फेल फेफड़ों के सपोर्ट के लिए एक्मो मशीन खरीदी जाएगी , August 04, 2020 at 05:54AM

कोराेना बीमारी में फेफड़े सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। प्रदेश में कोरोना से अब तक 62 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 35 से ज्यादा के फेफड़े फेल थे। ऐसे समय में एक्मो यानी इंट्रा एयोटिक बलून पंप मशीन की मदद से मरीज की जान बचाई जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार फेफड़े फेल होने पर वेंटीलेटर काम नहीं करता, इसलिए एक्मो मशीन जरूरी है। वर्तमान में प्रदेश के केवल एक बड़े निजी अस्पताल में यह मशीन है। इसलिए अब एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में इस मशीन को खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
कोरोना के गंभीर मरीजों को बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही निजी अस्पतालों में आइसोलेशन बेड व वेंटीलेटर बढ़ाने को कहा है। वेंटीलेटर तो है, लेकिन गंभीर परिस्थितियों के लिए एक्मो मशीन भी चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना के अलावा निमोनिया के दौरान दोनों फेफड़े सफेद हो जाते हैं। इसके कारण फेफड़े ब्लड में ऑक्सीजन मिक्स नहीं कर पाते, जबकि फेफड़ों का मूल काम यही है। फेफड़े का कुछ हिस्सा जब काम कर रहा होता है, ऐसे समय में मरीज को वेंटीलेटर का सपोर्ट दिया जाता है। पूरा खराब होने पर एक्मो ही एक विकल्प होता है। डॉक्टरों के अनुसार एक्मो में किसी मरीज को सपोर्ट में रखने पर उनकी जान बचाई जा सकती है। भास्कर ने जब इस मशीन के बारे में पड़ताल की तो पता चला कि इसकी कीमत 60 से 65 लाख रुपए है। इसे चलाने के लिए कार्डियो थोरेसिक एंड वेस्कुलर सर्जन व परफ्यूजिनिस्ट की जरूरत होती है। इस मशीन से शरीर की बड़ी नसों में कैनुला यानी नली डालकर ऑक्सीजनयुक्त ब्लड पहुंचाया जाता है। इससे मरीज की जान बचाने में मदद मिलती है।

महीनेभर में आएगी मशीन
एसीआई में एक्मो मशीन के लिए टेंडर निकल गया है। यह मशीन एक से दो माह में एसीआई में पहुंचने की संभावना है। इसे कार्डियक सर्जरी यूनिट में लगाई जाएगी। फेफड़े फेल वाले केस में इस मशीन का उपयोग किया जाएगा। सीजीएमएससी के अधिकारियों का कहना है कि एसीआई के डॉक्टरों की मांग पर यह खरीदी जा रही है।



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