रायपुर के जैतूसाव मठ में आज टूटेगी 200 साल पुरानी परंपरा; इस बार नहीं बने माल पुए, ना होगा भंडारा , August 12, 2020 at 09:52AM

कोरोना संक्रमण का असर इस बार त्योहारों पर भी पड़ा है। पहले सावन, महाशिवरात्रि, फिर बकरीद, रक्षाबंधन और तीज। इसके बाद बुधवार को अब श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भी धूमधाम से नहीं होगा। इसके चलते छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित जैतूसाव मठ में 200 साल पुरानी परंपरा टूटेगी। इस बार मंदिर में किसी भी तरह का भव्य आयोजन नहीं होगा।

भगवान श्रीकृष्ण को दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से स्नान कराया जाएगा। पंचामृत, इत्र, चंदन से भी अभिषेक होगा। इसके बाद भगवान को नए वस्त्र और आभूषण पहनाए जाएंगे। गोपाल सहस्त्र नाम पाठ होगा।

दो दिन पहले ही बनने लगते थे माल पुए
पुरानी बस्ती क्षेत्र स्थित जैतुसाव मंदिर में अंग्रेजों के समय से माल पुए बनते आ रहे हैं। इन्हें जन्माष्टमी पर दो दिन पहले से ही बनाना शुरू कर दिया जाता था, लेकिन इस बार रोक लगाई गई है। मंदिर प्रबंधन का प्रयास है, कम से कम लोग एक दूसरे के संपर्क में आएं। हालांकि मंदिर के अंदर भगवान कृष्ण का अभिषेक और विशेष पूजा में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इस तरह से होगी इस बार पूजा
मठ के ट्रस्टी अजय तिवारी ने दैनिक भास्कर को बताया कि बुधवार रात भगवान श्रीकृष्ण को दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से स्नान कराया जाएगा। पंचामृत, इत्र, चंदन से भी अभिषेक होगा। इसके बाद भगवान को नए वस्त्र और आभूषण पहनाए जाएंगे। गोपाल सहस्त्र नाम पाठ होगा। दूसरे दिन गुरुवार को दोपहर 12.30 बजे महाआरती की जाएगी।

पुरानी बस्ती क्षेत्र स्थित जैतुसाव मंदिर में अंग्रेजों के समय से माल पुए बनते आ रहे हैं। इन्हें जन्माष्टमी पर दो दिन पहले से ही बनाना शुरू कर दिया जाता था, लेकिन इस बार रोक लगाई गई है। मंदिर प्रबंधन का प्रयास है, कम से कम लोग एक दूसरे के संपर्क में आएं।

आमजन को नहीं मिलेगा प्रसाद
भगवान को कई तरह की मिठाइयों का भोग लगाया जाएगा। रस्म अदायगी के लिए सिर्फ भगवान को ही 21 माल पूए चढ़ाए जाएंगे। इस बार आम लोगों को प्रसाद नहीं मिलेगा। मंदिर में 5 से 10 लोगों को ही एक बार में प्रवेश की अनुमति होगी। 6 दिन बाद छट्ठी की पूजा होगी। अजय तिवारी के मुताबिक भगवान की छट्ठी मनाने वाला मंदिर जैतूसाव प्रदेश में अकेला है।

दूध, बादाम, काजू से देशी घी में बनते हैं मालपुए
जब मंदिर बना तो मालपुआ विशेष व्यंजन के तौर पर यहां जन्माष्टमी पर बनाया जाने लगा। पहले अंग्रेज अफसर भी यहां प्रसाद लिया करते थे। दूध, बादाम और काजू को मिलाकर 11 क्विंटल के मालपुए बनाए जाते हैं। शुद्ध देशी घी में बनने वाले यह पुए करीब 5000 लोगों को प्रसाद में बंटते रहे हैं। आस-पास 300 से 400 परिवारों में भी इन्हें भेजा जाता रहा है।

मठ के ट्रस्टी अजय तिवारी ने दैनिक भास्कर को बताया कि भगवान को कई तरह की मिठाइयों का भोग लगाया जाएगा। रस्म अदायगी के लिए सिर्फ भगवान को ही 21 माल पूए चढ़ाए जाएंगे। इस बार आम लोगों को प्रसाद नहीं मिलेगा।

दूधाधारी मठ में 4 दिनों का उत्सव, सोने से सजाई जाएगी मूर्ति
जैतूसाव मठ से कुछ दूरी पर 500 साल पुराना दूधाधारी मठ है। यहां भी आज रात बालाजी भगवान की आरती की जाएगी। इसके बाद मुख्य मंदिर में भगवान का विशेष स्वर्ण श्रृंगार होगा। जन्माष्टमी और रामनवमी पर भगवान की मूर्ति को सिर से पांव तक सोने से सजाया जाता है। आम लोगों के दर्शन के लिए श्रृंगार चार दिन रहेगा। यहां भी प्रसाद नहीं बांटा जाएगा।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
कोरोना संक्रमण का असर इस बार त्योहारों पर भी पड़ा है। इसके चलते छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित जैतूसाव मठ में 200 साल पुरानी परंपरा टूटेगी। इस बार मंदिर में किसी भी तरह का भव्य आयोजन नहीं होगा। 


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/33LXGoW

0 komentar