ब्रेक जांचने के लिए चरोदा के रेलवे इंजीनियरों ने तैयार किया ब्रेक बैंच, हर दिन हो सकेगी 48.60 लाख रु. तक की बचत , July 23, 2020 at 05:46AM

पीपी यार्ड चरोदा के इंजीनियरों ने ट्रेनों के पहियों में लगने वाले ब्रेक की जांच के लिए नया टेस्टिंग बैंच बनाया है। इससे प्रति ब्रेक सिलेंडर रेलवे को करीब 6 हजार रुपए की बचत होगी। इस तरह एक गुड्स ट्रेन के रैक में कम से कम 54 बोगियां होती हैं। हर दिन 14 से 15 रैक का मेंटेनेंस किया जाता है। इस तरह हर दिन रेलवे को कम से कम 48.60 लाख की बचत होगी। इस नए अविष्कार को रेलवे बोर्ड ने भी मंजूरी दे दी है। इसके बाद से इस बैंच से मेंटेनेंस का काम भी शुरू कर दिया गया है। लगातार प्रयोग किए जा रहे थे।

बदल दिया जाता था ब्रेक सिलेंडर, अब होगा सुधार
अभी तक सिलेंडर में समस्या आने पर उसे बदलकर नया सिलेंडर लगाया जाता था। ब्रेकयान की मेंटेनेंस के दौरान हर दिन औसतन 8 से 10 बोगी का माउंटेन ब्रेक सिलेंडर बदले जाते थे। नए सिलेंडर लगाए जाते थे। इसमें रेलवे को काफी खर्च उठाना पड़ता था। नए उपकरण के बन जाने से अब सिलेंडर का पीपी यार्ड में बने उपकरण से मेंटेनेंस किया जा सकेगा। रेलवे ने बताया कि सिलेंडर को बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसमें समय की भी काफी बचत होगी।

यार्ड में उपलब्ध संसाधनों से बनाया उपकरण
मंडल के वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर (समन्वय) एसके सेनापति एवं सीनियर डीएमई पीपी यार्ड भिलाई के दिशा निर्देशन में जेई बी जयचंद्रा ने गुड्स ट्रेनों के ब्रेक वैन में लगने वाले ब्रेक सिलेंडर की ओवरहालिंग टेस्टिंग के लिए नया बैंच बनाया है। इसकी सहायता से बोगी माउंटेन ब्रेक सिलेंडर को ब्रेक वेन में लगाया जाता है। अब इसकी ओवर हालिंग एवं टेस्टिंग बैंच पीपी यार्ड में उपलब्ध संसाधनों से की जाएगी।

एक से डेढ़ घंटे में पूरा होगा मेंटेनेंस का काम
पहले सिलेंडर बदलने में काफी समय लगता था। उसमें श्रम भी अधिक लगता था और खर्च अभी अधिक होता था। नए उपकरण का उपयोग करने से बोगी का मेंटेनेंस 60 से 90 मिनट में हो जाएगा। यह रिसर्च डिजाइन स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन मानकों के अनुसार रहेगा। यह सुरक्षा और राजस्व की बचत की दृष्टि से पहले कीतुलना में और अधिक बेहतर साबित हो रहा है। इससे रेलवे को गुड्स ट्रेनों के मेंटेनेंस करने में पहले की तुलना में अधिक सहुलियत हो रही है।



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पीपी यार्ड के इंजीनियरों ने ट्रेनों के पहिए व ब्रेक शू का सिलेंडर सुधारने देशी जुगाड़ से बनाया उपकरण। नाम दिया टेस्टिंग बैंच।


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