बहन ने कहा - राखी तभी बांधूंगी जब वो सरेंडर करेगा; नक्सली ने मानी बात, फिर बहन ने थाने में ही बांधी राखी , August 02, 2020 at 06:06AM

22 साल के मल्ला की नक्सलवाद की ज़िंदगी को उसकी बहन लिंगे ने खत्म कर दिया। 12 साल पहले मल्ला का चाचा उसे अपने साथ ले गया था। तब वह सिर्फ 10 साल का था। उसके हाथों में उसने हथियार थमा दिए। अब जब वह राखी मनाने के लिए घर लौटा तो बहन ने कहा कि राखी तब बांधूंगी, जब वो सरेंडर करेगा। काफी सोचने के बाद मल्ला ने सरेंडर कर दिया और उसके सरेंडर करने के बाद लिंगे ने अपने भाई मल्ला को थाने में ही राखी बांधी। बहन को तोहफे में नक्सलवाद से अलगाव चाहिए था।पिछले 12 साल से मल्ला पुलिस से छिपते-छिपाते घूम रहा है। हर समय उसके एनकाउंटर का डर लिंगे को सताता रहता था। वो चाहती थी कि इस दहशत से उसके भाई को और घरवालों को मुक्ति मिल जाए। इस बार जब मल्ला घर पहुंचा, तो बहन ने जिद पकड़ ली कि सरेंडर कर दे, नहीं तो राखी नहीं बांधंूगी। आखिरकार मल्ला हार गया। उसने उसे पुलिस के सामने सरेंडर करवाया। इस समय सीआरपीएफ डीआईजी विनय कुमार सिंह, एसपी डॉ अभिषेक पल्लव, सीआरपीएफ 111 बटालियन के कमांडेंट अंब्रेश कुमार, एएसपी राजेंद्र जायसवाल सहित अन्य अफसर मौजूद थे। इन्हीं अफसरों के सामने उसने अपने भाई को राखी बांधी, भाई की आरती उतारी, उसे मिठाई खिलाई और लंबी उम्र की कामना की।
इन दिनों पुलिस भी लोन वर्राटू के नाम से अभियान चला रही है, जिसमें भटके हुए नक्सलियों को वापस मुख्यधारा में लाया जा सके। मल्ला कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है, प्लाटून 13 का डिप्टी कमांडर व 8 लाख का इनामी है।

सरेंडर इनामी नक्सली भाई ने बहन से की अपील- बहन लौट आओ
एक तरफ लिंग ने अपने भाई मल्ला को सरेंडर करवा दिया, तो दूसरी तरफ सरेंडर कर चुके नक्सली अपनी बहन से अपील कर रहे हैं, कि वो भी लौट आए। मार्च में सुकमा पुलिस के सामने सरेंडर करने वाले बादल ने कहा कि मेरी इकलौती बहन जोगी कड़तामी एसीएम है। नक्सल लीडर देवा के साथ काम कर रही है। उसे कहूंगा कि मैंने सरेंडर किया है। रक्षाबंधन के समय मुख्यधारा में आकर वो भी शामिल हो जाए। मिल जुलकर काम करेंगे। 2014 को संगठन में गई थी। अब तक नहीं लौटी है। बहन मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता। मैं मुख्यधारा में लौटा हूँ। तुम भी लौट आओ, मिलकर राखी का त्यौहार मनाएंगे।

दशमी की भाई से अपील- छोड़ दो नक्सलवाद का रास्ता
5 लाख की इनामी नक्सली दशमी ने करीब 20 दिन पहले जगदलपुर में सरेंडर किया था। उसने भी अपने भाई से अपील की है कि वो सरेंडर कर दे। दशमी ने कहा कि शादी के 6 महीने बाद पति वर्गीस एनकाउंटर में मारे गए। अब भाई को नहीं खोना चाहती। भाई लक्ष्मण माचकोट में कमांडर है। मैं 2011 जबकि भाई 2016 में नक्सल संगठन में शामिल हुआ था।



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सरेंडर के बाद थाने में ही भाई को राखी बांधती लिंगे।


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