पहली बार दल्हा पहाड़ पर नहीं लगेगा नागपंचमी का मशहूर मेला, कोरोना संक्रमण के खतरे को देख लिया गया फैसला , July 24, 2020 at 10:38PM

शनिवार को नागपंचमी का मेला जिले के दल्हा पहाड़ में नहीं लगेगा। नगर पालिका अकलतरा से 10 किमी दूरी पर स्थित है दल्हा पहाड़। मेले को कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए रद्द किया गया है। जिले के कई हिस्सों में लॉकडाउन लागू किया गया है। स्थानीय लोगों में इस पहाड़ पर लगने वाले मेले को रद्द किए जाने को लेकर एक उदासी है। उन्हें हर साल यहां बड़े पैमाने पर रोजगार का मौका मिलता था। क्योंकि हजारों की तादाद में लोग यहां आते रहे हैं।


दल्हा पहाड़ इसलिए है खास
इसे सिंदुरगिरि पहाड़ भी कहा जाता है। नागपंचमी के दिन दल्हा पर्वत पर नाग के दर्शन का पौराणिक महत्व है। सिद्ध मुनि आश्रम में शिवलिंग के बगल में नाग देवता की प्रतिमा स्थापित की गई है। सिद्ध मुनि आश्रम में स्थित सूर्य कुंड में दल्हा पहाड़ का पानी वर्ष भर बहता है। पानी पहाड़ की जड़ी बुटियों के बीच से आता है, इसलिए इसे औषधियुक्त पानी माना जाता है। ग्रामीणों के अनुसार 1952 में स्वामी जगदेवानंद ने दल्हा पर्वत के मुनि आश्रम में आकर तीन वर्षों तक लगातार यज्ञ किया। 1983 में स्वामी समाधि में लीन हो गए। इसके बाद से ही मेला लगता आ रहा है।



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तस्वीर दल्हा पहाड़ की है। इसके ऊपरी हिस्से में प्राचीन मंदिर है। इस पहाड़ में कई तरह की जड़ी बूटियां मिलती हैं। इस नजारे के कैमरें में कैद किया दीपक राठौर ने।


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