बिलासपुर की फैक्ट्रियों में नहीं बढ़ा पा रहे उत्पादन, 50% पर ही अटके, बाहर से माल देखने व खरीदने वाले भी नहीं आ पा रहे , August 01, 2020 at 06:44AM

सुनील शर्मा | दिल्ली, मुंबई, कोलकाता व बेंगलुरु जैसे महानगरों में लॉकडाउन होने का असर बिलासपुर की फैक्ट्रियों पर भी पड़ रहा है। तिफरा और सिरगिट्टी औद्योगिक क्षेत्र में संचालित फैक्ट्रियों में अभी भी 50 फीसदी ही उत्पादन हो रहा है। उसकी वजह यह है कि ना तो उनके पास महानगरों से मॉल के आर्डर मिल रहे हैं और ना ही वे कच्चा माल ही मंगवा पा रहे हैं। बाहर से माल देखने व खरीदने वाले भी नहीं आ पा रहे, इससे भी असर पड़ रहा है। नतीजा उन्हें 50 फीसदी उत्पादन करके ही संतोष करना पड़ा है।

तिफरा, सिरगिट्टी व सिलपहरी औद्योगिक क्षेत्र में संचालित फैक्ट्रियों में कम हुआ उत्पादन नहीं बढ़ पाया है। वे अभी आधी क्षमता से ही उत्पादन कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने वहां जाकर जब मौके का जायजा लिया तो यह बात सामने आई कि बाहर से आकर यहां काम करने वाले मजदूर अब तक नहीं लौटे हैं। यानी कोरोना की वजह से उनकी वापसी नहीं हो पाई है। वहीं मजदूरों से बातचीत करने पर यह पता चला कि पहले जिस तेजी से फैक्ट्रियों में काम होता था अब वैसी तेजी नहीं रही। पहले खूब गाड़ी आती थी और माल लेकर जाती थी लेकिन अब उनकी संख्या घटकर आधी रह गई है। फैक्ट्री इलाके में वैसी रौनक भी अब नजर नहीं दिखी जैसे कोरोना के पहले हुआ करती थी। भास्कर ने देखा कि बड़ी फैक्ट्रियों के सामने छोटे-छोटे भोजनालय सूने पड़े हैं और वहां आने-जाने वाले लोगों की संख्या भी कम है।

वाहन भी काफी काफी देर बाद वहां से गुजरते हैं। जाहिर है इन सबके पीछे वजह कोरोना वायरस की वजह से लगा लॉकडाउन ही है। पिछले 4 महीने से फैक्ट्रियां इससे प्रभावित हैं। बीच में जरूर यह लग रहा था कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद हालत में सुधार आएगा और फैक्ट्रियां अपने पूर्व गति से संचालित होंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 22 दिन बाद एक बार फिर शहर में लॉकडाउन लगा और इसका असर सीधे तौर पर फैक्ट्रियों में दिखाई दे रहा है।

मसलन शहर के बाहर से काम करने के लिए आने वाले मजदूर नहीं आ पा रहे हैं। बीच में कुछ फैक्ट्रियों में उत्पादन की क्षमता भी कुछ बढ़ गई थी लेकिन एक बार फिर 40 से 50 फीसदी ही उत्पादन फैक्ट्रियों में हो पा रहा है। बाहर से आने वाले मजदूर नहीं आ पाए हैं और स्थानीय मजदूरों से ही किसी तरह काम लिया जा रहा है। उद्योगपतियों से चर्चा में यह बात सामने आई कि वे भी अब कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन में ही जीना सीख रहे हैं। वे जानते है कि जब तक महानगरों में लॉकडाउन नहीं हटेगा, यहां उनकी फैक्ट्रियों में पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं हो सकता।

छोटी फैक्ट्रियों के लोग भयभीत-केडिया
छत्तीसगढ़ लघु एवं सहायक उद्योग संघ के अध्यक्ष हरीश केडिया कहते हैं कि सरकार ने निर्देश जारी किया है कि यदि किसी फैक्ट्री में कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलता है तो उस फैक्ट्री संचालक को अपने खर्च पर उसका इलाज कराना होगा। वहीं यह भी है कि जहां भी एक कोरोना मरीज मिल जा रहा है वहां पूरी फैक्ट्री को ही बंद कर दिया जा रहा है। इससे फैक्ट्री संचालक को तो नुकसान हो ही रहा है वहां काम कर काम करने वाले सैकड़ों मजदूर भी रोजगार से वंचित हो जा रहे हैं। इसके विकल्प के संबंध में भी सरकार को सोचना चाहिए। छोटी फैक्ट्रियों वाले थोड़े भयभीत हैं।

छोटे-बड़े 1 हजार उद्योग हैं जिले में : छोटे-छोटे उद्योग, गृह उद्योग व कारखानों को मिलाकर करीब 1000 उद्योग बिलासपुर जिले में हैं। इन सब पर कोरोना का असर हुआ है। बड़े-बड़े उद्योग धंधे वालों से लेकर महिला एवं कुटीर उद्योग वालों तक को कोरोना ने खासा नुकसान पहुंचाया है।



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Unable to increase production at factories in Bilaspur, stuck at 50%


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