12 से गुरु हो गए हैं मार्गी, 29 से शनि होंगे मार्गी , September 17, 2020 at 05:22AM

गुरु ग्रह 12 सितंबर से मार्गी हो गए हैं, जबकि शनि 29 सितंबर को मार्गी हो जाएंगे। करीब 18 महीनों के बाद छाया ग्रह राहु-केतु अपनी राशि बदलने वाले हैं। 23 सितंबर को राहु वृषभ राशि में और केतु वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे।
ज्योतिष में शनि के बाद राहु-केतु ही ऐसे ग्रह हैं, जो एक राशि में 18 महीनों तक रहते हैं। ज्योतिषी पं. राघवेंद्र पांडेय के अनुसार राहु राजनीति का कारक ग्रह है, इसलिए राशि परिवर्तन का असर भारत की राजनीति में भी होगा। देश और प्रदेश की सियासत में बड़ा फेरबदल हो सकता है। राहु ग्रह हमेशा वक्री चाल से चलते हैं यानी इनकी चाल पीछे की होती है। जैसे राहु मिथुन से वृषभ राशि में वक्री होकर अगले 18 महीनों तक इसी राशि में भ्रमण करेंगे। राहु का वृषभ राशि में प्रवेश में हो रहा है और केतु का वृश्चिक राशि में। वृषभ राशि के स्वामी शुक्र हैं और यह राहु के साथ मित्रवत व्यवहार रखते हैं।

राहु और केतु के राशि बदलने का विभिन्न राशियों पर क्या होगा असर

  • मेष: मानसिक उलझनें, लेकिन आकस्मिक धन लाभ तथा पारिवारिक कष्ट रहेगा।
  • वृषभ: दैनिक कामकाज में उदासीनता, लेकिन राजनैतिक व्यक्तियों को पूरा लाभ मिलेगा।
  • मिथुन: नई यात्रा का योग बनेगा, व्यापार में अनुकूलता रहेगी।
  • कर्क: व्यापार में लाभ मिलेगा, मान सम्मान से मनोबल बढ़ेगा।
  • सिंह: सामाजिक, राजनैतिक, लाभ उन्नति से आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी।
  • कन्या: अचानक धन लाभ, सफलता, राजनैतिक लोगों को विशेष सफलता मिलेगी।
  • तुला: समस्याओं की जटिलता रहेगी, किसी बड़ी जोखिम उठाने से बचें।
  • वृश्चिक: व्यापार में सफलता, राज्य से लाभ मित्रों से सहयोग मिलेगा। लेकिन दैनिक जीवन में बाधाएं रहेंगी।
  • धनु: शारीरिक क्षमता बढ़ेगी। व्यापार में बढ़ोतरी होगी, मुकदमा आदि में विजय मिलेगी।
  • मकर: धन में वृद्धि, महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता, धन प्राप्ति के योग ।
  • कुंभ: कार्यों में अस्थिरता, घरेलू अशांति, स्थान परिवर्तन के योग हैं।
  • मीन: आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी, मित्रों से लाभ सफलता उन्नति मिलेगी।

राहु और राहुकाल
ज्योतिषी पं. राघवेंद्र पांडेय के अनुसार राहु को एक अशुभ ग्रह कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार पूरे दिन में एक समय ऐसा आता है जब राहु का प्रभाव सबसे ज्यादा होता है। ज्योतिष में इस समयावधि को अशुभ समय माना जाता है। इस अशुभ समय में किसी भी तरह का शुभ कार्य का शुभारंभ नहीं किया जाता है। इसे ही राहुकाल कहते हैं। इस राहुकाल का समय लगभग डेढ़ घंटे का होता है।



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