कोरोना पीड़ित के अंतिम संस्कार से आए, बुलाने पर नहीं आई टीम तो लोगों ने खुद करवाया टेस्ट , July 21, 2020 at 05:56AM

अमिताभ अरुण दुबे | शहर में कोरोना विस्फोट के हालात के साथ ही अब लापरवाहियां भी हो रही है। हालात ऐसे है कि कोरोना मरीजों के परिजनों को अस्पताल जाकर खुद ही कोविड जांच करवानी पड़ रही है। यही नहीं अस्पताल में बेड नहीं होने की बात कहकर मरीजों को घर तक भिजवा दिया जा रहा है। उन्हें दूसरे दिन भर्ती करने के लिए बोला जा रहा है। राजधानी के टिकरापारा और इसके आसपास के इलाके में बीते दो हफ्ते में पांच से भी ज्यादा केस सामने आ चुके हैं, लेकिन इलाके में कंटेनमेंट जोन तक नहीं बन पाया है। कोरोना मरीज के घर से महज पांच मीटर की दूरी पर बच्चे खेलकूद रहे हैं। गली में बैरिकेड या नाकेबंदी तक नहीं है। भास्कर टीम ने राजधानी में बढ़ते मामलों के बीच जमीनी पड़ताल की तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आई।

शनिवार को बुजुर्ग पॉजिटिव मिला, रविवार देर रात भर्ती किया
चौबे कॉलोनी में शुक्रवार की देर रात की टेस्ट रिपोर्ट में 55 साल का एक रहवासी कोरोना पॉजिटिव आया। शनिवार देर शाम तक घर के सदस्यों के फोन करने के बावजूद कोई एंबुलेंस उन्हें लेने नहीं आई। ये बुजुर्ग पहले से ही बीमार थे और इलाज के लिए एम्स गए हुए थे। लेकिन उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें कोविड टेस्ट की सलाह भी दी गई। परिजनों के मुताबिक पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बावजूद उन्हें शनिवार को देर रात भी भर्ती नहीं किया गया। एम्स में फोन लगाने पर कहा गया कि वहां बेड खाली नहीं है। रविवार को देर तक उन्हें एडमिट किया गया।

पॉजिटिव मरीज की मौत, परिवार के 6 लोगों ने करवाया टेस्ट
टिकरापारा इलाके में रहने वाले 45 साल के शख्स को लीवर इंफेक्शन के कारण 14 जुलाई को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। परिजनों ने बताया कि यहां उनकी हालात को देखते हुए अंबेडकर में रिफर कर दिया। 15 जुलाई को उनका सैंपल एम्स भिजवाया। 16 को रिपोर्ट पॉजिटिव आई और इसी दिन उनकी मौत हो गई। मौत के बाद अस्पताल ने डेड बॉडी नहीं दी और रविवार 19 जुलाई को परिवार के छह सदस्यों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार करने के लिए दोपहर 12 बजे श्मशान घाट पहुंचने की सूचना दी। अंतिम संस्कार से आने के बाद परिवार के लोगों ने 104 पर सूचना दी और कहा कि सभी की जांच कर लीजिए। इस परिवार में करीब 22 लोग हैं, जांच के लिए फोन किया गया, लेकिन हेल्थ टीम नहीं आई। बाद में परिवार के 6 सदस्यों ने खुद जांच करवाने पहुंचे।

दो हफ्ते में पांच केस, एक की मौत, फिर भी कंटेनमेंट जोन नहीं
टिकरापारा इलाके में दो हफ्ते में पांच से ज्यादा कोरोना केस आए हैं। यहां पर कोरोना मरीजों के घर के सामने केवल ब्लीचिंग पाउडर की लकीरें हैं। पार्षद चंद्रपाल धनकर कहते हैं कि कोरोना मरीजों के परिवार के लोग ही नहीं जनप्रतिनिधि होने के नाते वो भी कई बार फोन कर चुके हैं, लेकिन 104 पर कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा है।

कंटेनमेंट के नियमों का पालन खुद करे लोग : कलेक्टर
कलेक्टर एस भारतीदासन ने कहा कि शहर में ढ़ाई सौ से ज्यादा कंटेनमेंट जोन बन चुके हैं। जहां मरीज बहुत ज्यादा हैं, वहां पहले फोकस करते हैं। हर जोन में तय समय पर कंटेनमेंट जोन बनें इसके लिए अब हर जगह बांस बल्ली जैसे इंतजाम पहले से रखें जाएंगे। कंटेनमेंट जोन के नियमों का पालन लोगों को खुद करना चाहिए।

"नियम के मुताबिक कोरोना पीड़ित के प्राइमरी कांटेक्ट यानी परिजनों की जांच हेल्थ विभाग की टीमें ही जाकर करती है। परिजन खुद भी जांच के लिए जा सकते हैं। लेकिन संक्रमण के खतरे के कारण ये सही तरीका नहीं है।"
- सुभाष पांडेय, कोविड मीडिया सेल प्रभारी, छग



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टिकरापारा स्थित परिवार के सदस्य।


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