122 दिन की बारिश 94 दिन में हो गई, बरसों बाद दर्जनभर बांध फुल, नदी-नाले लबालब , September 13, 2020 at 05:55AM

ठाकुरराम यादव | मानसून के सीजन यानी 122 दिन में होने वाली बारिश छत्तीसगढ़ में इस साल 18 दिन पहले ही पूरी हो गई है। राज्यभर में 1 जून से 30 सितंबर तक औसत 1150 मिमी बारिश होती है। इस साल 12 सितंबर को ही 1146.2 मिमी पानी गिर चुका है। यानी मानसून के चार महीने की बारिश के कोटे का 99.66 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसका असर है कि प्रदेश के दर्जनभर बड़े बांध अभी से 100 प्रतिशत भर चुके हैं। नदी-नाले भी लबालब हैं। अभी बचे हुए 18 दिन में जो भी बारिश होनी है, वह एक्सेस होगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस दौरान 100 मिमी से ऊपर वर्षा भी हो सकती है, क्योंकि प्रदेश में बारिश अभी जारी है। कोटा पूरा होने के बावजूद पिछले दो-तीन दिनों में राज्य में कहीं-कहीं हल्की तो कहीं भारी वर्षा हो चुकी है। शेष|पेज 9

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि इस साल मानसून का आगमन भी धमाकेदार था और अब तक अच्छी बारिश जारी है। जून में राज्य में 44 फीसदी ज्यादा और अगस्त में 36 फीसदी अधिक हो गई थी। जुलाई और सितंबर में अब तक ज्यादा पानी नहीं गिरा है, लेकिन जून और अगस्त की भारी बारिश ने इस साल का कोटा समय से पहले पूरा कर दिया। जुलाई में 27 फीसदी और सितंबर के 12 दिनों में 26 फीसदी कम पानी गिरा है।
बीजापुर में करीब दोगुनी वर्षा सरगुजा में 32 प्रतिशत कम
बीजापुर में मानसून की शुरुआत से लेकर अब तक लगातार ज्यादा बारिश हो रही है। यहां 2187.2 मिमी बारिश हो चुकी है, जो औसत से 80 फ़ीसदी ज्यादा है। बस्तर के ही सुकमा जिले में भी 1374.1 मिमी (औसत से 35 प्रतिशत अधिक) पानी गिरा है। कोंडागांव में भी औसत से 30% ज्यादा पानी गिर चुका है। शेष सभी जिले में औसत से 25 से 30 प्रतिशत ज्यादा वर्षा हुई है। हालांकि सरगुजा सूखा है और वहां अब तक 764.7 मिमी बारिश हुई है, जबकि 1119.8 मिमी होनी चाहिए थी।

बस्तर में भारी बारिश
पिछले 24 घंटे के दौरान बस्तर में भारी बारिश हुई है। केशकाल में सबसे ज्यादा 60 मिलीमीटर पानी गिरा है। कोंडागांव, जशपुरनगर, बिल्हा, प्रेमनगर, पखांजुर में 30, कांकेर, अंतागढ़, तिल्दा, भानुप्रतापपुर, बस्तर, कवर्धा, मानपुर, सीतापुर, मनेंद्रगढ़ में 20 मिमी बारिश हुई। प्रदेश के अन्य कई जगहों पर हल्की बारिश और बूंदाबांदी हुई। शनिवार को दिन में राज्य के ज्यादातर स्थानों पर आसमान में बादल छाए रहे। कहीं-कहीं पर हल्की बूंदाबांदी हुई।

दर्जनभर बांध 100 फीसदी तक लबालब
राज्य के करीब दर्जनभर बांध लबालब है। अधिकांश जलाशय अगस्त से ही 100 फीसदी तक भर चुका है। सिंचाई विभाग को इन बांधों से पानी छोड़ना पड़ रहा है। बिलासपुर के खारंग, मुंगेली के मनियारी, बस्तर के कोरसटेडा, बलौदाबाजार के बेल्लार, कबीरधाम के सरोधा डैम, बिलासपुर के घोघा, कोरिया के झुमका में 100 फीसदी पानी है। कबीरधाम के क्षीरपानी में 98.99 तथा सुतियापाट में 97.56 तथा धमतरी के मुरुमसिल्ली में 94.75 फीसदी पानी भर चुका है। गंगरेल में 77.94 फीसदी पानी है। यही नहीं, लगातार बारिश से लगभग सभी जिलों में खेती के लिए पानी भरपूर है। अधिकांश जगह धान के खेतों में डेढ़ फीट तक पानी भरा है।


रायपुर में अगस्त के अंतिम 10 दिन में भूजल स्तर 3.23 मीटर तक बढ़ा
केंद्रीय भूजल बोर्ड ने कोरोना की वजह से अभी भूजल की स्थिति का आंकलन नहीं किया। यह पोस्ट मानसून होगा, लेकिन भूजल वैज्ञानिकों के मुताबिक रायपुर शहर में 10 अगस्त से 29 अगस्त के बीच ओसीएम चौक के पीजोमीटर में भूजल स्तर 3.23 मीटर बढ़ा है। सीनियर साइंटिस्ट अजीत शुक्ला के मुताबिक अगस्त के अंतिम हफ्ते में की तुलना अगर मई से करें तो भूजल स्तर औसतन 14.32 मीटर बढ़ चुका है। शहर के इनर सर्कल में शंकर नगर बीटीआई ग्राउंड के ओपन कुएं में 10 से 29 अगस्त के बीच 0.66 मीटर तक भूजल स्तर ऊपर गया है।


रायपुर और आसपास भूजल

बोरवेल : 3.23 मीटर
कुओं में : 1.62 मीटर
अभनपुर : 2.78 मीटर
आरंग : 3.25 मीटर
धरसीवा : 3.49 मीटर
तिल्दा : 6.49 मीटर
(मई 2020 से अगस्त अंत तक)

आज भी हल्की बारिश के आसार
लालपुर मौसम केंद्र के मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा के अनुसार बिहार से बांग्लादेश-असम होते हुए मणिपुर तक एक मानसून द्रोणिका है। देश के उत्तर में ऊपरी हवा में बड़ा सिस्टम है। एक चक्रवात पश्चिम बंगाल की खाड़ी और तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर है। इसके असर से 13 सितंबर को प्रदेश के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने या गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। एक-दो जगह भारी वर्षा हो सकती है।

ऐसी बारिश खरीफ फसल के लिए बहुत उपयोगी
"इस साल अब तक हुई बारिश खरीफ की फसल के लिए बहुत उपयोगी है। जरूरत का पानी खेतों को मिल चुका है। इस साल जून में अच्छी बारिश होने के कारण बुवाई जल्दी हुई थी, इसलिए फसल जल्दी तैयार होगी।"
-डा. जीके दास, एचओडी कृषि मौसम



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रायगढ़ का कयाघाट (फाइल फोटो)।


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