सर्वाधिक कोयला उत्पादन का रिकॉर्ड एसईसीएल के नाम: पंडा , August 17, 2020 at 05:57AM

एसईसीएल कोयला उत्पादन के मामले में देशभर में पहले स्थान पर है। इतना ही नहीं इस वर्ष तो 1 दिन में सर्वाधिक उत्पादन का रिकॉर्ड एसईसीएल ने बनाया है। इस वर्ष कुछ नई खदानों के ओपन होने के साथ-साथ नई तकनीक भी उत्पादन में शामिल की जा रही है। यह बात एसईसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक एपी पंडा ने कही। वे मुख्यालय में आयोजित समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में कोविड-19 की महामारी तथा अतिवर्षा के बावजूद एसईसीएल के कर्मवीरों ने अथक प्रयास करते हुए लगातार दूसरे वर्ष भी एसईसीएल ने 150 मिलियन टन से अधिक कोयला उत्पादन किया है। विशेष तौर पर 17 मार्च 2020 को एसईसीएल ने 10,01,536 टन कोयला उत्पादन कर एक दिवसीय कोयला उत्पादन में कोल इंडिया में एक मिसाल कायम की है। उन्होंने कहा दो नई ओपनकास्ट माइन्स बिजारी एवं जगन्नाथपुर में कोयला उत्पादन प्रारंभ हुआ है। वहीं वर्ष 2023-24 तक कोलइण्डिया नेे 1-बिलियन टन कोयला उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें एसईसीएल की महती भूमिका होगी।एसईसीएल ने वर्ष 2023-24 तक खदान के विस्तार, नई खान परियोजनाओं, अवसंरचना, रेल लाइनों और साइडिंग आदि में लगभग 26 हजार करोड़ रुपए के निवेश की योजना बनाई है।
सरफेस कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट की शुरूआत
एसईसीएल की महामाया खुली खदान, भटगांव क्षेत्र में सरफेस कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट की शुरूआत की जा रही है। एसईसीएल ने ’फस्र्ट माईल कनेक्टिविटी’ की पहल करते हुए पहले चरण में 8 परियोजनाओं का काम शुरू किया है जिसकी अनुमानित लागत 3150 करोड़ रुपए होगी। एसईसीएल साइलो युक्त रेपिड लोडिंग सिस्टम वाले कोल हैंडलिंग प्लांट (सीएचपी) स्थापित करेगा, जिनमें लोड किए जाने वाले कोयले की पूर्व-तौली हुई सटीक मात्रा समेत कोयले की क्रशिंग, आकारयुक्त कोयला, बेहतर गुणवत्तायुक्त कोयला व उसकी त्वरित लोडिंग जैसे लाभ होंगे।
भविष्य में सोलर पाॅवर प्लांट लगाएंगे
भटगांव तथा बिश्रामपुर क्षेत्र में कोयला दोहन के पश्चात खाली चिन्हित भूमि के चार पैंचों पर 40 मेगावाट ग्राऊंड-माऊंटेड सोलर पाॅवर प्लांट लगाने की योजना है । इन संयंत्रों से प्राप्त सौर ऊर्जा का उपयोग ग्रिड में अधिशेष को इंजेक्ट करने के विकल्प के साथ कैप्टिव खपत के लिए किया जाएगा। इसके अलावा ग्रिड कनेक्टेड रूफ टाॅप सोलर पाॅवर प्लांट को छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश के सभी ऑपरेशनल क्षेत्रों के विभिन्न सेवा भवनों पर स्थापित करने की भी योजना है।



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