पहली बार शहर में सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं, कोरोना संकट का असर गणेश चतुर्थी पर, प्रतिमाओं की खरीदारी घटी, , August 22, 2020 at 02:49PM

रायपुर में 11 दिनों तक धूमधाम से मनाया जाने वाला एक मात्र उत्सव इस बार फीका है। शहर में बनने वाले करीब 150 पूजा पंडाल इस बार नजर नहीं आएंगे। कोरोना का असर गणेशोत्सव के बाजार के साथ इससे जुड़े आयोजनों पर पड़ा है। शनिवार को गणेश चतुर्थी के दिन सुबह से ही बाजार की आधी प्रतिमाएं बिक जाया करती थीं। मगर दोपहर तक दुकानदार ग्राहकों के इंतजार में रहे। घरों में भी हर साल आयोजन करने वाले लोग भी इस बार प्रतिमाएं कम ही स्थापित कर रहे हैं। पहला मौका है जब शहर में एक भी बड़ा गणपति पंडाल नहीं मनाया गया है।


कम बिकी प्रतिमाएं

छोटी प्रतिमाएं ही बिकी, प्रशासन 4 फिट की मुर्तियां रखने की अनुमति दी थी, मगर इस साइज की प्रतिमाएं भी बाजार में नहीं दिखीं।
छोटी प्रतिमाएं ही बिकी, प्रशासन 4 फिट की मुर्तियां रखने की अनुमति दी थी, मगर इस साइज की प्रतिमाएं भी बाजार में नहीं दिखीं।


लगभग शहर के हर घर में मनाया जाने वाले इस उत्सव में कोरोना संकट की वजह से लोगों में उत्साह कम है। सदर बाजार में प्रतिमाओं की दुकान लगाने वाले अनिल प्रजापति ने बताया कि पिछले दो दिनों में जो उम्मीद थी उससे बेहद कम प्रतिमाएं बिकीं। कीमतों पर भी असर पड़ा है बीते साल 1 हजार रुपए में बिकने वाली प्रतिमाओं को अब 600 रुपए तक बेच रहें हैं। पूरे बाजार में गणेश चतुर्थी के दिन दोपहर तक 80 प्रतिशत प्रतिमाएं बिक जाती थीं, इस बार इसी तादाद में मूर्तियां बची हुई हैं।


सोमवार से उठेगा बाजार
कॉन्फेड्रेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के अमर परवानी ने बताया कि बाजार पर असर तो है। मगर शनिवार होने की वजह से भी सेल्स प्रभावित है। संडे को मार्केट टोटल लॉकडाउन रहेगा। शनिवार को बड़ी खरीदारी लोग कम ही करते हैं। ऑटोमोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक्स की सेल वैसी नहीं है, जैसी होनी चाहिए मगर सोमवार से स्थिति सामान्य होगी। खरीदारी में इजाफा देखने को मिलेगा। सदर बाजार की काफी दुकानें जैन समाज के त्योहार की वजह से बंद हैं, यह भी खुलेंगी।


इस वजह से टूटी परंपरा

तस्वीर रायपुर के सदर बाजार की एक दुकान की है। बाजार आर्कषक प्रतिमाओं से भरा रहा, मगर लोग ही खरीदारी करने नहीं पहुंचे।
तस्वीर रायपुर के सदर बाजार की एक दुकान की है। बाजार आर्कषक प्रतिमाओं से भरा रहा, मगर लोग ही खरीदारी करने नहीं पहुंचे।


देश में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरूआत की। मराठा राजाओं की सत्ता की वजह से इसका व्यापक असर रायपुर पर भी पड़ा। नहर पारा समिति के रोहित रॉय ने बताया कि गोलबाजार, गुढ़ियारी, मालवीय रोड, सदरबाजार, बूढ़ापारा, पुरानी बस्ती इलाकों में आजादी के पहले से ही सार्वजनिक गणेश पंडाल बनाए जाते रहे हैं। इस बार इनमें से किसी भी जगह पर सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं हो रहे। प्रशासन ने कोरोना की वजह से सख्त नियम बना रखे हैं। गलियों मेंं बेहद छोटे पंडाल बनाकर कुछ जगहों पर पूजा की जाएगी


सार्वजनिक गणेशोत्सव के लिए नियम
जिला प्रशासन की तरफ से इस बार झांकी की भी अनुमति नहीं दी गई है। पंडाल में मूर्ति का साइज 4 फीट और पंडाल का साइज 15 फीट से ज्यादा नहीं, दर्शन के लिए आने वाले लोगों का भी नाम पता और मोबाइल नंबर लिखना होगा, पंडाल में सीसीटीवी लगाना होगा, सैनिटाइजर, थर्मल स्क्रीनिंग, ऑक्सीमीटर, हैंडवॉश, क्यू मैनेजमेंट की व्यवस्था, अगर पंडाल में दर्शन के लिए आया व्यक्ति संक्रमित होता है तो आयोजकों को पूरा खर्च उठाना होगा।



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तस्वीर रायपुर की है। सदर बाजार में प्रतिमा की दुकान लगाने वालों को तय रेट से कम में भी खरीददार नहीं मिल रहे।


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