करोड़ों की ठगी करने वाले रैकेट का बीमा कंपनी से लिंक, एक पाॅलिसीधारी का डेटा 1200 में खरीदा , September 18, 2020 at 05:45AM

यूपी गाजियाबाद में बीमा पॉलिसीधारियों से ठगी करने वाले रैकेट के पकड़े जाने साथ ही डेटा खरीदी-बिक्री में लाखों के लेन-देन का खुलासा हुआ है। जालसाज रैकेट की प्राइवेट और सरकारी बीमा कंपनियों में तगड़ी घुसपैठ है। ठगों का गिरोह बीमा कंपनियों के अपने लिंक पॉलिसीधारियों का डेटा खरीदता है। एक-एक पॉलिसी धारी का डेटा 1200-1200 में खरीदा जाता है। इस तरह पांच-पांच, दस-दस लाख तक पॉलिसीधारियों के डेटा के एवज में दिया जाता है। यूपी गाजियाबाद के गिरोहबाजों ने पुलिस और साइबर सेल के अफसरों को ऐसी कई अहम जानकारियां दी हैं।
पूछताछ में पता चला है कि गाजियाबाद में रैकेट चलाने वाले नरेंद्र यादव और उसके साथ मोहम्मद असलम, मोहम्मद इलियास की सरकारी और प्राइवेट बीमा कंपनियों के मुख्यालय में खासी घुसपैठ है। वे लाखों रुपए केवल पॉलिसीधारियों का डेटा खरीदने में खर्च करते हैं। डेटा के नाम पर उन्हें पॉलिसी लेने वाले का नाम, पता, जन्म तारीख, पारिवारिक रिकार्ड और पॉलिसी का ब्योरा के साथ मोबाइल नंबर उपलब्ध करवाया जाता है। ठगों के अनुसार उन्हें मालूम है कि इतनी जानकारी के आधार पर ही वे कई पॉलिसीधारियों को फंसाकर लाखों रुपए कमा सकते हैं। इस वजह से वे डेटा खरीदने में ही मोटी रकम खर्च करने में हिचकते नहीं हैं।
ठगों का कहना है कि दो-तीन पॉलिसीधारी से ही वे अपनी इन्वेटमेंट की रकम निकाल लेते हैं। उनके काम में नुकसान का जोखिम नहीं है। पुलिस अब इन जालसाजों से मिली जानकारी के आधार पर बीमा कंपनी में काम करते हुए जालसाजों को डेटा बेचने का पता लगाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए ठगों के मोबाइल से मिले नंबरों की छानबीन की जा रही है। अफसरों के अनुसार मोबाइल नंबरों से ही इनके कई सफेदपोश साथी सामने आ सकते हैं।

फरार नरेंद्र गिरोह का मास्टरमाइंड अपना गैंग बनाकर कर रहा ठगी
ठगों के गैंग का मास्टर माइंड नरेंद्र यादव फिलहाल फरार है। पुलिस को पता चला है कि वह पिछले चार-पांच साल से इसी तरह ऑन लाइन ठगी का गैंग चला रहा है। वह पहले दो पार्टनर के साथ काम करता था। अभी उसने अपना गैंग अलग बना लिया है। असलम, इलियास और धीरेंद्र उसी के लिए काम करते थे। शक है कि नरेंद्र का गाजियाबाद के कुछ इलाकों में खासा रुतबा है। उसकी पुलिस में भी सांठगांठ का शक है। यह भी शक है कि छत्तीसगढ़ पुलिस के पहुंचने की उसे भनक लग गई थी। इस वजह से वह फरार होने में सफल हो गया।



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Linked to insurance company of fraudulent racket worth crores, bought data of a policy holder in 1200


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