मनरेगा में महिलाओं की हिस्सेदारी आधी से ज्यादा, यह पिछले चार वर्षों में सर्वाधिक , July 28, 2020 at 06:00AM

छत्तीसगढ़ में मनरेगा कार्यों में आधी आबादी यानि महिलाओं की भागीदारी आधी से ज्यादा है। चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 के बीते चार महीनों में यहां 24 लाख 28 हजार 234 महिलाओं को काम मिला है। प्रदेश में इस दौरान सृजित कुल नौ करोड़ 17 लाख 87 हजार मानव दिवस रोजगार में महिलाओं की हिस्सेदारी चार करोड़ 65 लाख 85 हजार है। मनरेगा कार्यों में इस साल अब तक महिलाओं की भागीदारी 50.75 फीसदी रही है जो पिछले चार वर्षों में सर्वाधिक है जबकि अभी चालू वित्तीय वर्ष के चार महीने भी पूरे नहीं हुए हैं। छत्तीसगढ़ में इस साल विभिन्न मनरेगा कार्यों के अंतर्गत कुल 48 लाख 14 हजार 330 मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इनमें 24 लाख 28 हजार 234 महिला श्रमिक शामिल हैं। मनरेगा कार्यों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2016-17 में इसमें महिलाओं की भागीदारी 49.31 प्रतिशत, 2017-18 में 49.71 प्रतिशत, 2018-19 में 50.05 प्रतिशत, 2019-20 में 50.70 प्रतिशत और चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 50.75 प्रतिशत रही है। महिलाओं की सर्वाधिक हिस्सेदारी इस साल शुरूआती चार महीनों में ही हासिल कर ली गई है। मनरेगा महिलाओं के लिए भी रोजगार का बड़ा और सुलभ साधन साबित हो रहा है। प्रदेश में महिलाओं को रोजगार देने में दुर्ग जिला अव्वल है। मनरेगा कार्यों में इस साल वहां महिलाओं की भागीदारी 64 प्रतिशत है। बालोद में 62 प्रतिशत, राजनांदगांव में 59 प्रतिशत, रायपुर में 54 प्रतिशत, बस्तर में 52 प्रतिशत तथा बिलासपुर, धमतरी, कोंडागांव और नारायणपुर में 51-51 प्रतिशत है।

पीएम आवास निर्माण समेत कई काम कर रहीं महिलाएं
ये महिलाएं पीएम आवास निर्माण में श्रम, बकरी आश्रय, मुर्गी आश्रय, मवेशियों के लिए पक्का फर्श, कोटना निर्माण, भूमि समतलीकरण, कूप निर्माण और निजी डबरी निर्माण इत्यादि शामिल हैं। महिलाएं कृषि, उद्यानिकी, मछलीपालन, बकरीपालन एवं मुर्गीपालन जैसे कार्यों के जरिए अपनी आजीविका संवर्धित कर रही हैं। मनरेगा प्रावधानों के मुताबिक रोजगार प्रदाय में एक-तिहाई महिलाओं का होना अनिवार्य है। दिव्यांग और अकेली महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है।



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More than half of the share of women in MGNREGA, the highest in the last four years


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