनी के लिए ग्रामीणों ने मशाल जलाए थे। तांबाकछार से महिला को प्राइवेट चारपहिया पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बगीचा पहुंचाया गया। देर रात को महिला की नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे रेफर कर दिया।

बारिश के मौसम में कोई बीमार पड़ता है तो खाट पर लिटाकर ले जाते हैं हॉस्पिटल
सरपंच सुरेश राम ने बताया कि तांबाकछार पंचायत के आश्रित ग्राम जबला में बारिश के दिनों में किसी भी वाहन से पहुंचना संभव नहीं है। गांव जाने वाली सड़क पर मुड़ाकोना नाला और जबला नाला पड़ता है। जो बरसात के दिनों में भरा रहता है। नाला पार करने के लिए पुल अबतक नहीं बन सका है। इसके अलावा गांव की सड़क भी कच्ची है, जो बारिश में कीचड़ से भरा है। इस गांव की आबादी 1700 लोगों की है। बरसात में जब भी गांव में कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ता है तो उसे खाट पर ढोकर ही सड़क तक पहुंचाया जाता है।

नाले का पानी घटता है तब ही राशन लेने के लिए जा पाते हैं दूसरे गांव
सरपंच सुरेश ने बताया कि नाले में पुल नहीं होने व सड़क कच्ची होने के कारण जबला के मिडिल व हाईस्कूल में पढ़ने वाले बच्चे बरसात के दिनों में कई दिन स्कूल नहीं जा पाते हैं। नाला भरने के बाद गांव टापू बन जाता है। इस गांव से ना कोई बाहर निकल पाता है और ना कोई गांव पहुंच पाता है। गांव में बरसात के दिनों में पीडीएस का राशन तक नहीं पहुंच पाता है। गांव के राशन को पंचायत मुख्यालय तांबाकछार में खाली कराया जाता है। ग्रामीण जब नाले में पानी कम होता है तो राशन ले जाते हैं। नाले में पुल व सड़क के लिए पंचायत प्रस्ताव दे चुकी है।



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A sick woman walked 4 kilometers on foot in the torchlight, then got treatment


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