जमीन संबंधी छोटे-छोटे 10 हजार मामले अटके, क्योंकि अफसर नहीं जा रहे दफ्तर , September 03, 2020 at 06:07AM

राजधानी के तहसील दफ्तर में तहसीलदार और नायब तहसीलदारों की अनुपस्थिति की वजह से छोटे-बड़े 10 हजार से ज्यादा मामले अटक गए हैं। कोरोना की वजह से जमीन मामलों की सुनवाई भी लगभग बंद कर दी गई है और 80 फीसदी मामलों में तारीख बढ़ाई गई है। इसका सबसे बड़ा असर यह हो रहा है कि जरूरत के लिए जमीनों की खरीदी-बिक्री तक बंद हो गई है। अफसरों के मुताबिक रायपुर से कहीं कम मामले अभनपुर और धरसींवा में अटके हैं।
रायपुर तहसील में जमीन के दस्तावेजों में त्रुटि सुधार हो या फिर जमीन का नामांतरण कराना हो, हर काम के लिए लोग भटक रहे हैं। बारिश का बहाना कर जमीन का सीमांकन भी नहीं किया जा रहा है। इस वजह से भी लोग परेशान हो रहे हैं।
कोरोना की वजह से लोगों को तहसील दफ्तर में भी प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। दस्तावेज साथ नहीं लाने पर उन्हें दफ्तर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। इससे लोगों का गुस्सा भी बढ़ रहा है। इसकी शिकायत कई बार तहसीलदार अमित बैक से भी की, लेकिन उन्होंने कभी भी कोई व्यवस्था नहीं बनाई। तहसील में कामकाज ठप होने की वजह से संभाग कमिश्नर जीआर चुरेन्द्र तहसीलदार पर नाराजगी भी जाहिर कर चुके हैं।
ऑनलाइन रिकार्ड में भी रायपुर पीछे
जमीनों के दस्तावेजों को ऑनलाइन करने में भी रायपुर के अफसर पीछे रह गए हैं। नक्सल प्रभावित जिलों में दस्तावेजों को ऑनलाइन करने का काम 90 फीसदी पूरा हो गया है, लेकिन रायपुर में यह काम अभी भी 70 फीसदी से ज्यादा नहीं हो पाया है। जमीनों के रिकार्ड ऑनलाइन नहीं होने की वजह से लोगों को जमीन की जानकारियों के लिए अभी भी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। जमीनों के रिकार्ड ऑनलाइन दर्ज हो जाते तो लोगों को घर बैठे एक क्लिक में ही जमीन संबंधित जानकारी मिल जाती।



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