रोक के बाद भी 20 हजार शिक्षकों की सर्वे में ड्यूटी लगाई, ऐसे काम कर रहे जो ट्रेंड स्वास्थ्य कर्मचारी ही कर सकते हैं , September 01, 2020 at 06:35AM

प्रदेश में जान जोखिम में डालकर घर-घर जाकर कोरोना की जांच में लगे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है। पूरे प्रदेश में 20 हजार शिक्षकों को झोंक दिया गया है। विभागीय और कोविड सर्वे, दो-दो जगह ड्यूटी लगने से वे परेशान हैं क्योंकि एक जगह काम करने पर दूसरी जगह अनुपस्थित बताकर कार्रवाई की जा रही है। जबकि प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला के 8 अगस्त के आदेश के अनुसार उन्हें गैर शिक्षकीय कामों से मुक्त किया जाना चाहिए। अब उन्होंने न सिर्फ सुरक्षा किट की मांग रख दी है बल्कि 50 लाख तक स्वास्थ्य बीमा कराने सरकार से कहा है।
रायपुर समेत सभी जिलों में कोरोना की ड्यूटी में तीन महीने से शिक्षक लगे हैं। अब वे चाहते हैं कि उनकी जगह दूसरे शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाए जो अब तक छुट्टियों पर हैं या कोई न कोई कारण बताकर बचते रहे हैं। इनमें ऐसे रसूखदार शिक्षक शामिल हैं जो राजनीतिक या ब्यूरोक्रेसी से जुड़े लोगों से संबंध रखते हैं। ऐसे मामलों को लेकर कलेक्टरों से मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे जब ऑनलाइन पढ़ाई, एडमिशन, अंकसूचियां बांटने का काम करते हैं तो उसी दौरान कोविड-सर्वे की ड्यूटी लगा दी जाती है। वहां जाने पर स्कूल में अनुपस्थित और स्कूल में काम करने पर कोविड सर्वे में गैरहाजिर बताकर शोकाज नोटिस थमाया जा रहा है। पिछले दिनों जिले में ही डेढ़ दर्जन को नोटिस दी जा चुकी है। निगम कमिश्नर भी शिक्षकों को धमका रहे हैं।
ये काम स्वास्थ्यकर्मियों के : शिक्षक ऐसे काम कर रहे हैं जो ट्रेंड स्वास्थ्य कर्मचारी ही कर सकते हैं। इनमें पल्स रेट जानने और ऑक्सीजन लेवल का काम भी शामिल है। यहां तक की सैंपल लेने के भी निर्देश हैं। आईएलआर के तहत कफ, बुखार, सांस लेने में तकलीफ, सूंघने व स्वाद में तकलीफ जैसे लक्षण पता करके फार्म में भरना है।

डीईओ ने भी कहा घर-घर जाएं
इधर, डीईओ जीआर चंद्राकर ने शिक्षकों को पहली से ग्यारहवीं तक के प्रवेश,यूनीफार्म, साइकिल और मुफ्त किताबें बांटने, मध्यान्ह भोजन व अन्य व्यवस्थाओं के लिए स्कूलों में हाजिर रहने का आदेश दिया है। डीईओ ने उनको एमडीएम, टीसी, किताब व साइकिल वितरण के लिए घर-घर जाकर विद्यार्थियों के माता-पिता, पालकों को स्कूल में बुलाकर जनप्रतिनिधियों, पंच, सरपंच, पार्षदों, एसएमसी-एसएम की मौजूदगी में पंजी संधारण करने को कहा है। इससे कोरोना की ड्यूटी में लगे शिक्षक असमंजस में हैं।

दो हफ्ते में आठ मौत : ठाकुर
शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष ओंकार सिंह ठाकुर ने दावा किया कि दो हफ्ते में आठ शिक्षकों की कोरोना ड्यूटी की वजह से मौत हो चुकी है। इनमें बलरामपुर के सियाराम भगत समेत कई शिक्षक शामिल हैं। क्वारेंटाइन सेंटर में भी शिक्षक की ड्यूटी के दौरान मौत हुई है।



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