आइसोलेशन वार्ड में 2 घंटे तक पड़ा रहा शव , September 18, 2020 at 12:04PM

जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में गुरुवार को मौत के दो घंटे बाद तक कोरोना पॉजिटिव मरीज की डेड बॉडी दूसरे अन्य मरीजों के बीच पड़ी रही। इस वार्ड में अन्य संदिग्ध मरीजों को रखा गया था। जामुल थाना के सुड्‌डू गांव निवासी 65 वर्षीय इस मरीज को लेकर परिजन सुबह 10 बजे जिला अस्पताल की कैजुअल्टी पहुंचे। वहां के डॉक्टरों ने जांच किए बिना मरीज को यहां के प्रथम तल पर स्थित आइसोलेशन वार्ड में भेज दिया।
सांस लेने में तकलीफ और कमजोरी होने की हिस्ट्री मिलने से आइसोलेशन वार्ड के डॉक्टर ने इस मरीज को भर्ती करने के बाद रैपिड किट से जांच की। इसके बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आई। ऑक्सीजन लगाकर वहीं इलाज शुरू कर दिया गया। एक घंटे के अंदर मरीज की मौत हो गई। परिवार के सदस्य ड्यूटी डॉक्टर को बुलाने गए तो 45 मिनट डॉक्टर को पहुंचने में लगा। पहुंचने के बाद आंख में टार्च जलाकर देखे और डेथ हो जाना बताया। परिजनों ने करीब 2 बजे शव को कैडिवर बैग में रखा, मरच्यूरी पहुंचाया। पीपीई किट का भी उपयोग नहीं हुआ।

आखिर क्या कुछ हुआ मौके पर

  • सुबह 09 : 30 बजे परिजन कैजुअल्टी पहुंचे।
  • सुबह 10 : 00 बजे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती।
  • सुबह 10 : 30 बजे जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
  • सुबह 11: 30 बजे मरीज की नाड़ी चलना बंद।
  • सुबह 11: 35 बजे ड्यूटी डॉक्टर को सूचना दी।
  • दोपहर 12:10 बजे डॉक्टर ने मरीज को देखा।
  • दोपहर 01: 54 बजे शव मरच्यूरी ले जाया गया।

ईसीजी के बाद पता चला कि हो गई मौत
आइसोलेशन वार्ड के डॉक्टरों ने जिस ईसीजी मशीन से ईसीजी कर कोरोना मरीज की डेथ कंफर्म की, पूरे दिन उसी ईसीजी मशीन का इस्तेमाल कैजुअल्टी के साथ ही संदेहास्पद मरीजों की जांच में इस्तेमाल करते रहे। जानकारी लेने पर पता चला कि आनन-फानन में आइसोलेशन वार्ड खोल दिया गया। जिम्मेदारों ने जरूरी इंतजाम नहीं किए। इस प्रकार बड़ी लापरवाही इस दौरान सामने आई।

दावा 50 बेड का, पर मौके पर मिले सिर्फ 12
जिला प्रशासन ने मंगलवार को जिला अस्पताल में गुरुवार से ऑक्सीजन सिलेंडर युक्त 50 बेड का आइसोलेशन वार्ड संचालित हो जाने की दावेदारी की थी, लेकिन शाम तक वहां एक वार्ड में ऑक्सीजन सिलेंडर युक्त मात्र 12 बेड मिले। बाहर गैलरी में पांच बेड बिछे मिले, लेकिन उनके आक्सीजन सिलेंडर तक नहीं था। इस प्रकार प्रशासन की गलती सामने आई।

निगेटिव को पॉजिटिव बताकर कोविड सेंटर भेजा
सीएमएचओ कार्यालय के रिकार्ड और जिला अस्पताल की लापरवाही के कारण नयापारा दुर्ग निवासी 46 वर्षीय नान कोविड पेशेंट को गुरुवार को जुनवानी के कोविड अस्पताल भेज दिया गया। वहां पहुंचने के बाद ट्रायज एरिया में डॉक्टर इस मरीज का आक्सीजन सेचूरेशन, बीपी वगैरह ले ही रहे थे कि फोन कर पेशेंट को निगेटिव होने की जानकारी दी गई। इस तरह जिस एंबुलेंस से यह मरीज 3 अन्य मरीजों के साथ कोविड अस्पताल पहुंची थी।

निगेटिव पेशेंट को ट्रू-नॉट में पॉजिटिव बताया, लापरवाही
नयापारा दुर्ग निवासी इस पेशेंट के रेफरल कार्ड पर ड्यूटी डॉक्टर ने लाल पेन जो लिखा, वह हैरान करने वाला है। उसने साफ-साफ लिखा है कि सीएमएचओ कार्यालय के रिकार्ड अनुसार पेशेंट ट्रू-नॉट पॉजिटिव है। कोविड अस्पताल पहुंच गया तो उसे निगेटिव बताया दिया गया।


सीधी बात
डॉ. पी बालकिशोर, सिविल सर्जन

सवाल - कोरोना पॉजिटिव मरीज की डेड बॉडी दो घंटे अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में पड़ी रही, कैसे?
जवाब - पहली बात यह कि आइसोलेशन वार्ड कोरोना पॉजिटिव मरीज के लिए नहीं है। यहां आने वाले हर संदेहास्पद की पहले कैजुअल्टी में रैपिड किट से जांच की जाती है। निगेटिव आने पर ही उन्हें आइसोलेशन में शिफ्ट करते हैं।
सवाल - सुड्‌डू गांव के मरीज की जांच तो आइसोलेशन वार्ड में हुई, पॉजिटिव के बाद शिफ्ट भी नहीं किया।
जवाब - यह प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। मैने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना जांच के कोई पेशेंट आइसोलेशन वार्ड में नहीं भेजा जाएगा। रैपिड किट से रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही वह उस वार्ड में भर्ती किए जा सकते हैं। इसे नहीं मानना गलत है।
सवाल - आपके मातहतों की इस लापरवाही से तो संक्रमण रोकने की बजाय फैलने की आशंका पैदा हो गई है?
जवाब - जी, मै इसे देखता हूं। किन परिस्थतियों में लापरवाही हुई।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
The dead body was kept in isolation ward for 2 hours


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3iMtJK0

0 komentar