आयुष ने इंटरव्यू में जवाब दिया था- परीक्षा में 99 रैंक आए तो उसे 100 से बड़ा मानेंगे , August 05, 2020 at 05:08AM

बेहतर तैयारी के लिए देखे 300 से ज्यादा वीडियो पिछले सालों के क्वेश्चन पेपर भी किए सॉल्व - उमेश गुप्ता, रैंक 162

मूलरूप से सूरजपुर के रहने वाले उमेश रायपुर में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। पांचवें प्रयास में 162वीं रैंक हासिल करने वाले 28 साल के उमेश रोज नालंदा परिसर में आठ घंटे बैठकर पढ़ाई करते थे। आईआईटी से इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग करने वाले उमेश पहले भी यूपीएससी क्रैक कर आईआरएस बन चुके हैं। आईएएस बनने का सपना पूरा करने के मकसद से उन्होंने फिर से ये एग्जाम दिया। उन्होंने बताया, मेरा छोटा भाई एनआईटी रायपुर में पढ़ाई करता है। उसी ने नालंदा लाइब्रेरी के बारे में बताया। मैंने लगभग दो महीने नालंदा में बैठकर पढ़ाई की। पढ़ाई में इंटरनेट की मदद भी ली। पिछले सालों के टॉपर्स और स्टडी मटेरियल के 300 से ज्यादा वीडियो देखे होंगे। पिछले सालों के पेपर भी सॉल्व किए। इंटरव्यू में यूरोपियन कंट्रीज में चल रहे वामपंथी आंदोलन से जुड़े सवाल ज्यादा पूछे गए। स्ट्रेस फ्री रहने के लिए उमेश गाने सुनते थे। रोज 15 मिनट मेडिटेशन भी करते थे। उनके पिता रामसेवक गुप्ता कोल माइंस में पंप ऑपरेटर हैं। वहीं, मां शिवमोहरी गुप्ता हाउस वाइफ हैं।

दूसरे प्रयास में मिली सफलता, स्वयंप्रभा और ई-पीजी पाठशाला पोर्टल की मदद से की तैयारी - आयुष खरे, रैंक 267

प्रोफेसर कॉलोनी में रहने वाले 23 साल के आयुष खरे ने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की है। एनआईटी से मैटलर्जी में बीटेक करने वाले आयुष ने बताया, बीटेक थर्ड ईयर से यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। पहले प्रयास में 2018 में ढाई नंबर से प्री क्लीयर करने से चूक गया। कमियां पहचानीं और फिर जुट गया तैयारी में। डाउट्स क्लीयर करने इंटरनेट की मदद ली। स्वयं प्रभा पोर्टल और ई पीजी पाठशाला जैसे पोर्टल की मदद से पढ़ाई की। इंटरव्यू में मुझसे पूछा गया कि 99 नंबर बड़ा अंक होता है या 100 मैंने जवाब दिया- 100, फिर उन्होंने कहा कि इसे लाइफ से रिलेट करके समझाओ, तब मैंने इसे यूपीएससी जैसे एग्जाम से जोड़कर जवाब दिया कि एग्जाम में 99 रैंक आए तो उसे 100 से बड़ा मानेंगे। इस जवाब से इंटरव्यूअर संतुष्ट नजर आए। आयुष के पिता डॉ. अनिल कुमार, प्रिंसिपल हैं। मां डॉ अर्चना, कामधेनू विवि में एचओडी हैं।

पहले क्रैक कर चुके हैं UPSC इसलिए रिवीजन पर किया फोकस, दोस्तों के साथ किया ग्रुप डिस्कशन - याेगेश पटेल, रैंक 434
मूलरूप से महासमुंद, पिथौरा के रहने वाले याेगेश वर्तमान में चंद्रखुरी की पुलिस ट्रेनिंग एकेडमी में ट्रेनिंग ले रहे हैं। याेगेश पिछले साल भी यूपीएससी क्रैक करने में कामयाब रहे थे। वर्तमान में वे आईपीएस हैं। आईएएस बनने का सपना सच करने के लिए उन्होंने दोबारा एग्जाम दिया। उन्होंने बताया, पिता हरि कृष्ण पटेल लेक्चरर हैं। बचपन से ही घर में पढ़ाई का माहौल मिला। मेरा मानना है कि कभी नहीं होगा के बजाए कभी तो सलेक्शन होगा... वाली सोच के साथ कैंडिडेट्स को यूपीएससी की तैयारी में जुट जाना चाहिए। मैंने पढ़ाई का मटेरियल कम से कम रखा। ज्यादा चीजें पढ़ने से कंफ्यूजन होता है। पिछले साल ये एग्जाम क्रैक कर चुका था, इसलिए रिवीजन पर फोकस किया। पिछले सालों में पूछे जा चुके सवालों की प्रैक्टिस भी की। कुछ टॉपिक्स पर दोस्तों के साथ ग्रुप डिस्कशन भी करता था। इंटरव्यू में मुझसे छत्तीसगढ़ की कोयला खरीदी इसके आर्थिक पहलू और नक्सलवाद की समस्या से जुड़े सवाल पूछे गए।



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याेगेश पटेल, रैंक 434 ।


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