15 साल पहले घर से निकली थी विक्षिप्त महिला, इलाज के बाद घर का पता बताया तो सालसा ने भेजा पश्चिम बंगाल , September 06, 2020 at 06:40AM

15 वर्ष पूर्व घर से लापता महिला को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (सालसा) द्वारा उसके घर पहुंचाया जा रहा है। शनिवार को मेल एक्सप्रेस से उसे दो महिला पुलिस के साथ रवाना किया गया। वह पश्चिम बंगाल के जिला 24 परगना की रहने वाली है।
विधिक सहायता अधिकारी शशांक दुबे ने बताया कि राज्य मानसिक चिकित्सालय सेंदरी द्वारा 26 जून को यह सूचित किया गया कि अस्पताल में भर्ती मानसिक मरीज पार्वती पारोई स्वस्थ हो चुकी है। उसे उसके परिवारजन से मिलाने के लिए उसके घर भिजवाने या पश्चिम बंगाल में ही पुर्नवास की कार्यवाही करने प्राधिकरण से कहा गया था। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा तत्काल कार्यवाही करते हुए पश्चिम बंगाल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को मरीज को उसके परिजनों से मिलाने या पुर्नवास संबंधी आवश्यक कार्यवाही करने के लिए पत्र लिखा गया। जिस पर पश्चिम बंगाल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा कार्यवाही करते हुए उन्होंने तत्सबंध में अपने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, साउथ 24 परगना को इस मरीज के परिजनों के संबंध में पता लगाने कहा गया। तत्पश्चात पश्चिम बंगाल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा यह सूचना दी गई कि जांच के दौरान गोपाल पारोई ग्राम दक्षिण शिबपुर, थाना फ्रेजरगंज काॅस्टल, जिला साउथ 24 परगना ने बताया कि पार्वती पारोई नाम की कोई रिश्तेदार उनके यहां नहीं है। पर उनकी बहन जिसका नाम लक्ष्मी है वह नार्थ 24 परगना से 15 वर्ष पहले गुम हो गई है। उसकी दिमागी हालत भी ठीक नहीं थी। उन्होंने लक्ष्मी की फोटो पहचान के लिए भेजी। जिस पर अस्पताल द्वारा पहचान कर बताया गया कि पार्वती ही लक्ष्मी है। इसकी सूचना पुनः अस्पताल के द्वारा पश्चिम बंगाल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी गई। उसके बाद पश्चिम बंगाल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर से ट्रेन के माध्यम से महिला को भिजवाए जाने का अनुरोध किया गया ताकि उसके परिजनों से उसे मिला सके।

तीन साल पहले कोरबा पुलिस ने कराया था भर्ती
महिला को तीन साल पहले राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय सेंदरी में कोरबा पुलिस न्यायालय के आदेश पर भर्ती कराया था। वहां डॉ. आशुतोष तिवारीऔर डॉ.सतीश श्रीवास्तव ने उसका उपचार किया। तीन साल तक लगातार उपचार होने के बाद महिला पूरी तरह स्वस्थ हो गई। उसने खुद को पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले का होना बताया। हालांकि जब उसे भर्ती किया गया था तो उसका नाम पार्वती बताया गया था लेकिन छानबीन में उसका नाम लक्ष्मी होने का पता चला।



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