नाकेबंदी प्वाइंट के कैमरे बंद, एक-एक साल पहले लगाकर छोड़े, अब तक टेस्टिंग ही नहीं , August 18, 2020 at 05:43AM

शहर के बीचोबीच 60 प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के बाद आउटर पर खुफिया निगरानी का सिस्टम ठप हो गया। खासतौर पर नाकेबंदी के प्वाइंट को ही कैमरे की जद में नहीं लिया गया है, जबकि वारदात के बाद अपराधी भागने के लिए इन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि सर्वे के बाद 66 ऐसे प्वाइंट तय गए जहां कैमरे की जरूरत बतायी गई। वहां कैमरे लगाने की प्रक्रिया शुरू भी की गई, लेकिन पूरी कवायद कैमरे का सिस्टम लगाने तक ही सीमित रह गयी। कहीं बिजली का कनेक्शन नहीं लगाया गया तो कहीं टेस्टिंग के नाम पर इसे चालू नहीं किया गया।
स्मार्ट सिटी ने कैमरा लगाने के लिए दूसरे फेस में जिन महत्वपूर्ण चौराहों का चयन किया है, उसमें कबीरनगर, गोलचौक, सरोना चौक, महादेवघाट पुल, खम्हारडीह चौराहा और डब्लूआरएस व भनपुरी का बेहद व्यस्त चौक शामिल है। इनमें से ज्यादातर इलाके चेन स्नेचिंग और लूट के लिए काफी पहले चिन्हिंत किए जा चुके हैं। सड़क हादसों के लिहाज से भी ये इलाके अहम हैं। कोई भी बड़ी वारदात होने पर इन्हीं इलाकों में ही चेकिंग प्वाइंट भी लगाया जाता है। क्राइम के हिसाब से संवेदनशील होने के बावजूद इन चौराहों पर कैमरे लगाने का काम पूरा नहीं किया गया। हालांकि अफसर दावा कर रहे हैं कि कहीं कहीं कैमरे लगाए जा चुके हैं, बस टेस्टिंग का काम बाकी है। इन दावों की पड़ताल करने पर पता चला कि कुछ चौराहों पर छह माह तो कहीं 3 माह पहले 66 जगह कैमरे लगाने का काम पूरा कर लिया गया, लेकिन 29 जगह अब तक टेस्टिंग के नाम पर चालू नहीं किया गया। ये भी पता चला है कि 18 चौराहों पर बिजली की सप्लाई नहीं की जा सकी है। सिर्फ 19 जगह की कैमरे शुरू हो पाए है।

260 कैमरे चालू पर सभी शहर के बीचोबीच
स्मार्ट सिटी पहले चरण में शहर के 60 चौक-चौराहों पर 260 से ज्यादा कैमरे लगा चुका है। सभी कैमरे काम कर रहे हैं और दक्ष के कंट्रोल से आने जाने वालों सहित वाहन चालकों की एक-एक गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। दूसरे चरण में शहर और आउटर के उन प्वाइंट को चिन्हित किया गया था, जहां या तो ज्यादा वारदातें होती हैं या शहर के एंट्री प्वाइंट हैं। यहीं पर कैमरे लगाने का काम पूरा नहीं हो सका।
एसएसपी ने चिप लगाने के लिए लिखी चिट्‌ठी
बंद कैमरों की जानकारी होने पर एसएसपी ने आउटर के कैमरे चालू होने के साथ ही उसमें अस्थाई चिप लगाने के लिए स्मार्ट सिटी के अफसरों को चिट्‌ठी लिखी है। उनका सुझाव है कि जब तक कंट्रोल रूम से कैमरा कनेक्ट नहीं होता तब तक अस्थाई तौर पर कैमरे की रिकॉर्डिंग उसी जगह पर की जाए। ताकि कभी भी चिप कंप्यूटर में लगाकर रिकॉर्डिंग देखी जा सके। बाद में कंट्रोल रूम के सर्वर से कैमरे कनेक्ट होने पर चिप निकालकर अलग की जा सकती है।

शहरभर में 600 कैमरे लगाने का टारगेट
आईटीएमएस के तहत शहर में ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्नाइजेशन (एएनपीआर) सिस्टम और कम्प्यूटर विजन एंड पैटर्न रिकॉग्नाइजेशन सिस्टम से लैस 600 कैमरे लगाने का लक्ष्य है। हालांकि पिछले ढाई साल में अब तक 60 कैमरे ही लगा जा सके हैं। अभी जो कैमरे लगे हैं उनकी मदद से ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों से लेकर वारदात के बाद भागने वाले अपराधियों का क्लू जुटाने में मदद ली जा रही है। सर्वर की मदद से नियम तोड़ने वाले वाहन और चालक की जानकारी आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस को भेज दी जाती है। इसके लिए इन दोनों विभागों के सर्वर को आईटीएमएस से लिंक किया गया है।
आईटीएमएस में तकनीक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वाहन चालक कैमरे को धोखा न दे सकें। सिर पर कपड़ा बांधकर टोपी लगाकर, बिना आईएसआई मार्क का हेलमेट पहनकर, आधे सिर पर हेलमेट लगाकर, हेलमेट को हाथ या गाड़ी पर टांगकर या फिर सिर मुंडाकर भागने की कोशिश करने वाला भी कैमरे की मदद से पकड़ा जाता है।



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Blockade Point cameras closed, put off one year ago, no testing yet


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