आजादी के 74 बरस बाद अब अंतागढ़ पहुंचेगी रेलगाड़ी, आसपास 20 किमी दायरे के दर्जनभर गांवों में चर्चा सिर्फ ट्रेन की , August 15, 2020 at 06:02AM

अंतागढ़ से लौटकर निकष परमार और अमनेश दुबे। घने जंगलों के बीच धुर नक्सल इलाके अंतागढ़ के लिए इस बार आजादी का जश्न कुछ खास होगा, क्योंकि इस जश्न में पहली बार ट्रेन भी रहेगी जो आजादी के 74 बरस बाद पहली बार यहां तक पहुंची है। इलाके के बहुत से लोगों ने कभी ट्रेन नहीं देखी है, और कुछ ने सिर्फ इसले देखा है। सभी उत्साहित हैं कि अब जीवन बदलेगा। ट्रेन से लोग आएंगे, दुकानें खुलेंगी, ऑटो चलेंगे, रेलवे में नौकरी भी मिलेगी। हालत ये है कि सिर्फ अंतागढ़ ही नहीं, आसपास 20 किमी दायरे के गांवों में रेलगाड़ी की चर्चा है। गांववाले यह भी मानते हैं कि अब इलाके के 20 हजार लोगों को बड़ी राहत मिलना शुरू होगी।
रावघाट से लौह अयस्क ले जाने के लिए बिछाई जाने वाली रेललाइन भानुप्रतापपुर में केंवटी तो पहुंच चुकी है। अब इसे अंतागढ़ तक बढ़ाया गया है। ट्रेन का ट्रायल हो चुका है और स्थिति सामान्य होने के बाद ट्रेन चलाई जाने वाली है। अंतागढ़ और आसपास सबसे ज्यादा चर्चा इस ट्रेन की है। भास्कर टीम से अंतागढ व्यापारी संघ के सक्रिय सदस्य हार्डवेयर व्यवसायी आशीष ठक्कर ने कहा कि ट्रेन से इलाके की तस्वीर ही बदल जाएगी। सबसे आसानी होगी इलाज में, क्योंकि मरीज को दुर्ग या रायपुर ले जाना सुरक्षित, आसान और सस्ता हो जायेगा।

किराए की एसयूवी, 5-6 हजार रुपए का खर्च और 12 घंटे में जो काम होता था, वह 35 रुपए के खर्च और सिर्फ 2 घंटे में हो जाएगा। ट्रेन की वजह से लोडिंग-अनलोडिंग शुरू होगी, गाड़ियां चलेंगी, दुकानें खुलेंगी तो रोजगार भी मिलेगा।
सीआरपीएफ में सेवा दे चुके किराना व्यवसायी मनीष कुमार टेकाम जम्मू-कश्मीर में तैनात रहे हैं। उन्हें रेल यात्राओं का अनुभव है लेकिन अपने शहर में ट्रेन के आने के ख्याल से वे खासे रोमांचित हैं कहते है आसपास के कई गांवों के बच्चो ने अभी दुनिया देखी नहीं है। ट्रेन उनके लिए बाहरी दुनिया के दरवाजे खोलेगी। रायपुर व दुर्ग अभी भानुप्रतापपुर होते हुए जाना पड़ा है। अब सीधे जा सकेंगे वो भी कम किराये में। गौरतलब है, 30 जुलाई को जब ट्रेन का इंजन ट्रायल के लिए पहली बार अंतागढ़ पहुंचा था तो इसे देखने के लिए भीड़ लग गई थी और लोगों ने मिठाइयां तक बांटी थीं।

ग्राउंड रिपोर्ट - पहली बार ट्रेन पहुंचने पर कैसी उत्सुकता है
किताबों में ही देखी, अब इंतजार असली ट्रेन का :
अंतागढ़ में ट्रेन पहुंचने की खुशी सबको है, लेकिन दसवीं की परीक्षा दे चुकी निर्मला दुग्गा का उत्साह अलग है। निर्मला अब से कुछ दिन पहले ट्रेन को अपनी किताबों में ही देखी थी लेकिन अब उसे अपने गांव कुहचे के पास ट्रेन आने और इस पर सवार होकर रायपुर आने की खुशी है। निर्मला ने यह भी बताया कि अब वह अपनी पढ़ाई आगे कॉलेज में भी करने की इच्छा रखती है। वह कोशिश करेगी कि रायपुर या अन्य शहर में वह अपनी पढ़ाई पूरी करें।

तीनों सहेलियां साथ सफर करेंगी: स्कूल में पढ़ाई कर रही तीन सहेलियां रूपिका, नीतू और सीमा एक साथ ट्रेन में सफर करेंगी। स्कूल से आने के बाद तीनों अपने परिजनों के साथ खेतों में काम करती हैं। अंतागढ़ में नए स्टेशन को स्कूल से आते-रोज ही देखती हैं। अब इनकी इच्छा है कि जल्द से ट्रेन यहां पहुंचे और वे तीनों इससे कहीं घूमने जा सकें। इन बच्चियों ने भी अभी तक ट्रेन का सफर तो दूर, इसे देखा तक नहीं है।

जल्द शुरू होगी ट्रेन
"अंतागढ़ तक यात्री ट्रेन जल्द ही शुरू होगी यह मेन लाइन से जुड़ जाएगी। इस सुविधा से उस इलाके के आम लोगों के साथ व्यापारी वर्ग को भी बड़ा फायदा होगा।"
-श्याम सुंदर गुप्ता, डीआरएम रायपुर मंडल



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आजादी के 74 साल बाद अंतागढ़ तक पहुंचेगी ट्रेन।


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