बस वालों की हालत इतनी खराब कि एसोसिएशन अध्यक्ष ने 47 में से 27 बसें बेचीं, एक संचालक ने खोला ढाबा , July 22, 2020 at 05:57AM

तारा परसवानी |106 दिनों के लाॅकडाउन के बाद रफ्तार पकड़ने से पहले ही बसों के पहिए अब हांफने लगे हैं। जिले में 15 दिन पहले फिर से शुरू हुई बस सेवा 22 जुलाई से फिर बंद हो जाएगी। एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मेंद्र वर्मा ने तो आर्थिक तंगी के चलते अपनी 8 बसें ही बेच दी हैं जबकि एक अन्य बस संचालक ने ढाबा खोल लिया है।
रायपुर से बलौदाबाजार, बलौदाबाजार से भाटापारा मार्ग पर कभी 120 बसें दौड़ती थीं मगर आज सिर्फ 8 बसें चल रही हैं वह भी खाली-खाली। बस संचालको, ड्राइवरों, कंडक्टरों, हेल्परों समेत 500 लोगों का परिवार इस बस परिवहन सेवा पर निर्भर था मगर साढे तीन माह से लाॅकडाउन के चलते जो हालात बने है‌ उससे कई बस संचालकों के सामने गाड़ियां बेचने की नौबत आ गई है। शकुन बस ट्रैवल्स के संचालक एवं एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मेंद्र वर्मा ने बताया कि साढ़े तीन माह से हालात इतने खराब हो गए हैं कि बस संचालकों को गहने गिरवी रखकर किश्तें पटानी पड़ रही हैं। उन्हें खुद अपनी 8 बसें बेचनी पड़ीं हैं। 8-9 बसों के मालिक महामाया ट्रैवल्स के संचालक लखन पटवा ने अपनी सभी बसें खड़ी करके ढाबा खोल लिया है।

12 बसों में से 4 बंद
सवारी के अभाव में नुकसान में जा रहे बस संचालकों का कहना है कि 6 जुलाई को फिर पुनः जब बस सेवा शुरू हुई तो सड़कों पर हमने 12 बसें उतारी थीं मगर कोरोना व बारिश के चलते इक्का-दुक्का सवारियों को लेकर बसों को इस उम्मीद से चला रहे थे कि आने वाले दिनों में सवारियां मिलने लगेंगी लेकिन 15 दिनों में सवारियां तो नहीं बढ़ी, बसों की संख्या जरूर 12 से 8 जरूर हो गई है। आने वाले दिनों में सवारियां बढ़ने की रही सही उम्मीद 22 जुलाई से जिले में लगने वाले लाॅकडाउन ने खत्म कर दी है।

90 प्रतिशत बसों की किस्तें नहीं पटा रहे हैं संचालक
90 प्रतिशत बसों की किस्तें नहीं पट पा रही हैं जिसकी वजह से फाइनेंस कंपनियां बसों को खींचकर ले जाने के लिए तैयार बैठी हैं मगर पिछले माह डीजीपी के इस आदेश ने उन्हें रोक दिया है कि किस्तें नहीं चुका पाने के कारण फाइनेंस कंपनियों ने अगर जबर्दस्ती वाहन जब्त किए तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मेंद्र वर्मा का कहना है कि बसों की किश्तें पटाने से पहले हमें सोचना पड़ रहा है कि घर कैसे चलाएं, पेट कैसे पालें, कहीं से रोजगार या आय का कोई साधन नहीं मिल रहा है। रोजगार के अभाव में बस व्यवसाय से जुड़े 500 लोगों का परिवार आर्थिक परेशानियों से घिर गया है। उन्होंने बताया इस बाबत हमने संयुक्त कलेक्टर अरविंद पांडेय से मुलाकात की थी, उन्होंने आश्वासन दिया है कि अगर आप लोगों के लायक कोई काम होगा तो दिया जाएगा।



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बस स्टैंड पर तीन माह से खड़ीं हैं बसें।


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