संतान की लंबी आयु के लिए आज महिलाएं रखेंगी व्रत, मिट्टी के भगवान की होगी पूजा , August 09, 2020 at 06:06AM

प्रदेश की पारंपरिक कमरछठ पूजा रविवार को होगी। इस दिन सभी महिलाएं अपनी संतान की समृद्धि और उनकी लंबी उम्र के लिए व्रत रखेंगी। महामाया मंदिर के पुजारी पं. मनोज शुक्ला ने बताया कि इसे हलषष्ठी हलछठ, कमरछठ या खमरछठ नाम से भी जानी जाती है। इस दिन महिलाएं सुबह से महुआ पेड़ की डाली का दातून कर व्रत धारण करती है।
घर के आंगन और मंदिरों में सगरी बनाकर इसमें पानी भरा जाता है। इसे बेर, पलाश, गूलर आदि पेड़ों की टहनियों और काशी के फूलों से सजाया जाता है। यह पूजा दोपहर को होती है। इसके सामने मिट्‌टी के खिलौने, शिवलिंग, गौरी-गणेश, कार्तिकेय, नंदी, हलषष्ठी माता की प्रतिमा और कलश की स्थापना कर पूजा की जाती है। इसके बाद साड़ी समेत सुहाग का सामान समर्पित किया जाता है और हलषष्ठी माता की कथाएं पढ़ी और सुनाई जाती है। भगवान शिव और हलषष्ठी माता की आरती के साथ पूजा का समापन किया जाता है। पूजा के बाद नए कपड़े के टुकड़े को सगरी के जल में डुबाकर बच्चों के कमर पर से छह बार स्पर्श किया जाता है, जिसे पोती मारना कहते हैं। वहीं लाल चावल, दही और भाजी खाकर व्रत तोड़ा जाता है।

कमरछठ पर्व का वैज्ञानिक आधार
डिग्री गर्ल्स कॉलेज की फूड व न्यूट्रिशन विभाग की प्रोफेसर डॉ. अभ्या आर जोगलेकर बताती है कि उपवास की परंपरा वैज्ञानिकता से परिपूर्ण महिला स्वास्थ्य व पोषण पर आधारित हैं। महुआ एक औषधीय गुणों से युक्त वृक्ष है। आदिवासी क्षेत्रों में इसकी बहुलता होने के कारण इसका इस्तेमाल इस पूजा में किया जाता है। शाम को उपवास तोड़ने के बाद पसहर चावल खाया जाता है। इसमें एंटी-आक्सीडेन्ट की मात्रा अधिक होती है, जिसे एंथोसाइएनिंस भी कहते है। यह शरीर में होने वाली जलन, एलर्जी, कैंसर के खतरे को कम और वजन को नियंत्रित रखने में सहायता प्रदान करता है।

यह भाजियां है पौष्टिक

  • मुनगा भाजी: इसमें प्रोटीन के साथ साथ विटामिन बी6 जैसे मिनरल हाेते हैं।
  • जरी भाजी: सबसे अधिक ग्रीन ब्लड सेल्स इस भाजी में पाया जाता है।
  • अमारी भाजी: यह पाचन क्रिया और पेट के लिए फायदेमंद है।
    कद्दू भाजी: यह बाल झड़ने की समस्या को नियंत्रित करने में उपयोगी है।
  • कांदा भाजी: चर्म रोग में लाभदायक है।
  • चेंच भाजी: इसमें 8.7% प्रोटीन और 66.04% कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है।

डॉ. महंत ने दी बधाई
प्रदेशवासियों को हलषष्ठी पर स्पीकर डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि षष्ठी, छठ माता की पूजा-अर्चना में पसहर चावल और छह प्रकार की भाजियों का भोग लगाया जाता है। मान्यता अनुसार माता देवकी के छह पुत्रों को जब कंस ने मार दिया तब पुत्र की रक्षा की कामना के लिए उन्होंने भादो कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को षष्ठी देवी की आराधना करते हुए व्रत रखा था।



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बाजार में शनिवार को खरीदारी करतीं महिलाएं।


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